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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

केंद्र ने क्योटो प्रोटोकॉल की दूसरी प्रतिबद्धता अवधि को स्वीकृति प्रदान की

  • 24 Jan 2017
  • 6 min read

सन्दर्भ :

हाल ही में केंद्र द्वारा जलवायु परिवर्तन के यूएनएफसीसीसी (United Nations Framework Convention on Climate Change)  के अंतर्गत क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol)  की दूसरी प्रतिबद्धता अवधि के पुष्टिकरण को स्वीकृति प्रदान की गई है |

प्रमुख बिंदु:

  • गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने क्योटो प्रोटोकॉल के हरित गृह प्रभावों के उत्सर्जन की समस्या को लेकर दूसरी प्रतिबद्धता अवधि के पुष्टिकरण को स्वीकृति प्रदान कर दी है | 
  • यद्यपि, क्योटो प्रोटोकॉल की दूसरी प्रतिबद्धता अवधि को वर्ष 2012 में ही अपनाया जा चुका था परन्तु अभी तक 65 देशों ने ही दूसरी प्रतिबद्धता अवधि की पुष्टि की है |
  • उल्लेखनीय है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का ध्यान आकर्षित करने में भारत की गंभीर भूमिका को देखते हुए यह निर्णय पर्यावरणीय सुरक्षा और जलवायु न्याय के वैश्विक कारण के प्रति विभिन्न देशों में भारत के नेतृत्व को रेखांकित करता है| 
  • दरअसल,भारत के द्वारा क्योटो प्रोटोकॉल की पुष्टि अन्य देशों को भी यह कदम उठाने के लिए उत्साहित करेगी| 
  • इस प्रतिबद्धता अवधि के भीतर सतत विकास की प्राथमिकताओं के अनुसार, स्वच्छ विकास प्रक्रिया(CDM) प्रोजेक्टों का क्रियान्वयन कुछ विकासशील राष्ट्रों को भारत का नेतृत्व प्रदान करेगा तथा  भारत में निवेशों को आकर्षित करने में भी सहायता करेगा| 
  • स्पष्ट है कि यूएनएफसीसीसी का प्रयास हरित गृह गैसों के वातावरण में सांद्रण को उस स्तर पर स्थिर करना है जिससे जलवायु संरचना में न्यूनतम हस्तक्षेप हो| 
  • यह स्मरण करते हुए कि वर्तमान में वातावरण में हरित गृह गैसों के बढ़ते स्तर के लिए विकसित देश ही प्राथमिक रूप से जिम्मेदार हैं| 
  • हालाँकि, प्रोटोकॉल में विकसित देशों के लिए यह प्रतिबद्धताएँ तय की गई थीं, कि वे हरित गृह उत्सर्जन के स्तर को निम्न करने का लक्ष्य बनाएँ तथा विकासशील देशों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएँ और उन्हें तकनीकी का हस्तांतरण भी करें| 
  • वास्तव में, क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत विकासशील देश जैसे भारत के लिए कोई बाध्यकारी दायित्व अथवा लक्ष्य नही थे|

पृष्ठभूमि :

  • क्योटो प्रोटोकॉल को वर्ष 1997 में स्वीकार किया गया था तथा इसकी पहली प्रतिबद्धता अवधि वर्ष 2008 से 2012 तक थी| अपनी दूसरी प्रतिबद्धता अवधि 2012 में अपनाया गया था लेकिन, केवल 65 देशों में अब तक दूसरी प्रतिबद्धता अवधि (2013-2020) की पुष्टि की है।
  • वर्ष 2012 में दोहा में दूसरी प्रतिबद्धता अवधि के लिए क्योटो प्रोटोकॉल में संशोधन किए गये थे जिन्हें दोहा संशोधन कहा जाता है| इसी वर्ष प्रतिबद्धता अवधि को 2013 से 2020 तक के लिए स्वीकार किया गया | 
  • ध्यातव्य है कि विकसित देश दोहा संशोधनों में अपनाये गये प्रावधानों के तहत (under the 'opt-in' provisions of the Doha Amendment) पहले ही अपनी प्रतिबद्धताओं को क्रियान्वित कर चुके हैं| 
  • दरअसल, भारत ने हमेशा से  ‘वर्ष 2020 से पूर्व की अवधि के लिए’ विकसित देशों द्वारा जलवायु परिवर्तन से सम्बन्धित कदम उठाने के महत्त्व पर जोर दिया है | 
  • इसके अलावा, भारत इस सम्मेलन के सिद्धांतों और प्रावधानों पर आधारित जलवायु से सम्बन्धित क्रियाकलापों का भी समर्थन करता है जैसे- समानता के सिद्धांत और समान परन्तु विभेदीकृत जिम्मेदारियाँ और सम्बंधित क्षमताएँ (Common but differentiated responsibilities and respective capabilities -CBDR & RC)


 यूएनएफसीसीसी (United Nations Framework Convention on Climate Change)

  • सन् 1992 में रियो-डी-जेनेरियो में पृथ्वी सम्मेलन के अवसर पर पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीईडी) में ‘दी यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कंवेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज’ (यूएनएफसीसीसी) नामक एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावर्णीय संधि की गई। 
  • इस संधि का उद्देश्य वैश्विक तापवृद्धि में कमी लाने के लिए हरित गृह गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना है।
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