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आर्थिक स्थिरीकरण कोष

  • 17 Mar 2026
  • 15 min read

स्रोत: बिज़नेस लाइन 

लोकसभा ने अनुदानों की पूरक मांगों (2025-26) के दूसरे बैच को मंज़ूरी दे दी तथा वित्त मंत्री ने आर्थिक स्थिरीकरण कोष (Economic Stabilisation Fund- ESF) की शुरुआत की है। यह ₹1 लाख करोड़ का वित्तीय सुरक्षा कवच व्यापक आर्थिक स्थिरता और अर्थव्यवस्था की दृढ़ता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया है।

  • अनुच्छेद 115 के तहत, जब विनियोग अधिनियम द्वारा किसी सेवा के लिये अधिकृत कोष अपर्याप्त सिद्ध होता है, तो अनुदान के लिये पूरक मांगें आवश्यक होती हैं। राष्ट्रपति वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले इन्हें संसद के दोनों सदनों के समक्ष अनुमोदन के लिये रखते हैं।

आर्थिक स्थिरीकरण कोष

  • परिचय: इसका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये एक 'फाइनेंशियल शॉक एब्जॉर्बर' के रूप में कार्य करना है। यह तंत्र राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों का उल्लंघन किये  बिना, वैश्विक चुनौतियों, जैसे–  पश्चिम एशिया संघर्ष, तेल की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान (उदाहरण के लिये, होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) से अर्थव्यवस्था की रक्षा करता है।
  • वित्तपोषण स्रोत: कुल शुद्ध व्यय में से 57,381.84 करोड़ रुपये पूरक मांगों के माध्यम से प्राप्त किये  गए हैं। शेष राशि की पूर्ति बचत, वसूली और विभिन्न मंत्रालयों से प्राप्त उच्चतर राशि से की गई है।
    • इस कोष का प्रबंधन वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) द्वारा प्रबंधित आरक्षित कोष के तहत किया जाएगा।
  • राजकोषीय अनुशासन: सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह आवंटन अतिरिक्त ऋण के माध्यम से नहीं किया गया है और यह 2025-26 (संशोधित अनुमान) के लिये 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्रभावित नहीं करेगा।
  • वैश्विक तुलना: ESF की वैश्विक तुलना अन्य देशों के संप्रभु धन कोषों या स्थिरीकरण कोषों से की जा सकती है। उदाहरण के लिये, नॉर्वे में तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिये ऐसा ही एक कोष है, जबकि चिली में यह तांबे की कीमतों में अचानक बदलावों के प्रबंधन के लिये कार्य करता है।

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