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भारत ने UNFCCC के COP33 की मेज़बानी अपनी दावेदारी वापस ले ली

  • 09 Apr 2026
  • 54 min read

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

भारत ने वर्ष 2028 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के अंतर्गत आयोजित होने वाले 33वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP33) की मेज़बानी हेतु अपनी दावेदारी वापस ले ली है और इसका कारण “2028 के लिये अपनी प्रतिबद्धताओं की समीक्षा” बताया है।

  • विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने यह निर्णय अन्य ‘बड़े आयोजनों’ (जैसे– 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की संभावित मेज़बानी) के कारण होने वाले लॉजिस्टिक बोझ से बचने या उच्च जलवायु लक्ष्यों के लिये दबाव से बचने हेतु लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम ग्लोबल साउथ के नेतृत्व में भारत की भूमिका तथा जलवायु वित्त प्राप्त करने की उसकी स्थिति को कमज़ोर कर सकता है।
  • ऑस्ट्रेलिया और तुर्की (COP31, 2026) तथा इथियोपिया (COP32, 2027) के मेज़बानों के रूप में पुष्टि हो जाने के बाद भारत के पीछे हटने से 2028 में होने वाले COP33 के लिये इस खाली स्थान को भरने हेतु दक्षिण कोरिया ही एकमात्र दावेदार रह गया है।

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) क्या है?

  • परिचय: UNFCCC वह प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य ‘जलवायु प्रणाली में खतरनाक मानव हस्तक्षेप को रोकना’ है।
    • यह ग्रीनहाउस गैसों (GHG) की सांद्रता को स्थिर करने और जलवायु प्रणाली में खतरनाक मानव हस्तक्षेप को रोकने के लिये वैश्विक प्रतिक्रिया का समन्वय करने वाली प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संधि के रूप में कार्य करता है।
  • स्थापना और उद्देश्य: इसे वर्ष 1992 में रियो अर्थ समिट में अपनाया गया था और वर्ष 1994 में यह लागू हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा सतत आर्थिक विकास को सक्षम बनाना है, साथ ही पारिस्थितिक तंत्र को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप अनुकूलन करने देना भी है।
  • सिद्धांत:
    • CBDR-RC: UNFCCC का एक प्रमुख आधार ‘समान लेकिन विभेदित ज़िम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ’  (CBDR-RC) का सिद्धांत है।
      • यह सिद्धांत स्वीकार करता है कि यद्यपि सभी देशों को कार्रवाई करनी चाहिये, लेकिन विकसित देशों की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी अधिक है और उनके पास अधिक संसाधन हैं, इसलिये उन्हें इस लड़ाई का नेतृत्व करना चाहिये।
    • सतत विकास: यह अनिवार्य करता है कि जलवायु कार्रवाई इस प्रकार की जाए जिससे पारिस्थितिक तंत्र स्वाभाविक रूप से अनुकूलन कर सके, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो और आर्थिक विकास सतत रूप से आगे बढ़ सके।
  • संचालन तंत्र:
    • COP: यह सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, जो प्रत्येक वर्ष बैठक करती है और प्रगति की समीक्षा करती है।
    • सचिवालय: यह जर्मनी के बॉन में स्थित है और वार्त्ताओं का आयोजन तथा डेटा का विश्लेषण करके जलवायु परिवर्तन के खतरे के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया को समर्थन प्रदान करता है।
    • पारदर्शिता और रिपोर्टिंग: सदस्य देशों को नियमित रूप से ‘राष्ट्रीय संचार‘ तथा ‘द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट’ प्रस्तुत करनी होती है, जिनमें उनके ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन एवं जलवायु नीतियों का विवरण होता है।
  • वित्तीय तंत्र: UNFCCC विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण करने और जलवायु प्रभावों के अनुरूप अनुकूलन में सहायता देने के लिये कई निधियों का प्रबंधन करता है। वर्ष 2026 तक ये इसके प्रमुख स्तंभ हैं:
    • ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF): यह विश्व का सबसे बड़ा समर्पित जलवायु कोष है, जिसने हाल ही में विश्व भर में 350 से अधिक परियोजनाओं के लिये कुल 20 अरब अमेरिकी डॉलर के वित्तपोषण में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
    • वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF): यह पर्यावरणीय परियोजनाओं हेतु उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है और अक्सर बड़े पैमाने पर ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं के लिये ‘बीज पूंजी’ प्रदान करता है।
    • लॉस एंड डैमेज का सामना करने के लिये कोष (FRLD): इसका उद्देश्य कमज़ोर देशों को जलवायु आपदाओं (जैसे– बाढ़ या समुद्र स्तर में वृद्धि) से होने वाले तात्कालिक नुकसान से उबरने में सहायता प्रदान करना है।
    • अनुकूलन कोष: यह विशेष रूप से उन परियोजनाओं को लक्षित करता है जो समुदायों की सहनशीलता बढ़ाने में मदद करती हैं, जैसे– समुद्री दीवारों का निर्माण या सूखा-प्रतिरोधी कृषि।
  • प्रमुख कानूनी साधन: इसने क्योटो प्रोटोकॉल (1997) और ऐतिहासिक पेरिस समझौते (2015) के लिये आधार प्रदान किया, जिसका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से काफी नीचे (अधिमानतः 1.5°C) तक सीमित रखना है।
  • होस्टिंग रोटेशन: COP की मेज़बानी संयुक्त राष्ट्र के 5 क्षेत्रीय समूहों के बीच घूमती है - अफ्रीकी राज्य, एशिया-प्रशांत राज्य, पूर्वी यूरोपीय राज्य, लैटिन अमेरिकी व कैरिबियन राज्य और पश्चिमी यूरोपीय एवं अन्य राज्य। भारत एशिया-प्रशांत समूह का हिस्सा है। भारत ने केवल एक बार UNFCCC COP की मेज़बानी की है - वर्ष 2002 में (COP 8) - जब यह एक अपेक्षाकृत कम महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम था।
  • वैश्विक स्टॉकटेक (GST): UNFCCC एक 5-वर्षीय ‘महत्त्वाकांक्षा चक्र’ (Ambition Cycle) पर कार्य करता है। वैश्विक स्टॉकटेक ग्रह के लिये एक आवधिक ‘मेडिकल चेक-अप’ की तरह है।
    • पहला GST वर्ष 2023 में पूरा हुआ था और दूसरा GST वर्ष 2028 के लिये निर्धारित है।

नोट: मार्च 2026 में भारत ने अपने अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) की घोषणा की, जिसमें वर्ष 2035 तक अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने, GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 47% तक कम करने तथा अपने कार्बन सिंक को 3.5-4 अरब टन CO₂ समतुल्य तक बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. COP31 (2026) और COP32 (2027) की मेज़बानी कौन-से देश कर रहे हैं?

COP31 (2026) की सह-मेज़बानी ऑस्ट्रेलिया और तुर्की द्वारा की जाएगी तथा COP32 (2027) की मेज़बानी इथियोपिया करेगा।

 2. UNFCCC के तहत वैश्विक स्टॉकटेक (GST) क्या है?

GST एक 5-वर्षीय  ‘महत्त्वाकांक्षा चक्र’ (Ambition Cycle)  है, जो वैश्विक जलवायु कार्रवाई का आवधिक मूल्यांकन करता है। पहला GST वर्ष 2023 में पूरा हुआ था और दूसरा GST वर्ष 2028 के लिये निर्धारित है।

3. जलवायु वार्त्ताओं में CBDR-RC सिद्धांत का क्या महत्त्व है?

CBDR-RC यह स्वीकार करता है कि सभी देश जलवायु कार्रवाई के लिये ज़िम्मेदार हैं, लेकिन विकसित देशों की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी अधिक है और उन्हें विकासशील देशों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करनी चाहिये।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रश्न. वर्ष 2015 में पेरिस में UNFCCC की बैठक में हुए समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2016)

  1. इस समझौते पर UN के सभी सदस्य देशों ने हस्ताक्षर किये और यह वर्ष 2017 से लागू होगा। 
  2. यह समझौता ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को सीमित करने का लक्ष्य रखता है जिससे इस सदी के अंत तक औसत वैश्विक तापमान की वृद्धि उद्योग-पूर्व स्तर (pre-industrial levels) से 2 °C या कोशिश करें कि 1.5 °C से भी अधिक न होने पाए। 
  3. विकसित देशों ने वैश्विक तापन में अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को स्वीकारा और जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिये विकासशील देशों की सहायता के लिये 2020 से प्रतिवर्ष 1000 अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 3

(b)  केवल 2

(c)  केवल 2 और 3

(d)  1, 2 और 3

उत्तर: (b)

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