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बिहार स्टेट पी.सी.एस.

  • 27 Jan 2026
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बिहार की DISCOM ने 14वीं नेशनल पावर सेक्टर रैंकिंग में हासिल किया 'A' ग्रेड

चर्चा में क्यों?

बिहार की नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) तथा साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) को विद्युत वितरण उपयोगिताओं की 14वीं इंटीग्रेटेड रेटिंग और रैंकिंग में ‘A’ ग्रेड से सम्मानित किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • एजेंसियाँ: विद्युत मंत्रालय के अधीन पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) ने DISCOM की 14वीं इंटीग्रेटेड रेटिंग और रैंकिंग आयोजित की।
  • आकलित उपयोगिताओं की संख्या: इस रैंकिंग में पूरे भारत की 65 विद्युत वितरण उपयोगिताएँ शामिल थीं।
    • मापदंड: रेटिंग परिचालन दक्षता, शासन, वित्तीय अनुशासन, आपूर्ति की गुणवत्ता और ग्राहक सेवा के आधार पर की गई।
  • सुधार दर्ज: पिछले चक्रों की तुलना में दोनों DISCOM ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
  • महत्त्व:
    • इससे बिलिंग, संग्रह और ऊर्जा वितरण में सुधार होता है।
    • इससे विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति और बेहतर सेवा मानक सुनिश्चित होते हैं।
    • इससे अधिक वित्तीय और तकनीकी निवेश आकर्षित हो सकता है।
  • नीति से सामंजस्य: यह उपलब्धि भारत सरकार की पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) और DISCOM दक्षता तथा सेवा सुधार से जुड़ी राष्ट्रीय विद्युत क्षेत्र सुधारों के अनुरूप है।

और पढ़ें: DISCOM और RDSS


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ICAR और BISA ने ACASA-इंडिया लॉन्च किया तथा NICRA के 15 वर्ष की समीक्षा की

चर्चा में क्यों?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय जलवायु-सहिष्णु कृषि नवाचार (NICRA) की समीक्षा कार्यशाला तथा एटलस ऑफ क्लाइमेट अडैप्टेशन इन इंडियन एग्रीकल्चर (ACASA–India) के लॉन्च-कम-यूज़ केस कार्यशाला का उद्घाटन किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • ACASA–India (डिजिटल क्लाइमेट एटलस) का लॉन्च: यह एक वेब-सक्षम डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे स्थान-विशेष और डेटा-संचालित अनुकूलन योजना प्रदान करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
    • डेवलपर: इसे ICAR नेतृत्व वाले राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान और विस्तार प्रणाली (NARES) ने BISA–CIMMYT के सहयोग से विकसित किया है।
    • कार्यप्रणाली: यह उच्च रिज़ॉल्यूशन पर 15 फसलों और छह पशुधन प्रजातियों के लिये  जलवायु जोखिम का मानचित्रण करता है तथा अनुकूलन विकल्पों की पहचान करता है।
  • NICRA का 15-वर्षीय मूल्यांकन: वर्ष 2011 में लॉन्च किया गया, NICRA भारत का प्रमुख कार्यक्रम है, जो तकनीकी प्रदर्शन और अनुसंधान के माध्यम से कृषि को जलवायु परिवर्तन के प्रति सहिष्णु बनाने के लिये कार्य करता है।
    • कार्यान्वयन: यह वर्तमान में 151 जलवायु-संवेदनशील ज़िलों में 200 से अधिक स्थानों पर सक्रिय है।
  • उपलब्धियाँ: अब तक 11 जलवायु-सहिष्णु फसल किस्में विकसित की जा चुकी हैं और विभिन्न फसलों के कार्बन उत्सर्जन संकेत का आकलन किया गया है ताकि भविष्य के कार्बन क्रेडिट सिस्टम का समर्थन किया जा सके।
  • रणनीतिक बदलाव: अधिकारियों ने यह दर्शाया कि NICRA अब एक ‘निर्णायक चरण’ में पहुँच चुका है और इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप एक रोडमैप की आवश्यकता है, जो व्यक्तिगत खेतों से आगे बढ़कर व्यापक परिदृश्य स्तर पर हस्तक्षेपों की दिशा में केंद्रित हो।
  • महत्त्व: यह कार्यशाला कृषि में जलवायु चुनौतियों का सामना करने के लिये विज्ञान-प्रधान प्रतिक्रिया के महत्त्व को रेखांकित करती है, सहिष्णुता निर्माण को बढ़ावा देती है और भारत की खाद्य सुरक्षा तथा सततता के लक्ष्यों के अनुरूप है।
    • यह बदलती जलवायु में किसानों की अनुकूलन रणनीतियों को सुदृढ़ करने में डिजिटल उपकरणों की भूमिका को भी उजागर करती है।

और पढ़ें: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, जलवायु अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार


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इंडिया एनर्जी वीक 2026

चर्चा में क्यों?

इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026 का चौथा संस्करण, जो 27–30 जनवरी 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा, गोवा में वैश्विक ऊर्जा अभिकर्त्ताओं, नीति-निर्माताओं, उद्योग हितधारकों और निवेशकों को एक साथ लाएगा ताकि ऊर्जा सुरक्षा, सततता तथा निवेश अवसरों पर विचार-विमर्श किया जा सके।

मुख्य बिंदु:

  • सबसे बड़ा ऊर्जा मंच: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित यह कार्यक्रम विश्व के सबसे बड़े ऊर्जा मंचों में से एक के रूप में उभरने की संभावना रखता है।
  • थीम: इसकी थीम “विकास को ऊर्जा देना, अर्थव्यवस्थाओं को सुरक्षित करना और जीवन को समृद्ध बनाना है।”
  • प्रमुख उद्देश्य: यह मंच तीन महत्त्वपूर्ण स्तंभों पर केंद्रित है: ऊर्जा सुरक्षा, निवेश को प्रोत्साहित करना (उत्प्रेरित करना) और व्यावहारिक डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने के) मार्ग।
  • विशिष्ट स्थान: कई वैश्विक मंचों के विपरीत, IEW 2026 पूरे ऊर्जा क्षेत्र पर विचार-विमर्श करता है, जिसमें जीवाश्म ईंधन, जैव ईंधन, हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।
  • प्रदर्शनी:  प्रदर्शनी में 11 ज़ोन होंगे, जिनमें परमाणु ऊर्जा और सतत विमानन ईंधन पर केंद्रित नए खंड शामिल हैं।
  • नवाचार क्षेत्र: अविन्या 2026 और हैकाथॉन चैलेंज 2026 जैसी पहलें स्टार्टअप भागीदारीतथा नवाचार को प्रोत्साहित करती हैं, जबकि ‘मेक इन इंडिया’ मंडप स्वदेशीकरण को बढ़ावा देता है।
  • महत्त्व: यह ऊर्जा क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
    • भारत के ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और आर्थिक विकास के व्यापक लक्ष्यों का समर्थन करता है।

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गुजरात में स्थापित भारत की पहली निजी उपग्रह निर्माण सुविधा

चर्चा में क्यों?

भारत ने अंतरिक्ष निर्माण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है, जब गुजरात के साणंद में देश के पहले निजी उपग्रह और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पेलोड निर्माण संयंत्र की आधारशिला रखी गई।

मुख्य बिंदु:

  • फैसिलिटी: पाल्मनारो इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पेलोड फैसिलिटी, अज़िस्टा स्पेस सिस्टम्स द्वारा स्थापित भारत का पहला एकीकृत निजी उपग्रह और पेलोड निर्माण संयंत्र।
    • स्थान: यह विनिर्माण इकाई गुजरात के साणंद स्थित खोराज औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है।
  • MoU: इस परियोजना में गुजरात सरकार के साथ ₹500 करोड़ से अधिक के MoU शामिल हैं, जो मज़बूत सार्वजनिक–निजी भागीदारी को दर्शाते हैं।
  • रणनीतिक क्षेत्र में प्रवेश: यह उन्नत उपग्रह निर्माण के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की प्रविष्टि को चिह्नित करता है, जिस पर पहले ISRO और सार्वजनिक उपक्रमों का वर्चस्व था।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता: यह सुविधा पृथ्वी अवलोकन और रक्षा अनुप्रयोगों सहित वैश्विक वाणिज्यिक उपग्रह बाज़ार में भारत की प्रतिस्पर्द्धा को सशक्त बनाएगी।
    • यह सुविधा उन्नत पेलोड का उत्पादन करेगी जो नागरिक क्षेत्रों (जैसे कृषि, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन) के लिये भी उपयोगी होंगे।
  • उद्देश्य: इस संयंत्र का लक्ष्य इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पेलोड का स्वदेशीकरण करना, आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू अंतरिक्ष आपूर्ति शृंखलाओं को मज़बूत करना है।
    • अंतरिक्ष निर्माण क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को समर्थन देता है।

और पढ़ें: ISRO, आत्मनिर्भर भारत


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ह्यूमनॉइड रोबोट 'ASC अर्जुन'

चर्चा में क्यों?

भारतीय रेलवे ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर ‘ASC अर्जुन’ नामक एक ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात किया है।

मुख्य बिंदु:

  • पहली पहल: यह नवाचार-आधारित यात्री सेवा सुधार के तहत भारतीय रेलवे नेटवर्क पर ह्यूमनॉइड रोबोट की पहली तैनाती है।
  • स्वदेशी तकनीक: ASC अर्जुन को रेलवे सुरक्षा बल (RPF), विशाखापत्तनम द्वारा स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है।
  • भूमिका और कार्य: यह स्टेशन संचालन में RPF कर्मियों की सहायता करता है, विशेषकर यात्रियों की भीड़ के समय।
    • सुरक्षा और निगरानी विशेषताएँ: इसमें घुसपैठ पहचान के लिये फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS), AI-आधारित भीड़ निगरानी और RPF कंट्रोल रूम से रियल-टाइम कनेक्टिविटी शामिल है।
    • यात्री सहायता: यह रोबोट अंग्रेज़ी, हिंदी और तेलुगु में स्वचालित सार्वजनिक घोषणाएँ कर सकता है।
  • स्वायत्त गश्त: ASC अर्जुन में बाधा-परिहार क्षमता के साथ अर्ध-स्वायत्त नेविगेशन है। 
    • जिससे 24×7 प्लेटफॉर्म गश्त और मानव संसाधन के बेहतर उपयोग में सहायता मिलती है।
    • आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली: इसमें आग और धुएँ की पहचान करने वाली प्रणालियाँ शामिल हैं, ताकि आपात स्थिति में समय पर कार्रवाई हो सके।
  • इंटरैक्टिव डिज़ाइन: यह ‘नमस्ते’ जैसे मित्रतापूर्ण इशारों के साथ यात्रियों से संवाद करता है तथा वास्तविक समय की जानकारी और सहायता प्रदान करता है।
  • महत्त्व: यह सुरक्षित, संरक्षित और अधिक यात्री–अनुकूल स्टेशनों के लिये तकनीक अपनाने पर भारतीय रेलवे के फोकस को दर्शाता है।

और पढ़ें: फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS), AI 


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सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने संस्थागत श्रेणी में सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) तथा व्यक्तिगत श्रेणी में लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्‍के को सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 के लिये चयनित किया है।

मुख्य बिंदु:

  • सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार: भारतीय नागरिकों और संस्थानों को आपदा प्रबंधन (रोकथाम, शमन, तैयारी, बचाव एवं पुनर्वास) के क्षेत्र में असाधारण साहस तथा समर्पण के लिये सम्मानित करने हेतु यह पुरस्कार दिया जाता है।
  • घोषणा: प्रतिवर्ष 23 जनवरी (पराक्रम दिवस) को की जाती है।
  • पुरस्कार राशि:
    • संस्थागत श्रेणी: प्रमाणपत्र और ₹51 लाख (यह राशि संस्था द्वारा आपदा प्रबंधन गतिविधियों में उपयोग की जाएगी)।
    • व्यक्तिगत श्रेणी: प्रमाणपत्र और ₹5 लाख।
  • नोडल मंत्रालय: गृह मंत्रालय (MHA)।
  • संस्थागत श्रेणी: सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) को हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में समुदाय-केंद्रित आपदा सहनशीलता विकसित करने के अग्रणी कार्यों के लिये मान्यता दी गई है।
  • मुख्य उपलब्धि (आपदा मित्र): प्राधिकरण ने सभी ग्राम पंचायतों में 1,185 आपदा मित्रों (सामुदायिक स्वयंसेवकों) को प्रशिक्षित और तैनात किया है।
    • ये स्वयंसेवक उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सामान्य  भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान प्रथम प्रतिक्रिया देने वालों की भूमिका निभाते हैं।
  • संचालनात्मक सफलता: SSDMA ने वर्ष 2023 की तीस्ता फ्लैश फ्लड तथा वर्ष 2016 के मंताम भूस्खलन के दौरान वास्तविक समय समन्वय के माध्यम से 2,500 से अधिक लोगों को बचाने और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में जानमाल की हानि को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • व्यक्तिगत श्रेणी: लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्‍के को वर्ष 2024 के वायनाड (केरल) भूस्खलन के दौरान उनके नेतृत्व के लिये राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
    • उनके निर्देशन में सेना की इंजीनियरिंग इकाई ने भारी वर्षा और अस्थिर भू-भाग के बीच चूरलमाला में रिकॉर्ड समय में 190 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाया।
  • महत्त्व: राष्ट्रीय स्तर पर यह दोहरा सम्मान प्रभावी आपदा प्रबंधन में संस्थागत तैयारी और व्यक्तिगत वीरता दोनों के महत्त्व को रेखांकित करता है।

और पढ़ें: पराक्रम दिवस, सुभाष चंद्र बोस


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