प्रारंभिक परीक्षा
संकल्प योजना
चर्चा में क्यों?
लोक लेखा समिति (PAC) ने संकल्प (आजीविका संवर्द्धन के लिये कौशल अधिग्रहण और ज्ञान जागरूकता) योजना के कार्यान्वयन की धीमी गति और इसमें मौजूद खामियों पर चिंता व्यक्त की है।
- ये टिप्पणियाँ भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट पर आधारित थी, जिसमें यह बात सामने आई कि संकल्प योजना अपने आवंटित कोष का केवल 44% ही उपयोग कर पाई (जिसमे विश्व बैंक की महत्त्वपूर्ण सहायता का उपयोग नहीं हो पाया), जो कमज़ोर वित्तीय नियोजन और अवशोषण क्षमता को इंगित करता है।
संकल्प योजना क्या है?
- परिचय: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा जनवरी 2018 में शुरू की गई 'संकल्प' (SANKALP) योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (NSDM) को क्रियान्वित करना है।
- यह अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण हेतु संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करने तथा वंचित समुदायों के लिये गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण तक पहुँच का विस्तार करने पर केंद्रित है।
- वित्तपोषण और बजट: इस योजना को कुल ₹4,455 करोड़ की राशि के साथ मंज़ूरी मिली थी। इसका मुख्य वित्तीय आधार ₹3,300 करोड़ का विश्व बैंक ऋण है, जिसे राज्य के अपने संसाधनों और उद्योग जगत के योगदान से अतिरिक्त सहायता मिलती है।
- समय-सीमा: यह योजना प्रारंभ में मार्च 2023 तक पूरी की जानी थी, लेकिन बाद में इसकी समय-सीमा बढ़ाकर मार्च 2024 कर दी गई।
- मुख्य उद्देश्य:
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण: राष्ट्रीय, राज्य तथा ज़िला स्तर पर क्षमता निर्माण।
- इसमें ज़िला कौशल समितियों (DSC) को सहयोग देना तथा महात्मा गांधी नेशनल फेलोशिप (MGNF) को समर्थन प्रदान करना शामिल है।
- गुणवत्ता आश्वासन: प्रमाणन का मानकीकरण, राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) का सार्वभौमीकरण तथा गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षकों का समूह तैयार करना।
- समावेशन: व्यावसायिक प्रशिक्षण में महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) तथा दिव्यांग व्यक्तियों (PwD) की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना।
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण: राष्ट्रीय, राज्य तथा ज़िला स्तर पर क्षमता निर्माण।
- मुख्य उपलब्धियाँ एवं परिणाम: सशक्त ज़िला कौशल समितियाँ (DSCs) विकसित की गईं, जिनके माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) का मांग-आधारित प्रभावी कार्यान्वयन संभव हो सका।
- पूर्व शिक्षण की मान्यता (RPL) को बढ़ावा दिया गया तथा ग्राम पंचायत स्तर पर प्रमाणीकरण को प्रोत्साहित किया गया।
- देश भर में कौशल विकास से संबंधित गतिविधियों के डेटा संकलन हेतु “स्किल इंडिया पोर्टल” नामक IT प्रणाली के विकास को वित्तपोषित किया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. SANKALP योजना क्या है?
यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य संस्थागत सुदृढ़ीकरण, गुणवत्ता आश्वासन एवं समावेशी कौशल विकास के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन को क्रियान्वित करना है।
2. SANKALP पर CAG की प्रमुख टिप्पणियाँ क्या थीं?
केवल 44% धनराशि का उपयोग हुआ, अप्रभावी योजना के कारण क्रियान्वयन में देरी हुई और केंद्रीय निगरानी के अभाव ने जवाबदेही एवं प्रभावशीलता को कम किया।
3. SANKALP का वित्तपोषण कैसे होता है?
इसका कुल परिव्यय ₹4,455 करोड़ है, जिसमें मुख्यतः ₹3,300 करोड़ का विश्व बैंक ऋण, साथ ही राज्यों की भागीदारी और उद्योगों का योगदान शामिल है।
4. योजना के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
संस्थागत सुदृढ़ीकरण, NSQF तथा प्रमाणित प्रशिक्षकों के माध्यम से गुणवत्ता आश्वासन तथा कौशल प्रशिक्षण में महिलाओं, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और दिव्यांगजनों की बढ़ी हुई भागीदारी।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)
- यह श्रम और रोज़गार मंत्रालय की प्रमुख योजना है।
- यह अन्य बातों के अलावा सॉफ्ट स्किल्स, उद्यमिता, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता में प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।
- इसका उद्देश्य देश के अनियमित कार्यबल की दक्षताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचे के अनुरूप बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
रैपिड फायर
राष्ट्रपति भवन में लुटियंस के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी
भारत के प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि राष्ट्रपति भवन में स्थित ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा को हटाकर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
- जहाँ एडविन लुटियंस ने भव्य राष्ट्रपति भवन की रूपरेखा तैयार की थी, वहीं सी. राजगोपालाचारी को राष्ट्राध्यक्ष के रूप में इस भवन के प्रथम भारतीय अधिवासी होने का गौरव प्राप्त है।
सी. राजगोपालाचारी
- परिचय: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, जिन्हें लोकप्रिय रूप से राजाजी के नाम से जाना जाता है, एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात राजनेता तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल थे।
- उनका जन्म 10 दिसंबर, 1878 को मद्रास प्रेसीडेंसी के सेलम (वर्तमान तमिलनाडु) में हुआ था।
- मुख्य योगदान:
- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से प्रेरित होकर वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा बाद में रॉलेट विरोधी आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की मेज़बानी की।
- दांडी मार्च की तर्ज़ पर उन्होंने तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम तक नमक सत्याग्रह (1930) का नेतृत्व किया, जिसे वेदारण्यम नमक सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है।
- राजाजी ने वर्ष 1937 में मद्रास प्रेसीडेंसी के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने खादी को बढ़ावा दिया और ज़मींदारी प्रथा के उन्मूलन का समर्थन किया।
- सी.आर. फॉर्मूला (1944): भारत छोड़ो आंदोलन के बाद, उन्होंने ‘द वे आउट’ नामक पुस्तिका लिखी, जिसमें पाकिस्तान की मांग को लेकर INC और मुस्लिम लीग के बीच संवैधानिक गतिरोध को हल करने के लिये एक फॉर्मूला प्रस्तावित किया गया था।
- स्वतंत्रता के बाद का राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व: स्वतंत्रता के उपरांत, उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और केंद्रीय गृहमंत्री (सरदार पटेल के बाद) का पदभार सँभाला। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रथम पंचवर्षीय योजना का मसौदा तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन्होंने संसद में निवारक निरोध अधिनियम, 1950 का भी प्रस्ताव रखा था।
- राजाजी ने वर्ष 1959 में स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की, जो बाज़ार अर्थव्यवस्था की प्रबल समर्थक थी। मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में, उनके शुरुआती कदमों में से एक खाद्यान्नों के वितरण और उनकी कीमतों पर लगे नियंत्रण को हटाना था।
- साहित्यिक योगदान एवं पुरस्कार: उन्होंने सामाजिक उत्थान के लिये मद्रास प्रांत में एक आश्रम की स्थापना की (1925) तथा विमोचनम (तमिल) और प्रोहिबिशन (अंग्रेज़ी) प्रकाशित कीं।
- उन्हें तमिल साहित्य में रामायण के अपने पुनर्लेखन, जिसका शीर्षक 'चक्रवर्ती तिरुमगन' है, के लिये वर्ष 1958 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
- वे भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (1954) के प्रथम तीन प्राप्तकर्त्ताओं में से एक थे। अन्य दो प्राप्तकर्त्ता डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सी.वी. रमन थे।
- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से प्रेरित होकर वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा बाद में रॉलेट विरोधी आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की मेज़बानी की।
एडविन लुटियंस:
- एक ब्रिटिश वास्तुकार एवं नगर योजनाकार, जिन्होंने सर हर्बर्ट बेकर के सहयोग से नई दिल्ली में कई भव्य इमारतों की रूपरेखा तैयार की। इनमें राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और इंडिया गेट प्रमुख हैं।
- उनके स्थापत्य योगदान के सम्मान में नई दिल्ली के एक भाग को लुटियंस दिल्ली के नाम से जाना जाता है।
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और पढ़ें: सी. राजगोपालाचारी |
रैपिड फायर
नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो
भाररत के प्रधानमंत्री ने एक ही प्लेटफॉर्म से नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो दोनों का उद्घाटन किया, यह भारत में पहली बार है कि रैपिड रेल और मेट्रो सेवा एक ही दिन एक साथ शुरू की गई।
- मेरठ मेट्रो, जो मेरठ साउथ और मोदीपुरम को जोड़ती है, भारत की सबसे तेज़ मेट्रो है। यह 120 किमी./घंटा तक की गति से चलती है तथा अपनी तरह की पहली परियोजना में नमो भारत के बुनियादी ढाँचे पर संचालित होती है।
नमो भारत रैपिड रेल
- परिचय: यह भारत की पहली क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली (RRTS) है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिये डिज़ाइन किया गया एक समर्पित अर्द्ध-उच्च गति वाला यात्री रेल नेटवर्क है।
- इसकी अधिकतम डिज़ाइन स्पीड 180 किमी./घंटा है, जबकि परिचालन गति 160 किमी./घंटा तक जा सकती है। ट्रेन की औसत गति लगभग 100 किमी./घंटा रहती है।
- प्राथमिक उद्देश्य: यह प्रणाली पारंपरिक रेल और सड़क नेटवर्क पर भीड़भाड़ को कम करने के लिये 100-200 किमी. की दूरी तय करने वाले यात्रियों को एक आधुनिक, उच्च-आवृत्ति वाला वैकल्पिक परिवहन साधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है।
- अन्य प्रणालियों से भिन्नता:
- मेट्रो की तुलना में: जहाँ मेट्रो शहर के भीतर बार-बार ठहराव के साथ यात्रा के लिये होती है, वहीं RRTS कम ठहराव और अधिक गति के साथ क्षेत्रीय संपर्क पर केंद्रित है।
- वंदे भारत की तुलना में: यह वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की अंतर-शहरी ट्रेनों से अलग है, क्योंकि यह कम दूरी के क्षेत्रीय अंतर-शहरी मार्गों पर अधिक आवृत्ति के साथ संचालित होती है।
- प्रमुख कॉरिडोर: दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ RRTS लगभग 82 किमी. लंबा है। इस पूरे मार्ग पर पूर्ण संचालन का उद्घाटन फरवरी 2026 में किया गया।
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और पढ़ें: मल्टीमॉडल ट्रांंसपोर्ट हब |
रैपिड फायर
पूर्वोत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर परियोजना
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) ने पूर्वोत्तर परिषद (NEC) के माध्यम से पूर्वोत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर परियोजना (NEST) परियोजना को मंज़ूरी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य अनुसंधान, उद्यमिता तथा कौशल विकास को बढ़ावा देते हुए एक आत्मनिर्भर पारिस्थितिक तंत्र विकसित करना है।
- नोडल एजेंसी एवं अवधि: इस परियोजना के कार्यान्वयन का नेतृत्व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (IIT-G) द्वारा किया जा रहा है और इसकी अवधि 5 वर्ष निर्धारित की गई है।
- शैक्षणिक वर्टिकल: NEST चार विशेषीकृत वर्टिकल्स के अंतर्गत कार्य करता है, जो इस प्रकार हैं:
- ग्रासरूट प्रौद्योगिकियों पर नवाचार केंद्र
- सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिये प्रौद्योगिकी केंद्र
- बाँस-आधारित प्रौद्योगिकी में नवाचार, उद्यमिता प्रोत्साहन और कौशल विकास हेतु उत्कृष्टता केंद्र
- बायोडिग्रेडेबल और ईको-फ्रेंडली प्लास्टिक पर कौशल विकास तथा नवाचार केंद्र
- संरचनात्मक ढाँचा: NEST हब और स्पोक मॉडल पर आधारित है, जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी केंद्रीय 'हब' के रूप में कार्य करता है।
- ‘स्पोक’ सभी पूर्वोत्तर राज्यों में स्थित शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थाओं का एक व्यापक नेटवर्क बनाते हैं, जो अंतिम स्तर तक पहुँच तथा संसाधनों के साझा उपयोग को सुगम बनाता है।
- मुख्य रूप से पहचाने गए संस्थानों में NITs (जैसे– अगरतला, मेघालय आदि), IIM शिलांग, तेज़पुर विश्वविद्यालय आदि शामिल हैं।
- मुख्य परियोजना घटक: मुख्य गतिविधियों में प्रौद्योगिकी विकसित करने और नवाचार के लिये प्रशिक्षण, इन्क्यूबेशन तथा टिंकरिंग प्रयोगशालाएँ, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, व्यवसायीकरण एवं उत्पाद विपणन सहयोग, शोध, नवाचार व कौशल विकास के लिये आवश्यक बुनियादी ढाँचे का विकास शामिल हैं।
पूर्वोत्तर परिषद (NEC)
- परिचय: पूर्वोत्तर परिषद एक वैधानिक सलाहकार निकाय है, जिसे पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971 (नवंबर 1972 में अस्तित्व में आया) के अंतर्गत स्थापित किया गया था। यह भारत के 8 पूर्वोत्तर राज्यों (NER) के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है, और इसका मुख्यालय शिलांग (मेघालय) में स्थित है।
- सदस्य राज्य हैं—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा।
- यह पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करता है।
- परिषद की संरचना: पूर्वोत्तर परिषद में शामिल हैं:
- केंद्रीय गृहमंत्री निर्वाचित अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
- आठ सदस्य राज्यों के राज्यपाल।
- आठ सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री।
- भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामित तीन अतिरिक्त सदस्य।
प्रारंभिक परीक्षा
टेटनस एवं अडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन
चर्चा में क्यों?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI), कसौली में स्वदेशी रूप से निर्मित टेटनस एवं अडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन का शुभारंभ किया।
- यह कदम वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करता है, आयात पर निर्भरता को कम करता है तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को सशक्त बनाता है।
टेटनस और अडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
- द्वैध सुरक्षा: पारंपरिक टेटनस टॉक्सॉइड (TT) वैक्सीन, जो केवल टेटनस से सुरक्षा प्रदान करती है, के विपरीत Td वैक्सीन टेटनस (T) और डिफ्थीरिया (d) दोनों से संरक्षण देती है।
- कम एंटीजन मात्रा: Td में ‘d’ डिफ्थीरिया टॉक्सॉइड की कम मात्रा को दर्शाता है, जिसे विशेष रूप से वयस्कों और किशोरों के लिये इस प्रकार तैयार किया गया है कि दुष्प्रभाव कम हों और प्रतिरक्षा प्रभावी रूप से बढ़े।
- यद्यपि बचपन में दिया जाने वाला DPT (डिफ्थीरिया, काली खाँसी, टेटनस) टीका प्रारंभिक सुरक्षा प्रदान करता है, परंतु वयस्कावस्था में डिफ्थीरिया के प्रति प्रतिरक्षा प्रायः कम हो जाती है। Td बूस्टर दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करता है।
- TT का प्रतिस्थापन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने देशों को टेटनस टॉक्सॉइड (TT) टीके के स्थान पर Td टीका अपनाने की अनुशंसा की है।
- भारत में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह (NTAGI) ने भी सभी आयु-वर्गों, गर्भवती महिलाओं सहित, के लिये टीकाकरण कार्यक्रम में TT के स्थान पर Td टीका लागू करने की अनुशंसा की है, ताकि टेटनस उन्मूलन की उपलब्धियों को बनाए रखते हुए डिफ्थीरिया के विरुद्ध बेहतर सुरक्षा प्रदान की जा सके।
- इस परिवर्तन को समर्थन देते हुए केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, कसौली (CRI) ने Td टीके का विकास पूरा कर लिया है, नियामकीय स्वीकृतियाँ प्राप्त कर ली हैं तथा इसका वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ कर दिया है।
- यह टीका अब औपचारिक रूप से सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP), जो विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है, में शामिल कर लिया गया है। केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI), कसौली अप्रैल 2026 तक इसकी 55 लाख खुराकें उपलब्ध कराएगा।
टेटनस और डिफ्थीरिया के बारे में मुख्य तथ्य क्या हैं?
टेटनस
- कारण और संचरण: टेटनस क्लोस्ट्रीडियम टेटानी नामक बैक्टीरिया के एनएरोबिक स्पोर्स के कारण होता है, ये स्पोर्स मिट्टी, धूल और पशुओं के मल में बहुतायत में पाए जाते हैं
- यह एक गैर-संचारी बीमारी है (अर्थात यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती) और शरीर में दूषित घावों, कटने या गर्भनाल के माध्यम से प्रवेश करती है।
- मातृ और नवजात टेटनस (MNT): यह अब भी कम-आय वाले क्षेत्रों में मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
- नवजात टेटनस आमतौर पर तब होता है जब गर्भनाल को काटने के लिये असंक्रमित या अस्वच्छ उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
- लक्षण: इसे आमतौर पर "लॉकजॉ" (lockjaw) के नाम से जाना जाता है। इसके मुख्य लक्षणों में जबड़े में जकड़न (Cramping), माँसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन (अक्सर शोर से शुरू होने वाली), निगलने में कठिनाई और दौरे पड़ना शामिल हैं।
- रोकथाम और टीकाकरण रणनीति: टेटनस को टेटनस टॉक्सॉइड युक्त टीकों (TTCV) के माध्यम से पूरी तरह रोका जा सकता है।
- हालाँकि इस बीमारी से ठीक होने के बाद शरीर में प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Natural Immunity) विकसित नहीं होती, इसलिये स्वस्थ होने के बाद भी उत्तरजीवियों (Survivors) के लिये टीकाकरण अनिवार्य है।
- वैश्विक प्रगति: 1988 और 2018 के बीच टीकाकरण कार्यक्रमों के आक्रामक वैश्विक विस्तार के कारण नवजात टेटनस से होने वाली मौतों में 97% की कमी आई है।
- भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धियाँ: भारत ने वर्ष 2015 में प्रत्येक ज़िले में नवजात टेटनस की वार्षिक दर को 1,000 जीवित जन्मों पर 1 से कम मामले तक घटा दिया।
- डिजिटल ट्रैकिंग: भारत U-WIN प्लेटफॉर्म का उपयोग करके लगभग 5 करोड़ वार्षिक लाभार्थियों के प्रत्येक टीकाकरण कार्यक्रम को डिजिटल रूप से ट्रैक करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उन्हें 16 वर्ष की आयु तक निर्धारित सभी 27 टीके प्राप्त हों।
डिफ्थीरिया
- कारण: यह बीमारी मुख्य रूप से कोरिनेबैक्टेरियम डिफ्थीरिया (Corynebacterium Diphtheriae) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है।
- संचरण: यह रोग मुख्य रूप से खाँसी और छींक या संक्रमित व्यक्ति के साथ निकट संपर्क के माध्यम से फैलता है।
- ‘स्यूडोमेंब्रेन’ डिफ्थीरिया का एक प्रमुख लक्षण संक्रमण के 2-3 दिनों के भीतर नाक और गले में मृत ऊतकों की एक मोटी, धूसर परत का बनना है, जो श्वसन मार्ग में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
- घातक जटिलताएँ: यह टॉक्सिन रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकता है, जिससे मायोकार्डाइटिस (हृदय की माँसपेशियों की सूजन) और न्यूरोपैथी (तंत्रिका क्षति) हो सकती है। उपचार न होने पर मृत्यु दर 30% तक पहुँच सकती है, विशेषकर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में।
- जोखिम कारक: शरणार्थी शिविरों में भीड़भाड़, संघर्ष के कारण क्षतिग्रस्त स्वास्थ्य अवसंरचना और अपर्याप्त टीकाकरण हालिया पुनरावृत्ति के प्रमुख कारण हैं।
- महामारी के कारण नियमित टीकाकरण और निगरानी प्रणालियों में गंभीर बाधाएँ आईं, जिससे लाखों बच्चे रोग प्रकोपों के प्रति संवेदनशील हो गए।
- उपचार: डिफ्थीरिया के उपचार में डिफ्थीरिया एंटीटॉक्सिन (DAT) की आवश्यकता होती है, जो टॉक्सिन को निष्क्रिय करता है तथा एंटीबायोटिक्स, जो बैक्टीरिया को नष्ट करती हैं। हालाँकि डिफ्थीरिया के जीवाणुओं में बढ़ता हुआ एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) एक गंभीर और उभरती हुई चिंता बनता जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. टीडी वैक्सीन क्या है और यह टीटी वैक्सीन से किस प्रकार भिन्न है?
टीडी वैक्सीन टेटनस और डिफ्थीरिया दोनों से सुरक्षा प्रदान करती है, जबकि टीटी केवल टेटनस से सुरक्षा प्रदान करती है।
2. भारत ने टीटी वैक्सीन को टीडी वैक्सीन से क्यों बदला?
भारत ने WHO और NTAGI की सिफारिशों के आधार पर TT वैक्सीन को TD वैक्सीन से बदल दिया है। इस बदलाव से डिफ्थीरिया के खिलाफ सुरक्षा बेहतर होती है और साथ ही टेटनस उन्मूलन में प्राप्त उपलब्धियाँ भी बनी रहती हैं।
3. CRI कसौली में स्वदेशी टीडी वैक्सीन उत्पादन का क्या महत्त्व है?
CRI कसौली में टीडी वैक्सीन (TD vaccine) का स्वदेशी उत्पादन 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को सशक्त करता है। यह महत्त्वपूर्ण कदम वैक्सीन आयात पर हमारी निर्भरता को कम करता है और देश के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के लिये वैक्सीन की विश्वसनीय और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
4. टेटनस और डिफ्थीरिया के संचरण में क्या अंतर है?
टेटनस एक संक्रामक रोग है और घावों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है, जबकि डिफ्थीरिया श्वसन और वाहकों के माध्यम से फैलता है।
5. टीकाकरण में यू-विन प्लेटफॉर्म की क्या भूमिका है?
यू-विन (U-Win) लाखों लाभार्थियों के टीकाकरण को डिजिटल रूप से ट्रैक करने में सक्षम बनाता है। यह सुनिश्चित करता है कि यूआईपी (UIP) के तहत टीकाकरण कवरेज समय पर हो और उसकी उचित निगरानी की जा सके।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. 'रिकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन' के संबंध में हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- इन टीकों के विकास में जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग किया जाता है।
- बैक्टीरिया और वायरस का उपयोग वेक्टर के रूप में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
2. निम्नलिखित रोगों पर विचार कीजिये:
1. डिफ्थीरिया
2. छोटी माता (चिकनपॉक्स)
3. चेचक (स्मॉलपॉक्स)
उपर्युक्त में से किस रोग/किन रोगों का भारत में उन्मूलन हो चुका है?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) 1, 2 और 3
(d) कोई नहीं
उत्तर: (b)
