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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • “आप जो कुछ भी करते हैं वह निरर्थक होगा, लेकिन यह महत्त्वपूर्ण है कि आप इसे करें।” वर्तमान शासन प्रणाली में जहाँ प्रशासन पर रचनात्मकता और उत्तरदायित्व के निर्वहन की कमी का आरोप लगाया जा रहा है, वहाँ इस कथन का क्या महत्त्व है? आपके विचार से इस समस्या के समाधान के लिये कौन-से कदम उठाए जा सकते हैं?

    08 Aug, 2018 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    उत्तर :

    उत्तर की रूपरेखा

    • प्रभावी भूमिका में प्रशासन की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में प्रश्नगत कथन को स्पष्ट करें।
    • तार्किक तथा संतुलित विषय-वस्तु में कथन के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए समस्या के समाधान के लिये उठाए जाने वाले कदमों का उल्लेख करें।

    वर्तमान प्रशासन में रचनात्मकता की कमी और यथास्थिति देखने को मिलती है। इसके मुख्य कारण लालफीताशाही, समयबद्ध सेवा वितरण का न होना, नौकरशाही का राजनीतीकरण, पहल करने के लिये प्रेरणा का अभाव, मीडिया ट्रायल इत्यादि हैं। 

    इस परिदृश्य में बड़े सुधारों की कमी, युवा अधिकारियों का गिरता मनोबल, धीमी कार्य-संस्कृति और मुद्दों से निपटने को परिवर्तनकारी दृष्टिकोण तथा अधिक वृद्धिशील दृष्टिकोण की कमी उभरकर सामने आई है। ऐसी स्थिति में किसी भी डर और निषेध के बिना कार्रवाई करने की आवश्यकता है। इस कारण इस परिदृश्य में यह वक्तव्य पूर्णतया सही प्रतीत होता है कि भले ही लक्षित जनता कम हो या प्रभाव क्षेत्र कम हो, किसी भी सार्वजनिक अधिकारी को ज़िम्मेदारी व निर्णय लेने से दूर नहीं भागना चाहिये।

    इस समस्या के निवारण हेतु निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं-

    1. प्रक्रियात्मक (Procedural):
    (i) समयबद्ध डिलिवरी, जैसे-तेलंगाना में लोकसेवा विधेयक।
    (ii) परिणाम आधारित निगरानी।
    (iii) प्रदर्शन पर आधारित वेतन।
    (iv) समयाधारित आकलन (Timely Assessment)।

    2. नैतिक (Ethical):
    (i) परस्पर संवादात्मक सेमिनार, जैसे-आईडीएस (Income Declaration Scheme) को जारी करने के पूर्व प्रधानमंत्री ने कर अधिकारियों के साथ ‘राजस्व ज्ञान संगम’ आयोजित किया।
    (ii) प्रोत्साहन सत्र।
    (iii) रोल मॉडल अभियानों का आयोजन।
    (iv) राजनैतिक तटस्थता मूल्य शिक्षण।
    (v) पारदर्शिता।
    (vi) भावनात्मक परामर्श।
    (vii) अधिकारियों द्वारा की जाने वाली पहल (initiative) को जोखिम से सुरक्षा प्रदान करने के लिये वास्तविक गलती और दुर्भावनापूर्ण त्रुटि के बीच अंतर हेतु लेखा परीक्षा करना।

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