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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • बिम्सटेक (BIMSTEC) क्या है? भारत के लिये इसके महत्त्व की चर्चा करें। बिम्सटेक के समक्ष कौन-कौन सी चुनौतियाँ हैं?

    25 Nov, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध

    उत्तर :

    उत्तर की रूपरेखा-

    • BIMSTEC का संक्षिप्त परिचय दें।
    • भारत के लिये इस संगठन के महत्त्व को समझाएँ।
    • बिम्सटेक के समक्ष मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करें।
    • निष्कर्ष

    एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-sectoral Technical and Economic Cooperation ) की स्थापना जून 1997 में हुई थी। इस संगठन में भारत सहित नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। प्रारंभ में यह चार देशों भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और थाईलैंड (BIST-EC) के आर्थिक सहयोग पर आधारित संगठन था। संगठन का स्थायी कार्यालय ढाका में स्थापित किया गया है। 

    मूल रूप से यह एक सहयोगात्मक संगठन है, जो कि व्यापार, ऊर्जा, पर्यटन, मत्स्य पालन, परिवहन और प्रौद्योगिकी इन छः क्षेत्रों को आधार बनाकर सृजित किया गया था , परंतु बाद में कृषि, गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद, संस्कृति, जनसंपर्क, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण और जलवायु-परिवर्तन को भी इसमें शामिल किया गया।  

    भारत के लिये BIMSTEC के महत्त्व को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-  

    • पाकिस्तान की नकारात्मक भूमिका के कारण भारत सार्क के बदले BIMSTEC को ज़्यादा प्रमुखता दे रहा है।
    • भारत की BIMSTEC में सक्रिय भागीदारी से भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
    • BIMSTEC सदस्यों से बहुस्तरीय संबंध स्थापित कर भारत अपने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को गति प्रदान कर सकता है।
    • BIMSTEC भारत-म्यांमार के बीच कलादान मल्टीमॉडल पारगमन परिवहन परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड (IMT) राजमार्ग परियोजना के विकास में भी सहयोग की उम्मीद की जा सकती है।
    • यह संगठन दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्वी देशों के बीच सेतु की तरह काम करता है। इस समूह में दो देश दक्षिणपूर्वी एशिया के हैं। म्यांमार और थाईलैंड भारत को दक्षिण पूर्वी इलाकों से जोड़ने के लिये बेहद अहम है। इससे भारत के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

    BIMSTEC के समक्ष चुनौतियाँ 

    • BIMSTEC क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों के विकास के लिये एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सदस्य देशों के बीच सहमति अभी नहीं बन पाई है।
    • संगठन के कुछ सदस्य देशों के बीच शरणार्थियों की समस्या क्षेत्र में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक असंतुलन पैदा कर रही है।
    • संगठन की बैठकें अथवा शिखर सम्मेलन नियमित नहीं हैं, जिसके कारण सदस्य देशों की संगठन के उद्देश्यों के प्रति रुचि कम हो जाती है।   

    सार्क के बगैर भी भारत दक्षिण एशियाई देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने के लिये कई स्तरों पर काम कर रहा है। बिम्सेटक निश्चित तौर पर अब इस क्षेत्र का सबसे अहम् संगठन साबित होगा। भारत ''ब्रांड बिम्सटेक'' को स्थापित करने के लिये कारोबार व पर्यटन की प्रदर्शनी के साथ-साथ सदस्य देशों की स्टार्ट अप कंपनियों के लिये अलग से एक सेमिनार का आयोजन करने का भी इच्छुक है।
     

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