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अनन्या शर्मा एक बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन में उप-प्रबंधक हैं, जो अवसंरचना विकास के लिये उत्तरदायी है। संगठन की तकनीकी प्रतिष्ठा सुदृढ़ है, परंतु कार्य-संस्कृति विषाक्त बनी हुई है। वरिष्ठ अधिकारी बैठकों में अधीनस्थों को प्रायः डांटते फटकारते हैं, कनिष्ठों के कार्य का श्रेय स्वयं ले लेते हैं और असहमति वाले विचारों को हतोत्साहित करते हैं। बिना किसी मान्यता के लंबी कार्य-अवधि सामान्य बात हो गये हैं, जिसके परिणामस्वरूप मनोबल में गिरावट और कर्मचारियों का उच्च पलायन देखने को मिलता है।
अनन्या देखती हैं कि प्रतिभाशाली युवा अधिकारी अपमान के भय से नवीन विचार साझा करने में हिचकिचाते हैं। विशेष रूप से महिला कर्मचारी अपनी चिंताएँ उठाने में असहज महसूस करती हैं, क्योंकि वरिष्ठ पुरुष अधिकारियों द्वारा नियंत्रित अनौपचारिक नेटवर्क निर्णय-निर्माण पर हावी हैं। यद्यपि प्रत्यक्ष उत्पीड़न नहीं है, फिर भी कार्य-पर्यावरण मनोवैज्ञानिक रूप से असुरक्षित और हतोत्साहित करने वाला है।
हाल ही में एक सक्षम कनिष्ठ अधिकारी, रवि, से परियोजना-फाइल में एक छोटी-सी प्रक्रियागत त्रुटि हो गयी। रचनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक में उसे सार्वजनिक रूप से फटकार लगायी। अत्यधिक निराश होकर रवि ने ‘व्यक्तिगत कारणों’ का हवाला देते हुए स्थानांतरण के लिये आवेदन कर दिया। ऐसी घटनाएँ अब सामान्य हो गयी हैं, जिससे उत्पादकता और टीम-एकजुटता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
मध्यम-स्तरीय अधिकारी होने के नाते अनन्या को अपनी टीम का सम्मान प्राप्त है, परंतु वरिष्ठ अधिकारियों पर उनका अधिकार सीमित है। उनका मानना है कि ऐसी विषाक्त कार्य-संस्कृति न केवल कर्मचारियों के कल्याण को क्षति पहुँचाती है, बल्कि दक्षता, नवोन्मेष और सार्वजनिक सेवा-प्रदाय को भी प्रभावित करती है।
अनन्या अब एक दुविधा में हैं: क्या वह अपने करियर की प्रगति की रक्षा के लिये मौन रहे या कार्यस्थल की संस्कृति में सुधार लाने, गरिमा को बढ़ावा देने और संगठन के भीतर नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिये औपचारिक या अनौपचारिक रूप से कदम उठाए।
प्रश्न 1. उपर्युक्त प्रकरण में कार्यस्थल की संस्कृति से संबंधित प्रमुख नैतिक मुद्दों का अभिनिर्धारण कीजिये। ऐसे मुद्दे कर्मचारियों के मनोबल, उत्पादकता और संगठनात्मक प्रभावशीलता को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
प्रश्न 2. विषाक्त कार्यस्थल प्रथाओं से निपटने में एक मध्यम-स्तरीय अधिकारी के रूप में अनन्या किन नैतिक दुविधाओं का सामना करती हैं? उनके लिये उपलब्ध संभावित कार्य-मार्गों पर चर्चा कीजिये तथा उनके गुण-दोष स्पष्ट कीजिये।
प्रश्न 3. नैतिक नेतृत्व और सकारात्मक संगठनात्मक संस्कृति किस प्रकार बेहतर शासन एवं कर्मचारी-कल्याण में योगदान दे सकती है? सार्वजनिक संस्थानों में एक स्वस्थ और समावेशी कार्य-पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिये उपाय सुझाइये।
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