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सुश्री लीना चटर्जी वर्तमान में एक ऐसे राज्य में प्रमुख सचिव (शहरी विकास) के रूप में कार्यरत हैं, जिसने महत्त्वाकांक्षी जलवायु-अनुकूल आधारभूत संरचना लक्ष्यों के लिये प्रतिबद्धता व्यक्त की है। एक महत्त्वपूर्ण मेट्रो रेल विस्तार परियोजना, जिसे आंशिक रूप से एक अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी ने वित्तीय सहायता प्रदान की है, अब उन्नत चरण में पहुँच चुकी है।
एक आंतरिक ऑडिट में यह संकेत मिला है कि यद्यपि परियोजना वर्तमान पर्यावरणीय मंज़ूरी के अनुरूप है, यह हाल ही में जारी किये गए जलवायु-अनुकूलन दिशा-निर्देशों के मानदंडों को पूरा नहीं करती, जो अतिरिक्त बाढ़-रोधी उपायों की सिफारिश करते हैं। इन उपायों को शामिल करने से लागत में महत्त्वपूर्ण वृद्धि होगी और परियोजना की पूर्णता कम से कम एक वर्ष विलंबित हो जाएगी। वित्तपोषण एजेंसी ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिया है कि निरंतर वित्तपोषण समय पर कार्य पूरा करने पर निर्भर करता है, न कि पूर्व निर्धारित समय से किये गए अनुपालन पर।
साथ ही, जलवायु वैज्ञानिकों और नागरिक समाज समूहों ने चेतावनी दी है कि अद्यतन मानकों की अनदेखी भावी यात्रियों को गंभीर जोखिम में डाल सकती है। राजनीतिक नेतृत्व परियोजना का उद्घाटन आगामी चुनाव चक्र से पहले करने की आवश्यकता पर बल देता है, वहीं वरिष्ठ अधिकारी चेतावनी देते हैं कि अनुमोदन प्रक्रिया को पुनः खोलने से मुकदमेबाजी और प्रशासनिक ठहराव उत्पन्न हो सकता है।
प्रश्न
सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़
इस मामले में कौन-कौन से नैतिक मुद्दे शामिल हैं?
सुश्री चटर्जी के पास कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं? प्रत्येक के लाभ और हानि का आकलन कीजिये।
सार्वजनिक हित, सततता और प्रशासनिक ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने के लिये सुश्री चटर्जी को कौन-सा कार्यवाही मार्ग अपनाना चाहिये? न्यायसंगत उत्तर दीजिये।