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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्राचीन स्मारकों के संरक्षण के लिये भारत के संविधान में कौन-से प्रावधान किये गए हैं? इससे संबंधित कानून में हुए हालिया परिवर्तन से जुड़ी चिंताएँ क्या हैं? टिप्पणी करें।

    04 Sep, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    उत्तर की रूपरेखा –

    • प्राचीन स्मारकों के संरक्षण से संबंधित संवैधानिक प्रावधान लिखें।
    • संबंधित कानून में संशोधन से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख करें।
    • निष्कर्ष

    प्राचीन स्मारकों का अपना सांस्कृतिक महत्त्व होता है, जो हमें हमारी विरासत से परिचित करवाता है। इससे लोगों में देश तथा संस्कृति के प्रति स्वाभिमान जागता है। प्राचीन स्मारकों के संरक्षण के लिये भारत के संविधान में निम्नलिखित प्रावधान किये गए हैं-

    • संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्त्व वाले घोषित किये गए कलात्मक या ऐतिहासिक अभिरुचि वाले प्रत्येक संस्मारक, स्थान या वस्तु का यथास्थिति विरूपण, विनाश, अपसारण, व्यय या निर्यात से संरक्षण करना राज्य की बाध्यता होगी। 
    • अनुच्छेद 51 क (च) के अनुसार भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्त्तव्य होगा कि वह हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्त्व समझे तथा उसका संरक्षण करे। 

    हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्त्विक स्थल अवशेष अधिनियम, (AMASR Act) 1958 में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया है, जिसके तहत प्राचीन स्मारकों के 100 मीटर के दायरे में भी निर्माण कार्य किया जा सकेगा। इस प्रस्तावित संशोधन से जुड़ी चिंताएँ निम्नलिखित हैं –

    • अगर यह संशोधन पारित हो जाता है तो यह भारत के लगभग 3650 राष्ट्रीय संरक्षित विरासत स्थलों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न कर देगा। 
    • प्रस्तावित संशोधन के पारित हो जाने पर इन क्षेत्रों को कॉर्पोरेट और भू-व्यापारियों के चंगुल से बचा पाना अत्यंत कठिन हो जाएगा।   
    • अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि इसके लिये भारतीय पुरातत्त्व विभाग की सहमती ली गई है या नहीं। 
    • मौजूदा विधिक प्रावधानों के बावज़ूद राजधानी के कुतुबमीनार क्षेत्र में भारी अतिक्रमण है। इस संशोधन के बाद इन अतिक्रमणों को एक तरह से विधिक मान्यता मिल जाएगी।  

    प्राचीन स्मारकों के संरक्षण के लिये संसद को ऐसे प्रस्तावों को पारित करने से बचना चाहिये, परंतु यदि गंभीर विचार-विमर्श के उपरांत उक्त संशोधन करना ज़रूरी ही लगे तो नीति-निर्माण के समय पूरी तरह से सतर्कता बरतनी चाहिये। प्राचीन विरासतों का न केवल सांस्कृतिक महत्त्व होता है, बल्कि पर्यटन और रोज़गार की दृष्टि से इनका आर्थिक महत्त्व भी है। 

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