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राष्ट्रपति भवन में लुटियंस के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी
- 23 Feb 2026
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भारत के प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि राष्ट्रपति भवन में स्थित ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा को हटाकर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
- जहाँ एडविन लुटियंस ने भव्य राष्ट्रपति भवन की रूपरेखा तैयार की थी, वहीं सी. राजगोपालाचारी को राष्ट्राध्यक्ष के रूप में इस भवन के प्रथम भारतीय अधिवासी होने का गौरव प्राप्त है।
सी. राजगोपालाचारी
- परिचय: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, जिन्हें लोकप्रिय रूप से राजाजी के नाम से जाना जाता है, एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात राजनेता तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल थे।
- उनका जन्म 10 दिसंबर, 1878 को मद्रास प्रेसीडेंसी के सेलम (वर्तमान तमिलनाडु) में हुआ था।
- मुख्य योगदान:
- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से प्रेरित होकर वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा बाद में रॉलेट विरोधी आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की मेज़बानी की।
- दांडी मार्च की तर्ज़ पर उन्होंने तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम तक नमक सत्याग्रह (1930) का नेतृत्व किया, जिसे वेदारण्यम नमक सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है।
- राजाजी ने वर्ष 1937 में मद्रास प्रेसीडेंसी के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने खादी को बढ़ावा दिया और ज़मींदारी प्रथा के उन्मूलन का समर्थन किया।
- सी.आर. फॉर्मूला (1944): भारत छोड़ो आंदोलन के बाद, उन्होंने ‘द वे आउट’ नामक पुस्तिका लिखी, जिसमें पाकिस्तान की मांग को लेकर INC और मुस्लिम लीग के बीच संवैधानिक गतिरोध को हल करने के लिये एक फॉर्मूला प्रस्तावित किया गया था।
- स्वतंत्रता के बाद का राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व: स्वतंत्रता के उपरांत, उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और केंद्रीय गृहमंत्री (सरदार पटेल के बाद) का पदभार सँभाला। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रथम पंचवर्षीय योजना का मसौदा तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन्होंने संसद में निवारक निरोध अधिनियम, 1950 का भी प्रस्ताव रखा था।
- राजाजी ने वर्ष 1959 में स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की, जो बाज़ार अर्थव्यवस्था की प्रबल समर्थक थी। मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में, उनके शुरुआती कदमों में से एक खाद्यान्नों के वितरण और उनकी कीमतों पर लगे नियंत्रण को हटाना था।
- साहित्यिक योगदान एवं पुरस्कार: उन्होंने सामाजिक उत्थान के लिये मद्रास प्रांत में एक आश्रम की स्थापना की (1925) तथा विमोचनम (तमिल) और प्रोहिबिशन (अंग्रेज़ी) प्रकाशित कीं।
- उन्हें तमिल साहित्य में रामायण के अपने पुनर्लेखन, जिसका शीर्षक 'चक्रवर्ती तिरुमगन' है, के लिये वर्ष 1958 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
- वे भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (1954) के प्रथम तीन प्राप्तकर्त्ताओं में से एक थे। अन्य दो प्राप्तकर्त्ता डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सी.वी. रमन थे।
- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से प्रेरित होकर वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा बाद में रॉलेट विरोधी आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की मेज़बानी की।
एडविन लुटियंस:
- एक ब्रिटिश वास्तुकार एवं नगर योजनाकार, जिन्होंने सर हर्बर्ट बेकर के सहयोग से नई दिल्ली में कई भव्य इमारतों की रूपरेखा तैयार की। इनमें राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और इंडिया गेट प्रमुख हैं।
- उनके स्थापत्य योगदान के सम्मान में नई दिल्ली के एक भाग को लुटियंस दिल्ली के नाम से जाना जाता है।
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