उत्तर प्रदेश Switch to English
इंडियास्किल्स राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2025–26 ग्रेटर नोएडा में शुरू
चर्चा में क्यों?
इंडियास्किल्स राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2025–26, जो भारत की प्रमुख कौशल प्रतियोगिता है, पूरे देश के युवाओं के बीच व्यावसायिक कौशल का प्रदर्शन और प्रोत्साहन करने के लिये ग्रेटर नोएडा में प्रारंभ हो गई है।
मुख्य बिंदु:
- लॉन्च: इंडियास्किल्स राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2025–26 की आधिकारिक शुरुआत उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में उद्घाटन समारोह के साथ हुई।
- यह प्रतियोगिता स्किल इंडिया मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में कुशल कार्यबल का विकास करना है।
- आयोजन निकाय: इस प्रतियोगिता का आयोजन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत किया जा रहा है।
- उद्देश्य: इस कार्यक्रम का लक्ष्य कौशल विकास को बढ़ावा देना, व्यावसायिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना और युवाओं के बीच कौशल-आधारित करियर के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है।
- यह प्रतियोगिता वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 के लिये अंतिम क्वालीफाइंग इवेंट के रूप में कार्य करती है, जिसे ‘ओलंपिक्स ऑफ स्किल्स’ भी कहा जाता है।
- कौशल श्रेणियाँ: प्रतिभागी 63 विभिन्न कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्द्धा करेंगे, जिनमें पारंपरिक व्यवसाय, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, सेवा उत्कृष्टता तथा ऑनसाइट और ऑफसाइट कार्यान्वयन शामिल हैं।
- इसमें इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, वेब टेक्नोलॉजी और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे मुख्य कौशलों के साथ-साथ रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, इंडस्ट्री 4.0, डिजिटल कंस्ट्रक्शन तथा मानव रहित हवाई प्रणालियाँ जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल हैं।
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और पढ़ें: स्किल इंडिया मिशन, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
स्तुति प्रधान वर्ल्ड यूथ पार्लियामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी
चर्चा में क्यों?
सिक्किम की स्तुति प्रधान को प्रतिष्ठित वर्ल्ड यूथ पार्लियामेंट 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिये चयनित किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- प्रतिनिधित्व: सिक्किम की युवा नेता स्तुति प्रधान को वर्ल्ड यूथ पार्लियामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिये चुना गया है।
- वर्ल्ड यूथ पार्लियामेंट:
- वर्ल्ड यूथ पार्लियामेंट एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है, जो विभिन्न देशों के युवा नेताओं को एक साथ लाता है, ताकि वे वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर सकें और नवाचारी नीतिगत समाधान प्रस्तुत कर सकें।
- यह मंच अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देता है और प्रतिभागियों को शासन तथा कूटनीति में भविष्य की भूमिकाओं के लिये तैयार करता है।
- पूर्व उपलब्धियाँ:
- स्तुति प्रधान वर्ष 2025 के विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट की राज्य स्तरीय विजेता रही हैं।
- उन्हें उनकी उपलब्धियों के सम्मान में गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर लोक भवन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
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और पढ़ें: विकसित भारत |
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अडानी पोर्ट्स द्वारा भारत का पहला 'पोर्ट ऑफ रिफ्यूज' तंत्र लॉन्च किया गया
चर्चा में क्यों?
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) ने समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिये भारत के पहले ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (PoR)’ तंत्र को संचालित किया है।
मुख्य बिंदु:
- भारत का पहला पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (PoR): APSEZ ने देश का पहला पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (PoR) शुरू किया है, जिससे समुद्री आपात स्थितियों के प्रबंधन और संकटग्रस्त जहाजों की सहायता के लिये एक व्यवस्थित ढाँचा स्थापित हुआ है।
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (PoR) वह निर्धारित स्थान होता है, जहाँ कठिनाइयों का सामना कर रहे जहाज़ शरण ले सकते हैं, अपनी स्थिति को स्थिर कर सकते हैं, मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं और पर्यावरणीय क्षति को कम कर सकते हैं।
- ट्व-पोर्ट मॉडल: यह PoR ढाँचा प्रारंभ में पश्चिमी तट पर दिघी बंदरगाह और पूर्वी तट पर गोपालपुर बंदरगाह के माध्यम से संचालित होगा, जिससे भारत के तटों पर रणनीतिक कवरेज सुनिश्चित होगा।
- वैश्विक सहयोग: यह पहल SMIT साल्वेज और मरीन इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर (MERC) के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से समर्थित है, जो समुद्री बचाव तथा आपात प्रतिक्रिया में अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
- आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाएँ: यह तंत्र समुद्री घटनाओं के दौरान समन्वित सेवाएँ जैसे बचाव कार्य, अग्निशमन, मलबा हटाना, प्रदूषण नियंत्रण और माल की स्थिरता सुनिश्चित करने में सक्षम होगा।
- APSEZ: अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड भारत का सबसे बड़ा निजी बंदरगाह संचालक है तथा अडानी समूह का हिस्सा है, जो पूरे देश में कई बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का संचालन करता है।
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साध्वी निरंजन ज्योति ने NCBC के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला
चर्चा में क्यों?
साध्वी निरंजन ज्योति ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया है।
मुख्य बिंदु:
- पृष्ठभूमि: साध्वी निरंजन ज्योति पूर्व सांसद रही हैं और उन्होंने ग्रामीण विकास तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालयों में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया है।
- वे सामाजिक और सामुदायिक विकास पहलों में सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं, विशेषकर समाज के कमज़ोर एवं वंचित वर्गों के सशक्तीकरण के लिये।
- नए सदस्य: किरण उमेश महाले ने NCBC के सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण किया है।
- वे पहले अमरावती नगर निगम की मेयर रह चुकी हैं और सामाजिक एवं संगठनात्मक कार्यों में व्यापक अनुभव रखती हैं।
- NCBC: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जो भारत में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) के हितों और कल्याण की रक्षा के लिये उत्तरदायी है।
- यह आयोग भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- संवैधानिक दर्जा: इसे 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 (अनुच्छेद 338B) के माध्यम से संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।
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और पढ़ें: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) |
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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ऑस्सिलेशन ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हुआ
चर्चा में क्यों?
भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेनसेट ने सफलतापूर्वक अपना ऑस्सिलेशन ट्रायल पूरा कर लिया है, जो देश में स्वच्छ और हरित रेल परिवहन को शुरू करने के प्रयासों में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- परीक्षण: भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेनसेट का ऑस्सिलेशन ट्रायल सुरक्षा और प्रदर्शन मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
- यह परीक्षण भारतीय रेल की तकनीकी शाखा, अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा किया गया, जो परीक्षण और प्रमाणन के लिये ज़िम्मेदार है।
- यह ट्रेनसेट वर्तमान में विश्व की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन (10 कोच) है और 2400 किलोवाट की शक्ति क्षमता के साथ सबसे शक्तिशाली ट्रेनों में से एक है।
- ट्रेन का विकास: इस हाइड्रोजन-चालित ट्रेनसेट का निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा किया गया है।
- मार्ग: यह ट्रेन हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच संचालित होने की संभावना है।
- ट्रेन को ईंधन उपलब्ध कराने के लिये जींद में एक समर्पित हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है।
- हरित प्रौद्योगिकी: हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करती हैं और केवल जलवाष्प छोड़ती हैं, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का विकल्प बनती हैं।
- वैश्विक महत्त्व: इस पहल के साथ भारत जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा, जहाँ हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
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और पढ़ें: शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन |
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वर्ल्ड फूड प्राइज़ 2026
चर्चा में क्यों?
नीदरलैंड्स के हूब लेलीवेल्ड को वैश्विक खाद्य सुरक्षा विज्ञान में उनके अग्रणी कार्य के लिये 2026 के वर्ल्ड फूड प्राइज़ पुरस्कार विजेता के रूप में नामित किया गया है, जिसने पूरे विश्व में खाद्य जनित बीमारियों के लाखों मामलों को रोकने तथा खाद्य हानि और अपशिष्ट को कम करने में सहायता की है।
मुख्य बिंदु:
- विजेता: हूब लेलीवेल्ड को 2026 का वर्ल्ड फूड प्राइज़ प्रदान किया गया है, जो खाद्य सुरक्षा और वैश्विक मानकों के क्षेत्र में उनके आजीवन योगदान की मान्यता है।
- लेलीवेल्ड ने 113 से अधिक देशों में फैले एक स्वैच्छिक आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके माध्यम से विज्ञान-आधारित अंतर्राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानक, नियम और प्रक्रियाएँ विकसित की गईं, जिससे वैश्विक स्तर पर सुरक्षित खाद्य आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित हो सकी।
- उन्हें कीव स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई और अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिये डच शाही परिवार द्वारा ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑरेंज-नासाउ’ की उपाधि भी दी गई।
- संगठन: उन्होंने वर्ष 2004 में ग्लोबल हार्मोनाइजेशन इनिशिएटिव (GHI) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा नियमों में समन्वय स्थापित करना, व्यापार को सुगम बनाना और सुरक्षित भोजन की आपूर्ति में बाधा बनने वाली अनावश्यक रुकावटों को कम करना है, विशेषकर कमज़ोर वर्गों के लिये।
- उनके कार्य ने आधुनिक स्वच्छ उत्पादन विधियों एवं तकनीकों को विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे अत्यधिक परिरक्षकों पर निर्भरता कम हुई, खाद्य गुणवत्ता में सुधार हुआ और खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ बढ़ी।
- वर्ल्ड फूड प्राइज़:
- इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1986 में नोबेल पुरस्कार विजेता नॉर्मन बोरलॉग द्वारा की गई थी।
- इस पुरस्कार के विजेताओं को कृषि, पोषण, खाद्य प्रौद्योगिकी और भूख उन्मूलन के क्षेत्र में नवाचारों के लिये प्रतिवर्ष 5 लाख अमेरिकी डॉलर प्रदान किये जाते हैं।
- इसका पहला पुरस्कार 1987 में एम. एस. स्वामीनाथन को दिया गया था, जिन्हें भारत की हरित क्रांति का जनक माना जाता है।
- वर्ष 2025 का वर्ल्ड फूड प्राइज़ मारियांगेला हंग्रिया को प्रदान किया गया था।


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