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कलाई-II जलविद्युत परियोजना

  • 07 Jan 2026
  • 14 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एक विशेषज्ञ समिति ने अरुणाचल प्रदेश में 1,200 मेगावाट कलाई-II जलविद्युत परियोजना के लिये पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) की सिफारिश की है।

मुख्य बिंदु 

  • परियोजना विवरण: 1,200 मेगावाट कलाई-II जलविद्युत परियोजना लोहित नदी पर प्रस्तावित है, जिसे अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ ज़िले के हवाई गाँव में THDC इंडिया लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।
    • यह एक रन-ऑफ-रिवर (Run-of-River) प्रकार की परियोजना है, जिसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करते हुए स्वच्छ बिजली उत्पादन के लिये सीमित जल भंडारण शामिल है।
    • लोहित नदी: ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी है।
  • EIA विवाद: पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों ने EIA रिपोर्ट की आलोचना की क्योंकि इसमें गंभीर रूप से संकटग्रस्त व्हाइट बेलीड हेरान (Ardea insignis) की उपस्थिति का उल्लेख नहीं किया गया था।
  • व्हाइट बेलीड हेरान: 
    • व्हाइट बेलीड हेरान, कम व्यवधान वाले मुक्त प्रवाही नदी क्षेत्रों में रहना पसंद करता है और मुख्य रूप से तीव्र बहाव वाले स्थानों में मछली खाता है।
    • इसकी उपस्थिति लोहित नदी जलक्षेत्र में दर्ज की गई है, जिसमें कमलांग और नामदफा टाइगर रिज़र्व शामिल हैं।
    • IUCN स्थिति: व्हाइट बेलीड हेरान को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।
    • WPA स्थिति: इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल किया गया है।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ: आलोचकों का तर्क है कि जलविद्युत बाँध और अन्य अवसंरचनाएँ महत्त्वपूर्ण नदी पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचा सकती हैं, जिससे व्हाइट बेलीड हेरान जैसी प्रजातियों का निवास स्थान घट सकता है, उनके वातावरण में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है तथा मछली की संख्या कम हो सकती है।
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