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DGCA ने ATPL के लिये इलेक्ट्रॉनिक पर्सनल लाइसेंस सर्विस शुरू की
चर्चा में क्यों?
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने जनवरी 2026 में एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस (ATPL) के लिये इलेक्ट्रॉनिक पर्सनल लाइसेंस (EPL) सेवाएँ शुरू की हैं।
मुख्य बिंदु:
- डिजिटल लाइसेंस: इलेक्ट्रॉनिक पर्सनल लाइसेंस (EPL) एक सुरक्षित डिजिटल लाइसेंस है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के अनुरूप सुरक्षा विशेषताएँ शामिल हैं।
- इसका उद्देश्य पायलट लाइसेंसों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना, छेड़छाड़-रोधक व्यवस्था उपलब्ध कराना तथा वास्तविक-समय ऑनलाइन सत्यापन को सक्षम बनाना है।
- एक्सेस प्लेटफॉर्म: पायलट एवं अन्य हितधारक इस लाइसेंस को इलेक्ट्रॉनिक DGCA (eGCA) मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से देख और प्रबंधित कर सकते हैं, जिससे सुविधा तथा पारदर्शिता बढ़ती है।
- पूर्व रोल-आउट: DGCA ने इससे पहले फरवरी 2025 में वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस (CPL) और फ्लाइट रेडियो टेलीफोन ऑपरेटर (प्रतिबंधित) लाइसेंस (FRTOL) के लिये EPL सेवाएँ शुरू की थीं।
- नियामक प्रभाव: यह पहल सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य-उन्मुख डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से भारत के नागरिक उड्डयन नियामक ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- प्रासंगिकता: EPL पहल ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ के लक्ष्यों के अनुरूप है, क्योंकि इससे भौतिक दस्तावेज़ों पर निर्भरता घटती है तथा विमानन क्षेत्र में सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है।
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अमेलिया वाल्वरडे को भारतीय महिला फुटबॉल टीम का हेड कोच नियुक्त किया
चर्चा में क्यों?
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने आधिकारिक तौर पर अमेलिया वाल्वरडे को भारतीय वरिष्ठ महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की मुख्य कोच नियुक्त किया है।
मुख्य बिंदु:
- अमेलिया वाल्वरडे की प्रोफाइल: कोस्टा रिका की अत्यंत अनुभवी कोच अमेलिया वाल्वरडे वर्ष 2015 से 2023 तक कोस्टा रिका महिला राष्ट्रीय टीम की मुख्य कोच रहीं और अपने लंबे कार्यकाल के लिये जानी जाती हैं।
- ऐतिहासिक उपलब्धियाँ: उन्होंने वर्ष 2015 और वर्ष 2023 के फीफा महिला विश्व कप के लिये कोस्टा रिका की टीम को सफलतापूर्वक क्वालिफाई कराया।
- विज़न 2047 से सामंजस्य: यह नियुक्ति AIFF की ‘विज़न 2047’ रोडमैप के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत को एशिया में एक प्रमुख फुटबॉल शक्ति बनाना और भविष्य में फीफा विश्व कप के लिये क्वालिफाई करना है।
- अवसंरचना पर ध्यान: कोचिंग के साथ-साथ वाल्वरडे से महिला फुटबॉल के संरचनात्मक विकास में योगदान देने की अपेक्षा है, जिसमें इंडियन विमेन्स लीग (IWL) भी शामिल है।
- वैश्विक पहचान: विश्व कप का अनुभव रखने वाली कोच की नियुक्ति भारत की AFC (एशियन फुटबॉल परिसंघ) क्षेत्र में प्रतिस्पर्द्धी शक्ति बनने की मंशा को प्रदर्शित करती है।
- भारत में खेल प्रशासन: राष्ट्रीय महासंघों (AIFF) की भूमिका विदेशी विशेषज्ञता का उपयोग कर स्वदेशी प्रतिभा-भंडार विकसित करना और सतत खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना।
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महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिये भारत की पहली टेलिंग्स नीति
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने देश की पहली टेलिंग्स नीति (Tailings Policy) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य खनन अपशिष्ट जैसे टेलिंग्स, माइन डंप, स्लैग और ओवरबर्डन से महत्त्वपूर्ण तथा रणनीतिक खनिजों की पुनर्प्राप्ति को सक्षम बनाना है।
मुख्य बिंदु:
- टेलिंग्स की परिभाषा: टेलिंग्स वे अवशिष्ट अपशिष्ट पदार्थ होते हैं (चट्टानों का महीन अवशेष, जल और रसायन) जो अयस्क से मूल्यवान खनिज निकालने के बाद बच जाते हैं।
- द्वितीयक स्रोतों से पुनर्प्राप्ति: यह नीति मौजूदा माइन डंप, स्लैग, फ्लाई ऐश और टेलिंग्स तालाबों से ‘सह-खनिजों’ के निष्कर्षण पर ध्यान केंद्रित करती है।
- अंतर-मंत्रालयी समन्वय: चूँकि महत्त्वपूर्ण खनिज विभिन्न क्षेत्रों द्वारा सॅंभाले जाने वाले पदार्थों में पाए जाते हैं, इसलिये नीति कोयला, खान, पेट्रोलियम और परमाणु ऊर्जा मंत्रालयों के बीच समन्वित दृष्टिकोण को अनिवार्य बनाती है।
- तकनीकी क्रियान्वयन: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), भारतीय खान ब्यूरो (IBM) और परमाणु खनिज निदेशालय (AMD) जैसी एजेंसियाँ इन द्वितीयक संसाधनों की पहचान, नमूनाकरण तथा आर्थिक मूल्यांकन का नेतृत्व करेंगी।
- परिपत्र अर्थव्यवस्था: अपशिष्ट के पुनःप्रसंस्करण के माध्यम से यह नीति परिपत्र खनन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है, नए खानों की आवश्यकता को कम करती है और भूमि क्षरण तथा जल प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय खतरों को न्यूनतम करती है।
- आयात निर्भरता में कमी: भारत लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्त्वों (REEs) जैसे खनिजों के लिये भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है। टेलिंग्स के पुनःप्रसंस्करण से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और स्वच्छ ऊर्जा के लिये घरेलू आपूर्ति शृंखलाएँ सुदृढ़ होंगी।
- आर्थिक मूल्य: सह-धातुओं की पुनर्प्राप्ति (जैसे तांबे की टेलिंग्स से सेलेनियम और कोबाल्ट या जिंक अपशिष्ट से इंडियम) अरबों डॉलर के ‘हिडन’ खनिज मूल्य को उजागर कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूपता: यह नीति राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन और आत्मनिर्भर भारत को समर्थन देती है, जिससे दीर्घकालिक संसाधन सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

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