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उत्तर प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 07 Jan 2026
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भारत का पहला सरकारी अस्पताल-आधारित AI क्लिनिक

चर्चा में क्यों?

भारत का पहला सरकारी अस्पताल-आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्लिनिक उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (GIMS) में उद्घाटित किया गया है।

मुख्य बिंदु 

  • क्लिनिक का उद्देश्य: यह क्लिनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एल्गोरिदम और जेनेटिक स्क्रीनिंग का उपयोग करके रक्त जाँच, इमेजिंग स्कैन तथा नैदानिक डेटा का विश्लेषण करेगा, जिससे रोग निदान एवं उपचार में सहायता मिलेगी।
  • प्रौद्योगिकी और उपयोग: AI उपकरण एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन, MRI रिपोर्ट और लैब जाँचों की व्याख्या में सहायता करेंगे।
    • यह कैंसर, हृदय, किडनी और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों के लिये जेनेटिक स्क्रीनिंग को भी समर्थन प्रदान करेगा।
    • सर्जरी की सटीकता और उपचारोत्तर परिणाम सुधारने के लिये AI सहायित रोबोटिक सर्जरी का प्रावधान भी शामिल है।
  • स्वास्थ्य प्रभाव: AI क्लिनिक से निदान की सटीकता में वृद्धि, उपचार समय कम होने, रोगी की सुरक्षा में सुधार तथा सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता मज़बूत होने की अपेक्षा है।
  • महत्त्व: यह क्लिनिक नैदानिक आवश्यकताओं और तकनीकी नवाचार के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगा तथा भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की वितरण प्रणाली को बदलने की क्षमता रखता है।

क्या आप जानते हैं?

  • एक्स-रे (X-Ray): वर्ष 1895 में रॉन्टजन (Röntgen) द्वारा एक्स-रे की खोज की गई थी।
  • CT स्कैन (कंप्यूटेड टोमोग्राफी): इसमें कई एक्स-रे किरणों का उपयोग कर शरीर की विस्तृत छवियाँ बनाई जाती हैं।
  • MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग): इसमें मैग्नेटिक फील्ड और रेडियो तरंगों का प्रयोग होता है।
  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): 20 kHz से अधिक की आवृत्ति। चमगादड़, दंतयुक्त व्हेल और डॉल्फिन इको-लोकेशन के लिये अल्ट्रासाउंड का उपयोग करते हैं।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में AI की भूमिका


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IIT मद्रास ने ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन लॉन्च किया

चर्चा में क्यों?

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) में IITM ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन लॉन्च किया।

मुख्य बिंदु 

  • उद्देश्य: यह फाउंडेशन IIT मद्रास को विश्व का पहला बहुराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में कार्य करेगा, जिससे उसके वैश्विक शोध, शिक्षा, नवाचार और सहयोग के क्षेत्र का विस्तार हो सके।
  • केंद्रित क्षेत्र: प्रमुख क्षेत्रों में डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा, मोबिलिटी, ऊर्जा एवं जल प्रणालियाँ, स्वास्थ्य तकनीक और हरित तकनीक शामिल हैं।
  • रणनीतिक विस्तार: प्रारंभिक वैश्विक उपस्थिति संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, दुबई और मलेशिया सहित कई देशों में स्थापित की जाएगी।
  • महत्त्व: यह पहल भारतीय नवाचारों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने में सहायता करेगी और तकनीकी साझेदारी एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से व्यावसायीकरण को तीव्र करेगी।
  • उत्सव एकीकरण: डॉ. जयशंकर ने IITM फेस्टिवल पखवाड़े का भी उद्घाटन किया, जिसमें शास्त्र (तकनीकी उत्सव) और सारंग (सांस्कृतिक उत्सव) के साथ ओपन हाउस एक्सेस शामिल है।

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कलाई-II जलविद्युत परियोजना

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एक विशेषज्ञ समिति ने अरुणाचल प्रदेश में 1,200 मेगावाट कलाई-II जलविद्युत परियोजना के लिये पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) की सिफारिश की है।

मुख्य बिंदु 

  • परियोजना विवरण: 1,200 मेगावाट कलाई-II जलविद्युत परियोजना लोहित नदी पर प्रस्तावित है, जिसे अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ ज़िले के हवाई गाँव में THDC इंडिया लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।
    • यह एक रन-ऑफ-रिवर (Run-of-River) प्रकार की परियोजना है, जिसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करते हुए स्वच्छ बिजली उत्पादन के लिये सीमित जल भंडारण शामिल है।
    • लोहित नदी: ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी है।
  • EIA विवाद: पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों ने EIA रिपोर्ट की आलोचना की क्योंकि इसमें गंभीर रूप से संकटग्रस्त व्हाइट बेलीड हेरान (Ardea insignis) की उपस्थिति का उल्लेख नहीं किया गया था।
  • व्हाइट बेलीड हेरान: 
    • व्हाइट बेलीड हेरान, कम व्यवधान वाले मुक्त प्रवाही नदी क्षेत्रों में रहना पसंद करता है और मुख्य रूप से तीव्र बहाव वाले स्थानों में मछली खाता है।
    • इसकी उपस्थिति लोहित नदी जलक्षेत्र में दर्ज की गई है, जिसमें कमलांग और नामदफा टाइगर रिज़र्व शामिल हैं।
    • IUCN स्थिति: व्हाइट बेलीड हेरान को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।
    • WPA स्थिति: इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल किया गया है।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ: आलोचकों का तर्क है कि जलविद्युत बाँध और अन्य अवसंरचनाएँ महत्त्वपूर्ण नदी पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचा सकती हैं, जिससे व्हाइट बेलीड हेरान जैसी प्रजातियों का निवास स्थान घट सकता है, उनके वातावरण में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है तथा मछली की संख्या कम हो सकती है।

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