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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    आधुनिक उपभोक्ता वैसे तो पॉवरलूम की तरफ ज़्यादा आकर्षित हैं, परंतु हथकरघा (हैंडलूम) का आज भी विशिष्ट स्थान है। हथकरघा उद्योग का महत्त्व बतलाते हुए, इसके विकास हेतु किये जाने वाले प्रयासों पर चर्चा करें।

    07 Aug, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 3 अर्थव्यवस्था

    उत्तर :

    प्राचीन काल से ही भारतीय हथकरघा उत्पादों की पहचान उनकी दोषरहित गुणवत्ता से की जाती रही है। इनमें चंदेरी का मलमल, वाराणसी के सिल्क के बेल-बूटेदार वस्त्र, राजस्थान व ओडिशा के बंधेज की रंगाई, मछलीपटनम के छींटदार कपड़े, हैदराबाद के हिमरुस,पंजाब के खेस, मध्य प्रदश की महेश्वरी साड़ियाँ तथा वड़ोदरा की पटोला साड़ियाँ शामिल हैं।

    भारत की विशेष सांस्कृतिक पूंजी को संरक्षित करने के अलावा भी यह उद्योग विशेष महत्ता रखता है-

    • हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण भारत में कृषि के बाद सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता क्षेत्र है। यह विभिन्न समुदायों के लगभग 43 लाख लोगों को रोज़गार उपलब्ध कराता है। 
    • यह देश के कुल कपड़ा उत्पादन में लगभग 15% का योगदान कर निर्यात आय में भी सहायता करता है।
    • विश्व में हाथ से बुने हुए 95% कपड़े, भारत के ही होते हैं। इस प्रकार ये सांस्कृतिक प्रसार में भी योगदान देते हैं।
    • यह उद्योग पर्यावरण को न्यूनतम हानि पहुँचाता है।

    हथकरघा उद्योग के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता को स्वीकार करते हुए सरकार हाथ से बुने कपड़ों और बुनकरों के पुनरुत्थान के लिये प्रतिबद्ध है। सन् 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में वर्ष 2015 से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस घोषित किया गया है।

    हथकरघा उद्योग के संरक्षण तथा विकास के लिये किये जा रहे अन्य प्रयास:-

    • कच्चा माल, प्रसंस्करण, बुनावट एवं अन्य मानदंडों के लिहाज़ से उत्पादों की गुणवत्ता के समर्थन के लिये “भारत हथकरघा ब्रांड” शुरू किया गया।
    • कपड़ा मंत्रालय ने “आई वियर हैंडलूम” अभियान सोशल मीडिया पर विशेष रूप से युवाओं के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज़ करा दी।
    • क्लस्टरों द्वारा संगठित रूप देकर एवं समान सुविधा केंद्रों के निर्माण के ज़रिये बुनकरों की आय बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
    • अन्य प्रयासों में ई-कॉमर्स के ज़रिये उत्पादों को बेचने के लिये बुनकरों को प्रोत्साहित करना, हथकरघा को फैशन एवं पर्यटन से जोड़ना तथा डिज़ाइन, विकास एवं विपणन में निजी क्षेत्र को सम्मिलित करना शामिल है।

    हथकरघा उत्पादन की विकेंद्रित प्रकृति और पर्यावरण पर इसका गैर-प्रदूषणकारी प्रभाव इसे भविष्य का एक पसंदीदा क्षेत्र बनाता है।

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