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वर्षांत समीक्षा 2025: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

  • 29 Jan 2026
  • 86 min read

स्रोत: पीआईबी

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने वर्षांत समीक्षा 2025 जारी की है। इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि वर्ष 2014 में अपनी शुरुआत से, जिस समय लाखों युवा भारतीय हर साल उद्योग के लिये तैयार कौशलों के बिना कार्यबल में शामिल हो रहे थे, भारत का कौशल पारितंत्र किस प्रकार विकसित हुआ है।

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने भारत की कौशल विकास प्रणाली को कैसे रूपांतरित किया?

  • PMKVY 4.0: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के चौथे संस्करण में एक बड़ा बदलाव आया है, जहाँ अब 'लक्ष्य-आधारित नामांकन' के बजाय 'मांग-आधारित कौशल विकास' पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। 
    • दिसंबर 2025 तक 38 क्षेत्रों और 732 ज़िलों में 27.08 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जो इसके वास्तविक अखिल भारतीय विस्तार को दर्शाता है।
    • 102 भविष्य-उन्मुख कौशल भूमिकाओं और 77 अनुकूलित पाठ्यक्रमों की शुरुआत से यह दर्शाया गया है कि केवल सामान्य प्रशिक्षण का विस्तार करने के बजाय, 'औद्योगिक 4.0' और 'ग्रीन जॉब्स' जैसे प्रासंगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कौशल विकास किया गया है।
    • "PMKVY को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, पीएम-जनमन, पीएम स्वनिधि और जल जीवन मिशन जैसी प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं के साथ जोड़ा गया है। यह मुख्य विकास कार्यक्रमों के भीतर कौशल विकास को शामिल करने और सरकार के एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  • ITI के माध्यम से व्यावसायिक शिक्षा का पुनर्निर्माण: MSDE ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) का विस्तार और आधुनिकीकरण किया, ताकि वे कार्यबल तैयार करने में अपनी भूमिका को पुनः स्थापित कर सकें। ITI में नामांकन करने वाले प्रशिक्षुओं की संख्या 9.5 लाख से बढ़कर 14 लाख से अधिक हो गई।
    • PM–SETU (प्रधानमंत्री स्किलिंग और रोज़गार योग्यतावर्द्धन परियोजना) का शुभारंभ: मई 2025 में PM–SETU की शुरुआत ने गुणवत्तापरक बदलाव को चिह्नित किया, जिसमें ITI को उद्योग-नेतृत्व वाले क्लस्टरों (हब-एंड-स्पोक मॉडल) तथा राज्य-विशेष आर्थिक क्षमताओं के अनुरूप जोड़ा गया जिससे लंबे समय से मौजूद रोज़गार योग्यतावाद तथा क्षेत्रीय असंगति की समस्याओं का समाधान हुआ।
    • STRIVE परियोजना: विश्व बैंक द्वारा समर्थित STRIVE परियोजना ने ITI और उद्योग क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण को मज़बूत किया।
  • रोज़गार के लिये प्रशिक्षु को एक व्यापक सेतु के रूप में: राष्ट्रीय प्रशिक्षु संवर्द्धन योजना (NAPS) के तहत अप्रेंटिसशिप को केवल एक पारंपरिक विकल्प नहीं, बल्कि मुख्य कौशल विकास मार्ग के रूप में व्यापक रूप से बढ़ाया गया।
    • 2016 से अब तक 49.18 लाख से अधिक प्रशिक्षु उम्मीदवारों को शामिल किया गया है, जिनमें से केवल वित्तीय वर्ष 2024–26 के दौरान लगभग 18 लाख नियुक्तियाँ हुईं।
    • महिलाओं की भागीदारी 11.3% (2018–19) से बढ़कर 22.84% (2024–25) हो गई, जो पैमाना और समावेशिता दोनों को दर्शाता है।
  • पारंपरिक कौशल को मुख्यधारा में लाना: सितंबर 2023 में शुरू की गई PM विश्वकर्मा योजना ने पारंपरिक कारीगरों की संरचनात्मक उपेक्षा को दूर किया और उन्हें औपचारिक कौशल विकास तथा ऋण प्रणाली में शामिल किया।
    • वर्ष 2025 तक 18 पारंपरिक व्यवसायों में 23.66 लाख कारीगरों को प्रशिक्षित और प्रमाणित किया जा चुका है।
    • कौशल उन्नयन, उपकरण किट और बैंक ऋण का संयोजन दर्शाता है कि यह पहल केवल सांस्कृतिक संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि आय-केंद्रित कौशल आधुनिकीकरण की ओर बढ़ी है, जो विशेष रूप से अनौपचारिक और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के लिये प्रासंगिक है।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: 2023 में लॉन्च किया गया स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) विस्तृत शासन का आधार बन गया।
    • सितंबर 2025 तक SIDH में 1.6 करोड़ उम्मीदवारों का पंजीकरण हुआ, 30,000+ प्रशिक्षण केंद्र जुड़े और विभिन्न योजनाओं के तहत 1,100 करोड़ रुपये से अधिक का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) संभव हुआ।
    • वर्ष 2019 में शुरू किया गया 'भारत स्किल्स' पोर्टल, 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' (SIDH) के पूरक के रूप में एक समृद्ध ऑनलाइन कंटेंट रिपॉज़िटरी की तरह कार्य करता है। 75.37 लाख से अधिक उपयोगकर्त्ताओं और 4.44 करोड़ हिट्स के साथ, यह ITI प्रशिक्षुओं और शिक्षकों को महत्त्वपूर्ण डिजिटल शिक्षण सहायता प्रदान कर रहा है।
    • यह डेटा दर्शाता है कि डिजिटल एकीकरण ने MSDE को कौशल विकास को तेज़ी से बढ़ाने, साथ ही पारदर्शिता, निगरानी और वित्तीय नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम बनाया।
  • उद्यमिता: नौकरी सृजन के एक प्रमुख प्रेरक के रूप में उद्यमिता को मान्यता देते हुए, MSDE ने दिसंबर 2025 तक 12.75 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया, जिसके परिणामस्वरूप 26,000+ उद्यमों का सृजन हुआ। इसमें महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिये स्वावलंबिनी महिला उद्यमिता कार्यक्रम, जो वर्ष 2025 की शुरुआत में लॉन्च हुआ, जैसे लक्षित प्रयासों का योगदान रहा।
    • क्षमता निर्माण को पूरक बनाते हुए, क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर स्किल डेवलपमेंट को वर्ष 2024 में पुनर्निर्मित किया गया, जिसमें पात्र ऋणदाताओं का दायरा बढ़ाया गया, ऋण सीमा 7.5 लाख रुपये तक बढ़ाई गई और गारंटी कवरेज में सुधार किया गया।
  • जन शिक्षण संस्थान: इसने महिलाओं, जनजातीय और वंचित समूहों को लक्षित करके अंतिम छोर तक समावेश सुनिश्चित किया।
    • वर्ष 2018 और दिसंबर 2025 के बीच 33.55 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें से डिजिटल एकीकरण के बाद 7.08 लाख NCVET-अनुपालन प्रमाणपत्र जारी किये गए।
    • इसने यह सुनिश्चित किया कि राष्ट्रव्यापी पैमाना केवल शहरी-केंद्रित न रहे, बल्कि श्रम शक्ति के अनौपचारिक और संवेदनशील वर्गों तक विस्तारित हो।
  • भारतीय कौशल का वैश्वीकरण: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने सरकार-से-सरकार (G2G) समझौतों और स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर का लाभ उठाकर भारत को एक वैश्विक कौशल आपूर्तिकर्त्ता के रूप में स्थापित किया।
    • नवंबर 2025 तक SIIC में 8,313 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया था। यह अनौपचारिक प्रवासन से विनियमित, कौशल-आधारित वैश्विक गतिशीलता की ओर एक बदलाव को दर्शाता है, जो घरेलू कौशल को अंतर्राष्ट्रीय श्रम की मांग के साथ संरेखित करता है।
  • सुदृढ़ शासन और गुणवत्ता:
    • NCVET (2018): योग्यताओं को मानकीकृत करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) के तहत व्यावसायिक शिक्षा को विनियमित करने के लिये शीर्ष नियामक के रूप में स्थापित किया गया।
    • भारतीय कौशल विकास सेवा (ISDS) (2017): कौशल विकास योजनाओं के प्रशासन को पेशेवर बनाने और मज़बूत करने के लिये स्थापित की गई।
    • संकल्प कार्यक्रम (2018–2025): आजीविका संवर्द्धन के लिये कौशल अधिग्रहण और ज्ञान के प्रति जागरूकता (संकल्प) कार्यक्रम, विश्व बैंक समर्थित पहल ने ज़िला और राज्य स्तरीय योजना के माध्यम से संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ किया तथा कौशल विकास को विकेंद्रीकृत किया।
    • कौशल अंतराल अध्ययन: घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मांग के साथ प्रशिक्षण को संरेखित करने के लिये राष्ट्रीय और वैश्विक कौशल अंतराल पर ध्यान केंद्रित किया।

राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET)

  • NCVET भारत के तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (TVET) तंत्र के लिये शीर्ष नियामक है।
  • एनसीवीईटी (NCVET) पुरस्कार प्रदान करने एवं मूल्यांकन करने वाली संस्थाओं का विनियमन कर, NSQF-समन्वित योग्यताओं को अनुमोदित कर तथा प्रभावी पर्यवेक्षण और शिकायत निवारण सुनिश्चित करते हुए समान मानकों को लागू करता है। यह ढाँचा राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) पर आधारित है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुरूप संरेखित है।
    • कौशल विकास क्षेत्र में विद्यमान बिखराव, असंगत मानकों और गुणवत्ता की कमियों को दूर करने के उद्देश्य से इसने पूर्ववर्ती राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (NSDA) तथा राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (NCVT) की भूमिकाओं को अपने अंतर्गत समाहित कर लिया।
  • राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति के माध्यम से NCVET ने भविष्योन्मुखी योग्यता, माइक्रो-क्रेडेंशियल और इंडिया स्किल्स स्टैंडर्ड को सक्षम किया है।
  • NCVET के तहत प्रमुख पहलें:
    • कौशलवर्स (डिजिटल गवर्नेंस): वास्तविक समय, डेटा-संचालित निगरानी के लिये डिजिटल मान्यता, अनुमोदन, निगरानी और शिकायत निवारण।
    • SOAR (AI रेडीनेस के लिये कौशल विकास): NSQF संरेखित सूक्ष्म-प्रमाणपत्रों के माध्यम से कक्षा 6-12 और शिक्षकों के लिये आधारभूत AI साक्षरता शुरू की।
    • रोज़गार क्षमता और जीवन कौशल ढाँचा: सॉफ्ट स्किल्स, कार्यस्थल तत्परता और 21वीं सदी के दक्षताओं को मज़बूत करने के लिये एक राष्ट्रीय ढाँचा शुरू किया।
    • अप्रेंटिसशिप क्रेडिटीकरण: अप्रेंटिसशिप लर्निंग के परिणामों को मानकीकृत किया और डिजी लॉकर एवं शैक्षणिक क्रेडिट बैंक के साथ क्रेडिट को जोड़ा।
    • सेमीकंडक्टर कार्यबल रणनीति: सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए भविष्य-उन्मुख प्रतिभा शृंखला तैयार करने के उद्देश्य से, उद्योग-नेतृत्वित और चरणबद्ध (स्टैकेबल) योग्यताओं का विकास किया गया है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. भारत के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने भारत की स्किलिंग रणनीति को संख्या-केंद्रित से मांग-आधारित परिणामों की ओर स्थानांतरित कैसे किया है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (PMKVY 4.0) क्या है और यह पिछले चरणों से कैसे अलग है?
PMKVY 4.0 नामांकन के मात्रात्मक लक्ष्यों पर नहीं, बल्कि मांग-आधारित कौशल विकास पर केंद्रित है, जिसमें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य-कौशल आधारित रोज़गार भूमिकाएँ तथा अनुकूलित पाठ्यक्रम शामिल किये गए हैं।

2. भारत के स्किलिंग ईकोसिस्टम में NCVET की क्या भूमिका है?
NCVET शीर्ष नियामक है जो योग्यताओं को मानकीकृत करता है, पुरस्कार और मूल्यांकन निकायों को विनियमित करता है एवं NEP 2020 के साथ संरेखित NSQF के तहत गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित करता है।

3. हाल के वर्षों में अप्रेंटिसशिप भागीदारी में कैसे सुधार हुआ है? 

राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (NAPS) के तहत  वर्ष 2016 की तुलना में 49 लाख से अधिक अप्रेंटिस शामिल किये गए हैं, जिसमें महिलाओं की भागीदारी लगभग 23% तक बढ़ी है, जिसे डीबीटी और सरलीकृत अनुपालन से समर्थन मिला है।

4. स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) का क्या महत्त्व है?
SIDH कौशल विकास के लिये एक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के रूप में कार्य करता है, जो एंड-टू-एंड ट्रैकिंग, प्रमाणन, DBT और 1.6 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ नौकरी मिलान को सक्षम बनाता है।

5. PM विश्वकर्मा योजना का क्या महत्त्व है?
PM विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को औपचारिक कौशल प्रशिक्षण, ऋण तथा प्रमाणन प्रणालियों से जोड़ते हुए, सांस्कृतिक संरक्षण तक सीमित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर आय और उत्पादकता में वृद्धि पर केंद्रित है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स

प्रश्न. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के सन्दर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)

  1. यह श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय की फ्लैगशिप स्कीम है। 
  2. यह, अन्य चीज़ों के साथ-साथ, सॉफ्ट स्किल, उद्यमवृत्ति, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता में भी प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगी।
  3. यह देश के अविनियमित कार्यबल की कार्यकुशलताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क) के साथ जोड़ेगी। 

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a)    केवल 1 और 3   

(b)    केवल 2

(c)    केवल 2 और 3   

(d)    1, 2 और 3 

उत्तर: (c)


मेंस 

प्रश्न. "भारत में जनांकिकीय लाभांश तब तक सैद्धांतिक ही बना रहेगा जब तक कि हमारी जनशक्ति अधिक शिक्षित, जागरूक, कुशल और सृजनशील नहीं हो जाती।" सरकार ने हमारी जनसंख्या को अधिक उत्पादनशील और रोज़गार योग्य बनने की क्षमता में वृद्धि के लिये कौन-से उपाय किये हैं? (2016)

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