राजस्थान Switch to English
राजस्थान की बामनवास कांकड़ पहली पूर्ण जैविक पंचायत बनी
चर्चा में क्यों?
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ ज़िले की बामनवास कांकड़ पंचायत राज्य ही नहीं बल्कि उत्तर-पश्चिम भारत की पहली पूर्णतः जैविक-प्रमाणित पंचायत बन गई है।
मुख्य बिंदु:
- प्रमाणीकरण: COFED (कोफार्मिन फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनिक सोसाइटीज़ एंड प्रोड्यूसर कंपनीज़) द्वारा प्रमाणन सुगम बनाया गया।
- COFED ने जैविक मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये तकनीकी और बाज़ार सहायता प्रदान की।
- पंचायत को नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (NPOP) मानकों के तहत पूर्णतः जैविक पंचायत के रूप में प्रमाणित किया गया।
- समुदाय-आधारित पहल: रासायनिक-मुक्त कृषि का परिवर्तन स्थानीय निवासियों, विशेषकर महिला किसानों द्वारा संचालित था, जो मृदा के क्षरण, भूजल समस्याओं और रसायनों से स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण प्रेरित हुआ।
- रसायन-मुक्त कृषि की प्रतिज्ञा: किसानों ने सिंथेटिक उर्वरकों और रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग न करने की शपथ ली।
- सतत विकास का मॉडल: यह पंचायत जैविक कृषि, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण को जोड़कर सतत ग्रामीण विकास का एक ऐसा मॉडल निर्मित करती है जिसे अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।
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और पढ़ें: राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP), जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण। |
मध्य प्रदेश Switch to English
मध्य प्रदेश में स्वच्छ जल अभियान शुरू किया
चर्चा में क्यों?
मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर में हाल ही में हुई जल संदूषण की घटना और उससे उत्पन्न गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं के बाद पूरे राज्य में सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिये स्वच्छ जल अभियान शुरू किया है।
मुख्य बिंदु:
- अभियान का उद्देश्य: स्वच्छ जल अभियान का लक्ष्य पूरे राज्य में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके लिये संदूषण के स्रोतों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा रहा है, निगरानी तंत्र को मज़बूत किया जा रहा है और जल अवसंरचना में सुधार किया जा रहा है।
- लॉन्च: इस अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल से की।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: पहल में भूमिगत पाइपलाइनों की जाँच, रिसाव की पहचान और सीवेज तथा पेयजल लाइनों के संभावित मिलन बिंदुओं का पता लगाने के लिये रोबोटिक तकनीक तथा GIS मैपिंग का उपयोग शामिल है, ताकि संदूषण के जोखिम को रोका जा सके।
- चरणबद्ध क्रियान्वयन: यह अभियान विभिन्न चरणों में संचालित किया जा रहा है, जिसमें जल की गुणवत्ता की गहन जाँच, जल शोधन संयंत्रों और स्टोरेज टैंकों की सफाई तथा सुरक्षा मानकों के अनुपालन हेतु नियमित परीक्षण शामिल हैं।
- जनभागीदारी: अभियान के तहत सरकार ने 'जल सुनवाई' जैसे तंत्र शुरू किये हैं, जिनके माध्यम से नागरिक जल गुणवत्ता से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकते हैं और इन शिकायतों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा में किया जाता है।
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और पढ़ें: GIS मैपिंग |
उत्तर प्रदेश Switch to English
उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश ने हाल ही में लखनऊ में क्षेत्रीय AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 तथा आर्थिक वृद्धि और सामाजिक कल्याण हेतु AI कार्यकारी समूह की चौथी बैठक की मेज़बानी की।
मुख्य बिंदु:
- मेज़बान: उत्तर प्रदेश सरकार ने इंडिया AI के सहयोग से और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समर्थन से इस आयोजन की मेज़बानी की।
- UP AI मिशन: सम्मेलन में औपचारिक रूप से UP AI मिशन की घोषणा की गई।
- निवेश: राज्य में AI लैब्स, डेटा सेंटर और शोध हब स्थापित करने के लिये तीन वर्षों में लगभग ₹2,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
- फोकस: इसका प्रमुख एजेंडा स्वास्थ्य क्षेत्र में AI अपनाने पर है।
- प्रारंभिक रोग निदान, डेटा-आधारित नीति निर्णय और बेहतर रोगी देखभाल को लक्षित करते हुए, उत्तर प्रदेश को AI-सक्षम स्वास्थ्य देखभाल समाधानों के लिये एक पायलट राज्य के रूप में स्थापित करना।
- AI इंफ्रास्ट्रक्चर: इस मिशन में 62 AI और डेटा लैब्स का निर्माण, अकादमी एवं उद्योग के साथ सहयोग तथा AI नवाचार और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना शामिल है।
- महत्त्व: यह पहल सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, डिजिटल शासन को सुदृढ़ करने और समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को भारत में AI अपनाने के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।
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और पढ़ें: AI इम्पैक्ट समिट, इंडियाAI, AI |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
अरलम तितली अभयारण्य
चर्चा में क्यों?
केरल सरकार ने कन्नूर ज़िले के अरलम वन्यजीव अभयारण्य का आधिकारिक रूप से नाम बदलकर अरलम तितली अभयारण्य कर दिया है।
मुख्य बिंदु:
- सूचना: इस नाम परिवर्तन की आधिकारिक सूचना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत जारी की गई।
- कारण: क्षेत्र में तितली प्रजातियों की समृद्ध विविधता और संख्या के कारण तथा उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा एवं संवर्द्धन की आवश्यकता के चलते।
- तितली विविधता: अरलम में लगभग 266 तितली प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो केरल की कुल तितली विविधता का 80% से अधिक हैं।
- स्थानीय प्रजातियाँ: अरलम में 27 प्रजातियाँ केवल पश्चिमी घाटों में ही पाई जाती हैं।
- WP अधिनियम के तहत सुरक्षा: अरालम में दर्ज 6 तितली प्रजातियाँ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध हैं।
- ऐतिहासिक स्थिति: अरलम क्षेत्र को मूल रूप से वर्ष 1984 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
- वैश्विक महत्त्व: यह अभयारण्य पश्चिमी घाटों का हिस्सा होने के नाते वैश्विक पारिस्थितिक महत्त्व रखता है, जिसे UNESCO ने विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है।
- सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव: नाम परिवर्तन से जैव विविधता संरक्षण को मज़बूत करने, पर्यावरणीय शिक्षा, इकोटूरिज़्म को बढ़ावा देने और तितलियों की संख्या की सुरक्षा में समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।
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और पढ़ें: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, IUCN रेड लिस्ट, UNESCO |
बिहार Switch to English
बिहार में क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण कार्यशाला
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने भारत के पूर्वी राज्यों के लिये बिहार के पटना में उपभोक्ता संरक्षण पर एक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
मुख्य बिंदु:
- पटना क्षेत्रीय केंद्र के रूप में: बिहार के पटना में आयोजित इस कार्यशाला में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के उपभोक्ता संरक्षण मामलों पर चर्चा की गई तथा बिहार की क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण सुधारों में उभरती भूमिका को रेखांकित किया गया।
- कार्यशाला का उद्देश्य: कार्यशाला का मुख्य फोकस उपभोक्ता मामलों का त्वरित निपटान, आयोग के आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन और प्रौद्योगिकी-संचालित शिकायत निवारण को अपनाने पर था।
- आयोजक: इसका आयोजन उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा किया गया है।
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन:
- शिकायत दर्ज करने के लिये टोल-फ्री नंबर 1915 और ऑनलाइन पोर्टल।
- बहुभाषी समर्थन ताकि अधिक लोगों को पहुँच सुनिश्चित हो सके।
- डिजिटल ट्रैकिंग, त्वरित प्रतिक्रिया और विश्लेषण आधारित निगरानी सक्षम करना।
- ई-जागृति: ई-जागृति में ई-दाखिल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, रियल-टाइम डैशबोर्ड और AI टूल्स शामिल हैं, जो मामला प्रबंधन को सरल तथा प्रक्रियागत विलंब को कम करने में सहायता करते हैं।
- डिजिटल बाज़ारों में संरक्षण: कार्यशाला में डार्क पैटर्न और भ्रामक ऑनलाइन प्रथाओं की चुनौतियों पर चर्चा की गई तथा ई-कॉमर्स में मज़बूत उपभोक्ता सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
- परिणाम: कार्यशाला पूर्वी भारत के लिये पारदर्शी, प्रभावी और प्रौद्योगिकी-सक्षम उपभोक्ता संरक्षण ढाँचे के निर्माण पर सहमति के साथ समाप्त हुई।
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और पढ़ें: ई-दाखिल, डार्क पैटर्न, AI, ई-कॉमर्स, उपभोक्ता संरक्षण |
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