झारखंड Switch to English
टाटा स्टील का झारखंड में ग्रीन स्टील परियोजनाओं में निवेश
चर्चा में क्यों?
टाटा स्टील ने झारखंड सरकार के साथ ग्रीन स्टील परियोजनाओं में 11,000 करोड़ रुपये के निवेश के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये हैं।
मुख्य बिंदु
- समझौता ज्ञापन: झारखंड सरकार और टाटा स्टील के बीच आशय पत्र (LoI) और सहयोग समझौते के माध्यम से निवेश को औपचारिक रूप दिया गया है।
- यह समझौता विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 के दौरान दावोस, स्विट्ज़रलैंड में संपन्न हुआ, जहाँ नीदरलैंड और जर्मनी से तकनीकी सहयोग मिला।
- मुख्य उद्देश्य: इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य कम कार्बन उत्सर्जन वाली, पर्यावरण-अनुकूल इस्पात उत्पादन पद्धतियों को अपनाकर सतत औद्योगीकरण को बढ़ावा देना है।
- प्रौद्योगिकी: इस योजना में निवेश के हिस्से के रूप में HISARNA और EASyMelt की ग्रीन स्टील निर्माण प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।
- HISARNA: स्वदेशी कोयले और निम्न श्रेणी के लौह अयस्क का उपयोग करके उन्नत लौह निर्माण प्रक्रिया से CO₂ उत्सर्जन में लगभग 80% तक कमी आती है।
- EASyMelt: पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस स्टील उत्पादन को आधुनिक बनाता है, सिंथेटिक गैस के माध्यम से कोक के उपयोग को कम करता है तथा CO₂ उत्सर्जन को लगभग 50% तक कम करता है।
- राज्य द्वारा मान्यता: WEF के दौरान, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को श्वेत बैज से सम्मानित किया गया, जो सतत विकास और औद्योगिक नवाचार के प्रति राज्य के दृष्टिकोण की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है।
- मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि यह निवेश स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन, कौशल विकास और समावेशी आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहित करेगा।
- महत्त्व: समग्र रूप से यह निवेश झारखंड के हरित औद्योगीकरण के दृष्टिकोण के अनुरूप है, राज्य के विनिर्माण आधार को मज़बूत करता है और भारत के कार्बन उत्सर्जन में कमी और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) का समर्थन करता है।
|
और पढ़ें: विश्व आर्थिक मंच (WEF), ग्रीन स्टील, सतत विकास |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
नई दिल्ली में द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन
चर्चा में क्यों?
बौद्ध दर्शन के वैश्विक प्रसार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में नई दिल्ली में द्वितीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- स्थल: भारत मंडपम, नई दिल्ली।
- आयोजक: यह शिखर सम्मेलन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
- विषय: ‘Collective Wisdom, United Voice, Shared Coexistence’ अर्थात सामूहिक ज्ञान, एकजुट आवाज़, पारस्परिक सहअस्तित्व।
- उद्देश्य: करुणा, ज्ञान, सद्भाव जैसे शाश्वत बौद्ध मूल्यों को उजागर करना और सामाजिक शांति, नैतिक नेतृत्व, पर्यावरण और कल्याण के संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना।
- चर्चा के प्रमुख क्षेत्र: सामाजिक सद्भाव, उद्यमिता एवं सम्यक आजीविका, स्वास्थ्य सेवा एवं सतत जीवन, बौद्ध शिक्षा और संघ की परंपराएँ।
- प्रदर्शनियाँ: पवित्र अवशेष, सांस्कृतिक जुड़ाव तथा विरासत से विश्व थीम के अंतर्गत भारत में बुद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार का समग्र प्रस्तुतीकरण।
- AI पहल: बौद्ध ज्ञान के प्रचार और अधिगम में सहायता के लिये ‘कल्याण मित्र के रूप में अपनाए गए एआई-आधारित बौद्ध भाषा मॉडल, नोरबू का परिचय।
- महत्त्व: यह सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संवाद, सांस्कृतिक कूटनीति और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को और सशक्त करता है।
|
और पढ़ें: वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC), भारत में बौद्ध धर्म |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
स्ट्राइप्ड टाइगर चंडीगढ़ की राजकीय तितली घोषित
चर्चा में क्यों?
चंडीगढ़ के राज्य वन्यजीव बोर्ड (SBWL) ने स्ट्राइप्ड टाइगर को आधिकारिक रूप से केंद्रशासित प्रदेश की राज्य तितली घोषित किया है, जो जैव विविधता की मान्यता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है।
मुख्य बिंदु
- चयन प्रक्रिया: वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा शहर की प्राकृतिक विरासत के लिये उपयुक्त प्रतीक चिह्न निर्धारित करने हेतु एक वर्ष तक चलने वाला चयन अभियान संचालित किया गया।
- स्ट्राइप्ड टाइगर का चयन ऑनलाइन सार्वजनिक मतदान के माध्यम से हुआ, जिसमें इसे कुल वोटों का लगभग 54% प्राप्त हुआ।
- इसने तीन अन्य चयनित प्रजातियों – ब्लू टाइगर, प्लेन टाइगर और जेज़बेल (Jezebel)
- को पीछे छोड़ दिया।
- चयन का आधार: अपनी आकर्षक उपस्थिति और अनुकूलनशीलता के कारण इसे चुना गया है तथा यह सुखना वन्यजीव अभयारण्य और सेक्टर 26 तितली पार्क सहित पूरे केंद्रशासित प्रदेश में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
- स्ट्राइप्ड टाइगर तितली के मुख्य तथ्य:
- रूप-रंग: इस तितली के पंख चमकीले भूरे-नारंगी रंग के होते हैं जिन पर गहरी काली धारियाँ होती हैं, जो इसे बाघ-सदृश आकृति प्रदान करती हैं।
- रक्षा तंत्र: यह शिकारियों के लिये अरुचिकर (बेस्वाद) माना जाता है, यह विशेषता अमेरिकी मोनार्क तितली के समान है।
- स्थिति: यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत सूचीबद्ध है।
- संरक्षण जागरूकता: इस घोषणा का उद्देश्य नागरिकों और विद्यार्थियों में जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित करना है।
- नया वन्यजीव शिक्षण केंद्र: घोषणा के साथ ही, प्रशासक ने स्थानीय वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिये एक नए वन्यजीव शिक्षण केंद्र (जैसे कि एक जैविक पार्क या बाड़ा) की स्थापना का निर्देश दिया।

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने राष्ट्रीय वन प्रबंधन समिति की बैठक की अध्यक्षता की
चर्चा में क्यों?
19 जनवरी, 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) की 88वीं बैठक की अध्यक्षता की।
मुख्य बिंदु
- स्वीकृत प्रस्ताव: समिति में संरक्षित क्षेत्रों, टाइगर रिज़र्व और इको-सेंसिटिव ज़ोन के भीतर और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित 70 प्रस्तावों पर विचार किया गया।
- रणनीतिक अवसंरचना: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण रणनीतिक सड़कों और अवसंरचना से संबंधित 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, जिनमें से मुख्य रूप से लद्दाख और सिक्किम में थे।
- सार्वजनिक उपयोगिताएँ: चर्चा की गई परियोजनाओं में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र, 4G टावरों के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी, सड़क उन्नयन और पारेषण लाइनों से संबंधित परियोजनाएँ शामिल थीं।
- जल सुरक्षा: मध्य प्रदेश में एक मध्यम सिंचाई परियोजना पर विचार किया गया, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र को पेयजल और सिंचाई जल उपलब्ध कराकर बुंदेलखंड क्षेत्र को लाभ पहुँचाना और साथ ही घड़ियालों सहित वन्यजीवों के लिये जल स्थितियों में सुधार करना था।
- प्रशासनिक एवं प्रक्रिया सुधार: समिति ने पूर्व निर्णयों पर की गई कार्रवाइयों की समीक्षा की तथा परिवेश पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
- निरंतर निगरानी: आगामी बैठकों में अनुपालन और निगरानी से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी, ताकि प्रभावी वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
SC-NBWL क्या है?
- स्थापना: इसकी स्थापना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत की गई है।
- नेतृत्व: जहाँ राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की पूर्ण अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, वहीं इसकी स्थायी समिति (Standing Committee) की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री करते हैं।
- कार्य: यह संरक्षण से संबंधित विषयों पर केंद्र सरकार को परामर्श प्रदान करने वाला निकाय है तथा संरक्षित क्षेत्रों के भीतर या आसपास प्रस्तावित विकास परियोजनाओं की समीक्षा करता है।
और पढ़ें: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, जल जीवन मिशन

%20(2).gif)
.png)

%20(1).gif)



.jpg)






