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भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति एवं प्रगति रिपोर्ट 2024-25

  • 03 Jan 2026
  • 49 min read

स्रोत: इकॉनोमिक टाइम्स

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति एवं प्रगति रिपोर्ट 2024-25 जारी की है, जिसमें भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख रुझानों को रेखांकित किया गया है।

भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति 2024-25 रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

  • सुदृढ़ बैंकिंग क्षेत्र: सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात मार्च 2025 में घटकर 2.2% के बहु-दशकीय न्यूनतम स्तर पर आ गया और सितंबर 2025 में घटकर 2.1% हो गया।
  • बैंकिंग धोखाधड़ी: यद्यपि धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में कमी आई, परंतु वर्ष 2024–25 में इसमें शामिल कुल राशि तिगुनी होकर 34,771 करोड़ रुपये हो गई।
    • कार्ड/इंटरनेट से संबंधित धोखाधड़ी सबसे अधिक हुई और कुल मामलों का 66.8% रही, जबकि अग्रिमों, अर्थात ऋण से संबंधित धोखाधड़ी मूल्य के आधार पर सबसे अधिक रही और कुल राशि का 33.1% थी।
    • निजी बैंकों ने संख्या के हिसाब से सबसे अधिक धोखाधड़ी (59.3%) की सूचना दी, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर सबसे अधिक वित्तीय प्रभाव (कुल शामिल राशि का 70.7%) पड़ा।
  • NBFC का सशक्त प्रदर्शन: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) ने 19.4% की सुदृढ़ ऋण वृद्धि दर्ज की और वे अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल ऋण का लगभग एक चौथाई हिस्सा है।
    • NBFC क्षेत्र ने 25.9% के पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) के साथ सुदृढ़ वित्तीय स्थिति प्रदर्शित की है, साथ ही उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
  • सहकारी बैंक: शहरी सहकारी बैंकों (UCB) ने अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार किया है (GNPA में 6.2% तक की गिरावट)। इसके साथ ही विकास दर और लाभप्रदता के मापदंडों पर भी इन बैंकों के प्रदर्शन में निरंतर प्रगति दर्ज की गई है।
    • शहरी सहकारी बैंकों की प्रगति के विपरीत, ग्रामीण दीर्घकालिक सहकारी समितियाँ (जैसे SCARDBs) निरंतर संकटपूर्ण स्थिति में बनी हुई हैं। उनकी वित्तीय स्थिरता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती परिसंपत्ति की गुणवत्ता है, जहाँ सकल GNPA का अनुपात 38% के चिंताजनक स्तर को पार कर गया है।
    • सकारात्मक व्यापक आर्थिक संदर्भ: भारत का वर्तमान समष्टि आर्थिक परिदृश्य अत्यंत सुदृढ़ बना हुआ है। कई वर्षों के न्यूनतम स्तर पर मौजूद मुद्रास्फीति और 8% से अधिक की विकास दर का यह दुर्लभ संयोग वित्तीय स्थिरता के लिये एक आदर्श वातावरण तैयार करता है। वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए निरंतर सतर्कता एवं नीतिगत दूरदर्शिता की आवश्यकता बनी हुई है।
  • नियामक संबंधी चिंताएँ और प्राथमिकताएँ: RBI ने कई उभरते जोखिमों को उजागर किया और अपने नियामक फोकस की रूपरेखा प्रस्तुत की:
    • जलवायु जोखिम: रिपोर्ट में इस बात पर बल दिया गया है कि भौतिक और संक्रमणकालीन जलवायु जोखिम वित्तीय स्थिरता के लिये गंभीर व्यवस्थागत खतरा उत्पन्न करते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में जलवायु वित्त को अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक 'राष्ट्रीय अनिवार्यता' के रूप में प्राथमिकता दी जानी चाहिये।
    • उपभोक्ता संरक्षण: नियामक ने वित्तीय उत्पादों की 'भ्रामक बिक्री' (Misselling) पर चिंता व्यक्त की है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिये, विज्ञापनों की पारदर्शिता और ऋण वसूली की प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने हेतु 'सामंजस्यपूर्ण दिशा-निर्देश' तैयार करने की योजना बनाई गई है, ताकि बैंकिंग व्यवहार में नैतिकता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
    • तकनीकी चुनौतियाँ: डिजिटल युग की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए, नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

निष्कर्ष:

रिपोर्ट मज़बूत बुनियादी आधारों वाले बैंकिंग क्षेत्र को रेखांकित करती है, लेकिन उच्च मूल्य वाले धोखाधड़ी मामलों, जलवायु जोखिमों और तकनीकी व्यवधानों से उभरते खतरों के प्रति आगाह करती है, जिनसे निपटने के लिये सतर्क और अनुकूलनशील नियमन की आवश्यकता है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वित्तीय स्थिरता ढाँचे में जलवायु जोखिम को एकीकृत करने के महत्त्व पर चर्चा कीजिये। इसके कार्यान्वयन में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. वर्ष 2024-25 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात क्या था?
GNPA घटकर बहु-दशकीय न्यूनतम स्तर 2.2% (मार्च 2025) पर आ गया और आगे घटकर 2.1% (सितंबर 2025) हो गया।

2. वर्ष 2024-25 के दौरान NBFC का प्रदर्शन कैसा रहा?
NBFC ने 19.4% की ऋण वृद्धि दर्ज की, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल ऋण में लगभग 25% का योगदान दिया, 25.9% का पूंजी पर्याप्तता जोखिम-भारित अनुपात (CRAR) बनाए रखा और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार किया।

3. RBI ने किस प्रमुख उभरते जोखिम को ‘राष्ट्रीय अनिवार्यता’ कहा?
RBI ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिमों (भौतिक तथा संक्रमण—दोनों) से निपटना वित्तीय स्थिरता के लिये एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है, जिसके लिये समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्न. भारत में ‘शहरी सहकारी बैंकों’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)

  1. राज्य सरकारों द्वारा स्थापित स्थानीय मंडलों द्वारा उनका पर्यवेक्षण एवं विनियमन किया जाता है।
  2.  वे इक्विटी शेयर और अधिमान शेयर जारी कर सकते हैं।
  3.  उन्हें वर्ष 1966 में एक संशोधन द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के कार्य-क्षेत्र में लाया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1                    
(b)  केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर:(b)


प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन भारत में सभी ATM को जोड़ता है? (2018)

(a) भारतीय बैंक संघ
(b) नेशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरी लिमिटेड
(c) भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
(d) भारतीय रिज़र्व बैंक

उत्तर: (c)


मेन्स

प्रश्न. प्रधानमंत्री जन धन योजना (पी.एम.जे.डी.वाई.) बैंकरहितों को संस्थागत वित्त में लाने के लिये आवश्यक है। क्या आप सहमत हैं कि इससे भारतीय समाज के गरीब तबके के लोगों का वित्तीय समावेश होगा? अपने मत की पुष्टि करने के लिये तर्क प्रस्तुत कीजिये। (2016)

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