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जैव विविधता और पर्यावरण

जलवायु वित्त

  • 26 Jul 2022
  • 14 min read

प्रिलिम्स के लिये:

जलवायु वित्त, CoP 26, क्योटो प्रोटोकॉल, पेरिस समझौता, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी), हरित जलवायु कोष (जीसीएफ)

मेन्स के लिये:

जलवायु वित्त और इसका महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में UNFCCC COP26 के अध्यक्ष, आलोक शर्मा ने भारत की COP 26 प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिये भारत का दौरा किया।

  • उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2023 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के जलवायु वित्तपोषण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये एक तंत्र स्थापित किया जा रहा है।

जलवायु वित्त:

  • परिचय:
    • जलवायु वित्त ऐसे स्थानीय, राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय वित्तपोषण को संदर्भित करता है, जो सार्वजनिक, निजी और वैकल्पिक वित्तपोषण स्रोतों से प्राप्त किया गया हो।
    • UNFCCC, क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता के तहत अधिक वित्तीय संसाधनों वाले देशों से ऐसे देशों के लिये वित्तीय सहायता की मांग की जाती है, जिनके पास कम वित्तीय संसाधन हैं और जो अधिक असुरक्षित हैं।
      • यह ‘समान लेकिन विभेदित ज़िम्मेदारी और संबंधित क्षमताओं’ (CBDR-RC) के सिद्धांत के अनुसार है।
    • COP26 में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने में विकासशील देशों का समर्थन करने के लिये नई वित्तीय प्रतिज्ञाएँ की गईं।
      • COP26 में सहमत अंतर्राष्ट्रीय कार्बन व्यापार तंत्र के लिये नए नियम अनुकूलन निधि का समर्थन करेंगे।
  • महत्त्व:
    • न्यूनीकरण के लिये जलवायु वित्त की आवश्यकता है क्योंकि उत्सर्जन को उल्लेखनीय रूप से कम करने के लिये बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है।
    • अनुकूलन के लिये जलवायु वित्त भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि प्रतिकूल प्रभावों के अनुकूल होने और बदलती जलवायु के प्रभावों को कम करने के लिये महत्त्वपूर्ण वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
    • जलवायु वित्तपोषण इस बात को स्वीकार करता है कि जलवायु परिवर्तन में देशों का योगदान और इसे रोकने तथा इसके परिणामों से निपटने की उनकी क्षमता में काफी अंतर है।
      • इसलिये विकसित देशों को भी देश-संचालित रणनीतियों का समर्थन करने और विकासशील देशों की पार्टियों की ज़रूरतों एवं प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कार्यों के माध्यम से जलवायु वित्त जुटाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिये।
    • जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न मुद्दों से निपटने और पूर्व-औद्योगिक स्तरों पर पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे तक सीमित करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये जलवायु वित्त महत्त्वपूर्ण है, जैसा कि वर्ष 2018 की आईपीसीसी की रिपोर्ट में इसकी भविष्यवाणी की गई है।

100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य और इसका महत्त्व:

वर्ष  2009 में UNFCCC COP15 (कोपेनहेगन में आयोजित) में विकासशील देशों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये विकसित देशों की पार्टियों ने सार्थक न्यूनीकरण कार्यों और कार्यान्वयन में पारदर्शिता हासिल करने के लिये संयुक्त रूप से वर्ष 2020 तक 100 बिलियन अमेरिकी डाॅलर का लक्ष्य निर्धारित किया है।

जलवायु वित्त लक्ष्य को औपचारिक रूप से कानकुन में COP16 में पार्टियों के UNFCCC सम्मेलन द्वारा मान्यता दी गई थी।

पेरिस COP21 में पार्टियों ने  $100 बिलियन के लक्ष्य को वर्ष 2025 तक बढ़ाया।

  • COP26 के बाद इस बात पर आम सहमति बनी कि विकसित राष्ट्र अनुकूलन और शमन के बीच संतुलन के लिये 2025 तक वित्तीय अनुकूलन के अपने सामूहिक प्रावधान को वर्ष 2019 के स्तर से दोगुना कर देंगे।

हरित वित्तपोषण:

  • जलवायु वित्त के प्रावधान को सुविधाजनक बनाने हेतु UNFCCC ने विकासशील देशों को वित्तीय संसाधन प्रदान करने के लिये वित्तीय तंत्र की स्थापना की है।
    • वित्त संरचना क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते का भी समर्थन करती है।
  • यह निर्दिष्ट करता है कि वित्तीय तंत्र के संचालन को एक या अधिक मौज़ूदा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को सौंपा जा सकता है, वर्ष 1994 में कन्वेंशन के प्रवेश के बाद से वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) ने वित्तीय तंत्र के संचालन संस्थान के रूप में काम किया है।
    • पार्टियों ने वर्ष 2010 में COP16 में ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) की स्थापना की और इसे वर्ष 2011 में वित्तीय तंत्र की एक परिचालन इकाई के रूप में नामित किया।
    • वित्तीय तंत्र COP को रिपोर्ट करता है, जो इसकी नीतियों, कार्यक्रम की प्राथमिकताओं और वित्तपोषण पात्रता मानदंड को निर्धारित करता है।
  • अन्य वित्त:
    • GEF और GCF को मार्गदर्शन प्रदान करने के अलावा पार्टियों ने दो विशेष फंड स्थापित किये हैं-
      • विशेष जलवायु परिवर्तन कोष (SCCF)
      • अल्प विकसित देश कोष (LDCF)
      • दोनों का प्रबंधन GEF और वर्ष 2001 में क्योटो प्रोटोकॉल के तहत स्थापित अनुकूलन कोष (AF) द्वारा किया जाता है।
    • 2015 में पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में पार्टियों ने सहमति व्यक्त की कि वित्तीय तंत्र की संचालन संस्थाएँ- GCD, GEF, SCCF और LDCF पेरिस समझौते के तहत सेवा करेंगे।

जलवायु वित्त के संबंध में भारत की पहल:

  • राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष (NAFCC):
    • इसकी स्थापना वर्ष 2015 में भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिये जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन की लागत को पूरा करने के लिये की गई थी, जो विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति संवेदनशील है।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष (NCEF):
    • उद्योगों द्वारा कोयले के उपयोग पर प्रारंभिक कार्बन टैक्स के माध्यम से वित्तपोषित स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिये इस कोष का निर्माण किया गया था।
    • यह वित्त सचिव (अध्यक्ष के रूप में) के साथ एक अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा शासित किया जाएगा।
    • इसका प्रमुख उद्देश्य जीवाश्म और गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षेत्रों में नवीन स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी के अनुसंधान एवं विकास के लिये कोष प्रदान करना है।
  • राष्ट्रीय अनुकूलन कोष:
    • इस कोष की स्थापना वर्ष 2014 में 100 करोड़ रुपए की धनराशि के साथ की गई थी, इसका उद्देश्य आवश्यकता और उपलब्ध धन के बीच के अंतराल की पूर्ति करना था।
    • यह कोष पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के तहत संचालित है।

आगे की राह

  • विकसित देशों को विकासशील देशों की सहायता करनी चाहिये और उन्हें स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में मदद हेतु काम करना चाहिये इस प्रकार जलवायु लचीला बुनियादी ढाँचे के लिये वित्तपोषण प्राप्त करना चाहिये, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पूर्व में निर्धारित 100 अरब डॉलर का लक्ष्य पूरा हो।
  • इसके अलावा नया वित्त जुटाने के लिये एक राजनीतिक प्रतिबद्धता बनाए रखने की आवश्यकता है।
    • यह सुनिश्चित करना कि उत्सर्जन और भेद्यता को कम करने के लिये वित्त का लक्षित जगह पर निवेश किया जा रहा है।
    • हाल के अनुभवों से सीखना और सुधार करना विशेष रूप से ग्रीन क्लाइमेट फंड को कम करना।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न:

वर्ष 2015 में पेरिस में UNFCCC बैठक में हुए समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2016)

  1. समझौते पर संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों द्वारा हस्ताक्षर किये गए थे और यह वर्ष 2017 में लागू हुआ था।
  2. समझौते का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करना है ताकि इस सदी के अंत तक औसत वैश्विक तापमान में वृद्धि पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2ºC या 1.5ºC से अधिक न हो।
  3. विकसित देशों ने ग्लोबल वार्मिंग में अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को स्वीकार किया और विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करने हेतु वर्ष 2020 से सालाना 1000 अरब डॉलर की मदद के लिये प्रतिबद्ध हैं।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: b

व्याख्या:

  • पेरिस समझौते को दिसंबर 2015 में पेरिस, फ्राँस में COP21 में पार्टियों के सम्मेलन (COP) द्वारा संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के माध्यम से अपनाया गया था।
  • समझौते का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करना है ताकि इस सदी के अंत तक औसत वैश्विक तापमान में वृद्धि पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस या 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न हो। अत: कथन 2 सही है।
  • पेरिस समझौता 4 नवंबर, 2016 को लागू हुआ, जिसमें वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को अनुमानित 55% तक कम करने के लिये अभिसमय हेतु कम-से-कम 55 पार्टियों ने अनुसमर्थन, , अनुमोदन या परिग्रहण स्वीकृति प्रदान की थी। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • इसके अतिरिक्त समझौते का उद्देश्य अपने स्वयं के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिये देशों की क्षमता को मज़बूत करना है।
  • पेरिस समझौते के लिये सभी पक्षों को राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के माध्यम से अपने सर्वोत्तम प्रयासों को आगे बढ़ाने और आने वाले वर्षों में इन प्रयासों को मज़बूत करने की आवश्यकता है। इसमें यह भी शामिल है कि सभी पक्ष अपने उत्सर्जन और उनके कार्यान्वयन प्रयासों पर नियमित रूप से रिपोर्ट करें।
  • समझौते के उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में सामूहिक प्रगति का आकलन करने और पार्टियों द्वारा आगे की व्यक्तिगत कार्रवाइयों को सूचित करने के लिये प्रत्येक 5 साल में एक वैश्विक समालोचना भी होगा।
  • वर्ष 2010 में कानकुन समझौतों के माध्यम से विकसित देशों को विकासशील देशों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये वर्ष 2020 तक प्रतिवर्ष संयुक्त रूप से 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के लक्ष्य हेतु प्रतिबद्ध किया।
  • इसके अलावा वे इस बात पर भी सहमत हुए कि वर्ष 2025 से पहले पेरिस समझौते के लिये पार्टियों की बैठक के रूप में सेवारत पार्टियों का सम्मेलन प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर से एक नया सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य निर्धारित करेगा। अत: कथन 3 सही नहीं है।

अतः विकल्प (b) सही है।


प्रश्न. जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के पार्टियों के सम्मेलन (COP) के 26वें सत्र के प्रमुख परिणामों का वर्णन कीजिये। इस सम्मेलन में भारत द्वारा की गई वचनबद्धताएँ क्या हैं? (2021, मुख्य परीक्षा)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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