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छत्तीसगढ स्टेट पी.सी.एस.

  • 25 Sep 2021
  • 0 min read
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मुकुंद रेडियो द्वारा प्रकाशित मोनोग्राफ का विमोचन

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चर्चा में क्यों?

24 सितंबर, 2021 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास कार्यालय में मुकुंद रेडियो द्वारा प्रकाशित मोनोग्राफ का विमोचन किया। इस मोनोग्राफ में वर्ष 1952 से 2021 तक अविभाजित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लगभग छह दशकों का दृश्यात्मक दस्तावेज़ संकलित है।

प्रमुख बिंदु

  • मुकुंद रेडियो के संचालक संजय मोहदीवाले ने बताया कि 1950 के दशक में स्थापित इस संस्थान में सभी राजनीतिक- सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सचित्र ब्यौरा रखा गया है। 
  • संस्थान में श्वेतश्याम दौर से लेकर आज के डिजिटल युग तक छत्तीसगढ़ अंचल में आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत करने वाली मशहूर हस्तियों की तिथिवार तस्वीरों की एक लघु दीर्घा मौजूद है। इन्हीं तस्वीरों के दस्तावेज़ को मोनोग्राफ की शक्ल में प्रकाशित किया गया है। 
  • मोनोग्राफ के आकल्पक व संपादक राजेश गनौदवाले ने बताया कि किताब में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, इंदिरा गांधी, चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, रविशंकर शुक्ल, मन्ना डे, पंकज उधास, बेगम अख्तर, जगजीत सिंह जैसी हस्तियों के छत्तीसगढ़ आगमन से लेकर मुख्यमंत्री बघेल के कार्यकाल के 2 वर्षों की चुनिंदा तस्वीरें शामिल हैं। 
  • मुख्यमंत्री ने मोनोग्राफ की प्रति स्वहस्ताक्षरित कर शुभकामना संदेश दिया और कहा कि ऐसा फोटो दस्तावेज़ इकट्ठा करना, जिसमें प्रदेश में आई सभी शख्सियतों का रिकॉर्ड हो और उसे दशकों तक सहेज कर सिलसिलेवार रूप से प्रकाशित करना अपने आप में बहुत महत्त्वपूर्ण और प्रशंसनीय कार्य है।

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नसबंदी में छत्तीसगढ़ पिछले 5 वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर

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चर्चा में क्यों?

24 सितंबर, 2021 को परिवार नियोजन कार्यक्रम के उप-संचालक डॉ. सत्यार्थी ने बताया कि पुरुष नसबंदी पखवाड़ा के दौरान नसबंदी में छत्तीसगढ़ पिछले 5 वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर है। इस दौरान प्रदेश में 4905 पुरुषों ने परिवार नियोजन के लिये नसबंदी कराई है।

प्रमुख बिंदु

  • डॉ. सत्यार्थी ने बताया कि पुरुष नसबंदी पखवाड़ा के दौरान वर्ष 2017-18 में प्रदेश के 966, वर्ष 2018-19 में 72, वर्ष 2019-20 में 1695, वर्ष 2020-21 में 168 और वर्ष 2021-22 में 1349 पुरुषों ने नसबंदी कराई है।
  • उन्होंने कहा कि नसबंदी पखवाड़ा के दौरान ग्राम स्तर से लेकर ज़िला स्तर तक विशेष अभियान चलाकर लोगों में पुरुष नसबंदी के प्रति फैली भ्राँतियों व मिथकों को विभाग द्वारा दूर किया जाता है। ग्राम स्तर पर ‘मोर मितान मोर संगवारी’ चौपाल का आयोजन कर पुरुषों को नसबंदी कराने हेतु प्रेरित किया जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार और परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिये प्रदेशव्यापी पुरुष नसबंदी पखवाड़ा मनाया जाता है।
  • पखवाड़ा दो चरणों में आयोजित किया जाता है। पहला चरण मोबिलाइजेशन सप्ताह के रूप में होता है, जिसमें जनसंख्या स्थिरीकरण में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने एवं राज्य में एनएसवीटी कार्यक्रम को सुचारु ढंग से संचालित कर नसबंदी के लिये पुरुषों को जागरूक किया जाता है एवं ‘मोर मितान मोर संगवारी’ की थीम पर ग्राम स्तर पर आयोजित गोष्ठियों में पुरुषों को नसबंदी हेतु प्रेरित किया जाता है। वहीं दूसरा चरण सेवा वितरण सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। 
  • स्वास्थ्य विभाग द्वारा नसबंदी कराने वालों को दो हज़ार रुपए एवं उत्प्रेरकों को 250 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

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देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार

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चर्चा में क्यों?

हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा के परिपालन में संस्कृति विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध पंथी नर्तक स्वर्गीय देवदास बंजारे की स्मृति में राज्यस्तरीय ‘देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार’ की स्थापना की गई है।

प्रमुख बिंदु

  • इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक शैली ‘पंथी नृत्य’ प्रदर्शनकारी कला के क्षेत्र में प्रतिभागियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित तथा सम्मानित करना है। 
  • देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार की नियमावली का प्रकाशन 10 सितंबर, 2021 को राज-पत्र में हो चुका है।
  • उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 18 दिसंबर, 2020 को बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती के अवसर पर स्वर्गीय देवदास बंजारे की स्मृति में पंथी नृत्य पुरस्कार स्थापित किये जाने की घोषणा की थी। 
  • इस पुरस्कार को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले राज्य अलंकरण समारोह में शामिल कर लिया गया है। 
  • पंथी नृत्य पुरस्कार के तहत 50 हज़ार रुपए की सम्मान राशि, प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति-पत्र दिया जाएगा।
  • गौरतलब है कि राज्य में संस्कृति विभाग द्वारा पहले से ही ‘देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार’ स्थापित है, जो राज्य में प्रदर्शनकारी लोक शैली कला क्षेत्र के क्षेत्र अंतर्गत स्थापित है। देवदास बंजारे की स्मृति में यह राज्यस्तरीय दूसरा पुरस्कार केवल लोक शैली ‘पंथी नृत्य’ प्रदर्शनकारी कला के क्षेत्र में स्थापित किया गया है। इस प्रकार अब संस्कृति विभाग से दिये जाने वाले पुरस्कारों की संख्या अब 8 हो गई है।

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