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महत्त्वपूर्ण संस्थान/संगठन

महत्त्वपूर्ण संस्थान

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC)

  • 10 Apr 2020
  • 23 min read

 Last Updated: July 2022 

परिचय  

  • इस्लामिक सहयोग संगठन (Organisation of Islamic Cooperation- OIC) की स्थापना 25 सितंबर 1969 को रबात में हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में हुई थी। यह एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। यह सयुंक्त राष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन है। अंतर-सरकारी संगठन (Inter-governmental Organization-IGO) शब्द संधि द्वारा बनाई गई एक इकाई को संदर्भित करता है, जिसमें दो या दो से अधिक राष्ट्र शामिल होते हैं जो सामान्य हितों के मुद्दों पर आपसी विश्वास के साथ काम करते हैं।
  • इसमें सदस्य राष्ट्रों की संख्या 57 हैं, इसमें 40 मुस्लिम बहुल देश हैं।
  • इसका मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दा में है। पाकिस्तान इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल है। 
  • IOC के पास सयुंक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के स्थायी प्रतिनिधिमंडल है।
  • रूस और थाईलैंड जैसे देश इसके पर्यवेक्षक सदस्य हैं, जहाँ मुस्लिम की संख्या अधिक नहीं है।
  • इस संगठन को दुनिया भर की मुस्लिमों की सामूहिक आवाज़ कहा जाता है।
  • सयुंक्त राष्ट्र के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन है। 
  • IOC में सयुंक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब देश मुख्य भूमिका में है।
  • IOC के शिखर सम्मेलन का आयोजन प्रत्येक तीन वर्ष बाद किया जाता है।
  • लगभग 34% मुस्लिम आबादी वाला इथोपिया इसका सदस्य नहीं है।
  • यह अपने सदस्य देशों में सामजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाता है।
  • IOC के विदेश मंत्रियों की प्रथम बैठक वर्ष 1970 में संपन्न हुई थी तथा IOC के चार्टर को वर्ष 1972 में अपनाया गया था। 28 जून 2011 को अस्ताना (कज़ाख़िस्तान) में 38वीं बैठक के दौरान संगठन नाम ‘ऑर्गनाइजेशन ऑफ द इस्लामिक कॉन्फ्रेंस’ (Organisation of the Islamic Conference- OIC) से बदलकर ‘ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन’ (Organisation of Islamic Cooperation-OIC) किया गया।

IOC  के उद्देश्य-

  • इसका उद्देश्य दुनिया के विभिन्न देशों के लोगों के बीच अंतर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव को बढ़ावा देना और साथ ही दुनिया के मुस्लिम समुदायों के हितों की रक्षा और संरक्षण का प्रयास करना है। 
  • सदस्य देशों के मध्य आर्थिक सामाजिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और अन्य महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्लामिक एकजुटता को प्रोत्साहन देना तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से जुड़े सदस्यों के मध्य परामर्श की व्यवस्था करना है।
  • न्याय पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के विकास के लिये  आवश्यक कदम उठाना तथा धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के प्रयासों में समन्वय स्थापित करना जैसे- फिलिस्तीन संघर्ष को समर्थन देना तथा उनके अधिकारों और ज़मीनों की वापसी में उन्हें सहायता प्रदान करना।
  • विश्व के सभी मुसलमानों की गरिमा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा करने के लिये  उनके संघर्षों को मजबूती प्रदान करना तथा अन्य सदस्य देशों के मध्य तालमेल और सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिये  एक उपयुक्त वातावरण तैयार करना।

IOC के कार्य-

  • सदस्य देश के मध्य विवादों और युद्धों को सुलझाना।
  • संगठन के उद्देश्यों के खिलाफ जाने पर उनकी सदस्यता निलंबित करना जैसे- मिस्र, जो स्वयं एक सदस्य है, ने इज़राइल के साथ एक शांति संधि कर ली फलस्वरूप उसे वर्ष 1979 में संगठन से निलंबित कर दिया गया था, लेकिन पुनः वर्ष 1984 में संगठन में वापस स्थान दे दिया गया।
  • इसी प्रकार IOC ने अफग़ानिस्तान से सोवियत सैनिकों की बिना शर्त शीघ्र वापसी की मांग की थी। 

IOC  की शासकीय निकाय-

  • इस्लामिक सम्मेलन 
  • विदेश मंत्रियों की परिषद् 
  • जनरल सेक्रेटेरिएट

IOC और भारत-

  • पिछले कुछ वर्षों में भारत ने लगातार इस्लामिक देशों खासकर सऊदी अरब, ओमान, कतर और UAE के साथ अपने संबंधों में सुधार किया है।
  • यदि भारत इस संगठन में शामिल होता है तो उसकी पश्चिम एशिया में पकड़ मजबूत होगी।
  • सऊदी अरब के प्रिंस वर्ष 2017 में भारत आए थे जो कि भारत और सऊदी अरब के संबंधों में बेहतरी के प्रदर्शन को सूचित करता है।
  • IOC की विदेशी मंत्रियों की बैठक (45वीं) में बांग्लादेश ने यह सुझाव दिया था कि भारत में भी 10% से ज्यादा मुस्लिम आबादी है और इसलिये  भारत को भी इस संगठन में पर्यवेक्षक (Observer) के तौर पर शामिल कर लेना चाहिये लेकिन पाकिस्तान ने इसका विरोध दिया।
  • 1 और 2 मार्च, 2019 को IOC के विदेश मंत्रियों की परिषद् का 46वाँ सत्र अबू धाबी में आयोजित किया गया। भारत को IOC की इस बैठक के उद्घाटन सत्र में बतौर ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर’ आमंत्रित किया गया।
  • लेकिन अगले दिन 2 मार्च को समाधान सत्र में IOC ने जम्मू कश्मीर पर एक प्रस्ताव पारित कर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया। 

IOC का प्रस्ताव 

  • इस प्रस्ताव में कहा गया कि- जम्मू कश्मीर, पाकिस्तान और भारत के बीच विवाद का अहम् मुद्दा है और दक्षिण एशिया में शांति स्थापना के लिये  इसका हल होना जरुरी है। प्रस्ताव में कश्मीर में कथित मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर गहरी चिंता जताई गई और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का कश्मीर विवाद पर सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् को प्रस्तावों को लागू करने के लिये  उनके दायित्व की बात कही गई। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि भारत में भारतीय कश्मीरियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग कर रहा है। प्रस्ताव में भारतीय पायलट अभिनंदन को रिहा किये जाने पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ भी की गई है। 
  • इसके जबाब में भारत ने कहा कि- जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह उसका आंतरिक मामला है।
  • भारत का OIC देशों के साथ करीब 230 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2017) का कारोबार है जबकि पाकिस्तान का OIC से कारोबार 23-25 बिलियन डॉलर तक ही रहा है।
  • अब OIC का रुख पाकिस्तान से हटकर भारत की ओर ज़्यादा है।
  • भारत और ईरान के संबंधों में सऊदी अरब नही चाहता है कि भारत ईरान की तरफ मुड़े। 

भारत IOC का इस्तेमाल कैसे कर सकता है-

  • यदि भारत में पर्यवेक्षक या फिर सदस्य देश बनने का मौका मिलता है तो भारत को इसे स्वीकार करना चाहिए क्योंकि भारत इसके जरिये पाकिस्तान को काउंटर कर सकता है।
  • इसके अलावा भारत चीन पर भी इसके जरिये दबाव बना सकता है। ये दबाव OIC देशों द्वारा पहले पाकिस्तान और फिर चीन पर भी बनाया जा सकता है।
  • हलाकि भारत को अभी भी थोड़ी सतर्कता बरतने और इंतज़ार करने की जरुरत है कि आगे क्या फैसला लिया जा रहा है? क्योंकि जानकारों का कहना है कि OIC का राजनीतिकरण हो चुका है। 
  • जानकारों के मुताबिक OIC अपने उद्देश्यों का पालन नहीं कर रहा है। इसका इस्तेमाल अक्सर ही देशों ने अपने राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिये  किया है।
  • इसके अलावा लीबिया और इराक जैसे मुस्लिम देशों में इंटरनेशनल कम्युनिटी का हस्तक्षेप करना OIC पर सवाल खड़े करता है।
  • इस्लामिक  देशों के मामले में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का हावी होना OIC संगठन  में सुधार किये जाने को दर्शाता है।
  • OIC द्वारा संतुलित और निष्पक्ष रूप अपनाए जाने की जरुरत है।

अंतर्राष्ट्रीय जगत में IOC का महत्त्व-

  • इस संगठन के सभी सदस्य (57) देश मुस्लिम हैं, जिसका एक ‘कश्मीर कांटेवर ग्रुप’ भी है। इस पर पूरी तरह से पाकिस्तान का कब्ज़ा है और वह इसका इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे पर अपने हितों में करता रहा है।
  • यही कारण है कि पिछले 2 दशकों से कश्मीर मसले पर यह ग्रुप जो भी बयान जारी करता रहा, वह एकतरफा होता था। 
  • यह संगठन वैश्विक राजनीति पर अपना प्रभाव रखता है। इसके सभी सदस्य देश मिलकर फैसला लेते हैं और पूरा संगठन उस फैसले पर खड़ा रहता है।
  • सयुंक्त राष्ट्र में भी ये देश एक ‘ब्लॉक’ की तरह काम करते हैं और एक साथ वोट देते हैं। 

OIC  की आंतरिक चुनौतियाँ-

  • गुटनिरपेक्ष आंदोलन और लीग की तरह IOC भी स्थापना के बाद से अपने भीतरी राजनीतिक विरोधाभासों को दूर करने के लिये  संघर्ष करता रहा है।
  • समय-समय पर IOC गैर-सदस्य देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बारे में चिंता जताता रहता है, लेकिन इसने कभी भी मध्य-पूर्व के देशों में शिया या सुन्नी अल्पसंख्यकों द्वारा झेली जाने वाली समस्याओं को नहीं उठाया है।
  • गुटनिरपेक्ष देशों की तरह IOC में सदस्य देशों के बीच विवाद उत्पन्न होने पर इसके समाधान का कोई अधिकार किसी के पास नहीं है।
  • कोई भी सदस्य किसी के भी प्रस्ताव को वीटो कर सकता है, इसलिये  कोई भी गंभीर कार्यवाही अपने अंजाम तक नहीं पहुँच पाती है।
  • मध्य-पूर्व के देशों में समय-समय पर उठ खड़े होने वाले गंभीर संकटों के दौरान IOC की भूमिका मूक दर्शक से अधिक नहीं होती।
  • इस्लामिक पहचान को छोड़कर शायद ही ऐसा ही कोई कारक है जो इसके सदस्य देशों को एक-दूसरे के निकट लाने में सक्षम है।  

IOC में भारत भागीदारी का इच्छुक नहीं-

IOC के भारत विरोधी नज़रिये के कारण हालिया समय में भारत इस संगठन में भागीदारी  का इच्छुक नहीं रहा है और अभी भी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि भारतीय नेतृत्त्व इस संगठन में अपनी भावी भूमिका को लेकर क्या सोच रहा है।

  • इस संबंधों के कारण ही 50 वर्ष पूर्व भारत को मोरक्को में हुई पहली बैठक में आमंत्रित किया गया था लेकिन IOC के साथ हालिया जुड़ाव भारत की विदेश नीति को दर्शाता है। जिसमें भारत ने इस्लामिक देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाना है। 
  • जैसे- सऊदी अरब और ईरान, 
    • सयुंक्त अरब अमीरात और कतर,
    • मिस्र और तुर्की 
    • इज़राइल और फिलिस्तीन 

सयुंक्त राष्ट्र-

  • यह एक वैश्विक अंतर-सरकारी संगठन है। इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा एवं शांति कायम रखना है।
  • इसके प्रमुख उद्देश्यों में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना, मानव अधिकारों की रक्षा करना, सतत् विकास को बढ़ावा देना तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून को बनाए रखना आदि शामिल है।
  • वर्तमान में इसमें 193 सदस्य देश शामिल है।

यूरोपीय संघ-

  • यह एक राजनितिक-आर्थिक संगठन है।
  • इसमें कुल 28 सदस्य देश शामिल है।
  • इसकी स्थापना द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की गई थी।

OIC की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि-

  • 21 अगस्त, 1969 को यरुशलम में मौजूद इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र मस्जिद ‘अल-अक्सा’ पर एक हमला हुआ था। 24 अगस्त को अरब विदेश मंत्रियों ने इस घटना के तत्काल बाद बैठक बुलाई गई।
  • सयुंक्त अरब गणराज्य का मानना था कि इस बैठक के लिये  केवल अरब देश को ही बुलाया जाना चाहिए। जबकि सऊदी और मोरक्को का मानना था कि इसमें सभी इस्लामिक देशों को बुलाया जाना चाहिए।  सऊदी अरब और मोरक्को दोनों ही देश इसे आयोजित करने के लिये काफी उत्साहित थे।  
  • विचार-विमर्श के फलस्वरूप एक ‘तैयारी समिति’ (Preparatory Committee) का गठन किया गया। इस समिति में निम्न लोग शामिल थे-
  • सऊदी अरब और मोरक्को (अरब)
  • ईरान और मलेशिया (एशिया)
  • बाइघर और सोमालिया (अफ्रीका)
  • तैयारी समिति ने 8-9 सितम्बर, 1969 को ‘रबात’ में एक मुलाकात की।
  • 9 सितंबर को पाकिस्तान को सबसे बड़े इस्लामिक देश होने के कारण इसके प्रतिनिधिमंडल और सचिव युसूफ़ भी ‘रबात’ मुलाकात में शामिल हुए।
  • तैयारी समिति ने एक शिखर सम्मेलन आयोजित करने की सिफारिश की।
  • फलतः ये सम्मेलन 22-24 सितंबर, 1969 को रबात में हुआ। इस समिति ने सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों के लिये  दो मानदंड तय किये-
  • मुस्लिम बहुल आबादी वाला देश होना चाहिए।
  • जिन राष्ट्र देश के मुखिया मुस्लिम है।
  • इन दोनों आधार पर ही कोई देश सम्मेलन में शामिल हो सकता था।  
  • फलतः उपयुक्त प्रक्रिया के बाद IOC के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ था।

14वाँ शिखर सम्मेलन (IOC)- ‘मक्का घोषणापत्र’ 

  • IOC का 14वाँ शिखर सम्मेलन उफून की सऊदी अरब के मक्का में सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में एक घोषणापत्र जारी हुआ जिसे ‘मक्का घोषणापत्र’ कहते हैं। इस घोषणापत्र में फिलिस्तीन के महत्त्व को रेखांकित किया गया है।
  • इस घोषणापत्र में आतकंवाद, उग्रवाद और कट्टरता के सभी रूपों व अभिव्यक्तियों को खारिज कर दिया गया है।
  • IOC के सदस्य देशों ने UAE और सऊदी अरब के खिलाफ हुई आतंकवादी हमले की निंदा भी की। जहाँ इससे पहले सऊदी अरब के तेल पंपिंग स्टेशन और सयुंक्त अरब अमीरात के जलक्षेत्र  में वाणिज्यिक जहाज़ों पर हुए हमलों की घटनाओं से वहां शांति व सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ है।
  • घोषणापत्र ने IOC के सदस्य देशों के साथ आने वाली राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिये  ईमानदारी से काम करने की आवश्यकताओं को रेखांकित किया। साथ ही वर्ष 1967 के बाद अरब और फिलिस्तीन क्षेत्रों पर इजराइली हमले को खत्म करने पर बल दिया और कब्जे के खिलाफ संघर्ष में फिलिस्तीनी लोंगों के साथ एकजुटता की पुष्टि की।   
  • इसने हिंसा फ़ैलाने वाले समूहों और संगठनों को प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से मिलने वाले समर्थन को खारिज़ कर दिया और इसने यह भी वहाँ की सोशल मीडिया के प्रभारियों के पास इस्लामी वर्ग के लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्राप्त करने की बड़ी जिम्मेदारियाँ हैं।
  • इस दस्तावेज़ ने उन मुसलमानों द्वारा गैर-इस्लामी राष्ट्रों में खड़े होने के महत्त्व को दर्शाया जो उत्पीड़न, अन्याय, ज़बरदस्ती और आक्रामकता से पीड़ित है। उनके लिये  IOC के सदस्य देशों का पूर्ण समर्थन देने और उनके राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के अपने दृढ़ संकल्प की पुनः पुष्टि की।

IOC के विदेशी मंत्रियों की 46वाँ सम्मलेन-

  • इस्लामिक सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की परिषद के 46वें सत्र का आयोजन मार्च के पहले सप्ताह में सयुंक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates- UAE) के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल गहयान ने ‘सुषमा स्वराज’ को ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर’ के रूप में आमंत्रित किया था।  
  • इस सम्मेलन में सुषमा स्वराज (भारतीय विदेश मंत्री) ने वैश्विक शांति और भाई-चारे पर जोर दिया और कहा कि कुछ देश आतंकवाद को पालने में लगे हुए है। आतंकवाद के लिये  पनाह और फंडिंग बंद होनी चाहिए क्योंकि बढ़ता आतंकवाद पूरी दुनिया के लिये खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ है और इसका किसी मजहब से कोई लेना-देना नहीं है। 
  • OIC के संस्थापक सदस्य पाकिस्तान ने हमेशा की तरह भारत को आमंत्रित करने का विरोध किया लेकिन वो कामयाब नहीं हो सका।  
  • यह पहला मौका थे जब OIC ने भारत की ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर’ के तौर पर विदेश मंत्रियों को बैठक में हिस्सा लेने के लिये  आमंत्रित किया था। 
  • 57 सदस्य देशों वाले OIC के मंच पर भारत पिछले 50 वर्षो के इतिहास में पहली बार शामिल हुआ था। इसे भारत के पहले वैश्विक  प्रभाव और पाकिस्तान के बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा था। 
  • इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के एक प्रस्ताव पर भारत ने स्पष्ट किया कि  जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह उसका आंतरिक मामला भी है। 

भारत OIC का सदस्य देश क्यों नहीं बन सका 

  • दुनिया में भारत मुस्लिम संख्या के आधार पर दूसरा सबसे बड़ा देश है जबकि इंडोनेशिया पहले स्थापना पर है। उसके बावजूद भी भारत OIC  का सदस्य देश नहीं है।
  • OIC का पहला सम्मेलन वर्ष 1969 में रबात (मोरक्को की राजधानी) में आयोजित किया गया था उस समय पाकिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश था। 
  • पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल याह्या खान ने धमकी दी थी कि अगर भारत को सदस्यता दी गई तो वह इस सम्मेलन का बहिष्कार करेंगें।
  • इसलिये जॉर्डन के राजा हसन जो इस सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे, ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए भारत को दिये गये निमंत्रण को वापस ले लिया और फ़ख़रुद्दीन अली अहमद के नेतृत्त्व वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल को मोरक्को में प्रवेश करने से रोक दिया। इस प्रकार भारत OIC  का सदस्य देश नहीं बन सका। 

अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • पिछले 50 वर्षों में पाकिस्तानी रणनीति के चलते भारत को इस्लामिक देशों से अलग-थलग रखने की कोशिश की गई लेकिन यह भारत की विदेशी नीति की सफलता है कि सभी इस्लामिक देशों जैसे- टर्की, सऊदी अरब, मिस्र, मोरक्को के साथ भारत का संबंध मजबूत हुआ है।
  • भारत के कामगार ओमान, बहरीन, कतर तथा कुवैत समेत सभी बड़े देशों के विकास में योगदान दे रहा है।
  • IOC में 4 महाद्वीपों के कुल 57 देश हैं इसमें पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल  है।
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