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ध्यान दें:

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    भारत में संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में समुदाय आधारित संरक्षण प्रयासों की भूमिका पर चर्चा कीजिये। (150 शब्द)

    15 Feb, 2023 सामान्य अध्ययन पेपर 3 पर्यावरण

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • समुदाय आधारित संरक्षण का संक्षिप्त परिचय देते हुए अपना उत्तर प्रारंभ कीजिये।
    • संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में समुदाय आधारित संरक्षण की भूमिका पर चर्चा कीजिये।
    • तदनुसार निष्कर्ष दीजिये।

    परिचय:

    • भारत को इसकी समृद्ध जैव विविधता के लिये जाना जाता है यहाँ वन्यजीव प्रजातियों की बहुतायात है। हालाँकि भारत में कई प्रजातियों को संकटग्रस्त प्रजातियों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। भारत में संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के संदर्भ में समुदाय आधारित संरक्षण प्रयास महत्त्वपूर्ण रहे हैं।

    मुख्य भाग:

    • समुदाय आधारित संरक्षण:
      • समुदाय आधारित संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी शामिल होती है। इसमें संकटग्रस्त प्रजातियों सहित प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और संरक्षण के लिये स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना शामिल है।
      • समुदाय-आधारित संरक्षण में जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक तंत्र के प्रबंधन में स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को महत्त्व दिया जाता है।
      • इससे संबंधित विभिन्न कानून हैं जैसे:
        • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: इसके तहत सामुदायिक रिज़र्व और संरक्षण रिज़र्व को संरक्षित करने और बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।
        • राष्ट्रीय वन नीति (1999): इसके तहत वनों और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के परंपरागत अधिकारों को वैध ठहराया गया है, जिसमें कहा गया है कि वन उत्पादों से संबंधित ग्रामीण गरीबों की घरेलू आवश्यकताओं को औद्योगिक और वाणिज्यिक मांगों की तुलना में प्राथमिकता दी जानी चाहिये।
    • संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में समुदाय आधारित संरक्षण की भूमिका:
      • संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण करना एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें सरकार, गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों सहित कई हितधारक शामिल होते हैं। समुदाय आधारित संरक्षण प्रयासों ने भारत में संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    विभिन्न तरीके से समुदाय आधारित संरक्षण, भारत में संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में मदद कर रहा है:

    • संरक्षण संबंधी जागरूकता का प्रसार करना:
      • समुदाय-आधारित संरक्षण के प्रयास, स्थानीय समुदायों को संकटग्रस्त प्रजातियों के महत्त्व और उन्हें संरक्षित करने में उनकी भूमिका के बारे में शिक्षित करने में सफल रहे हैं। शिक्षण कार्यक्रमों ने वन्यजीवों के प्रति स्थानीय दृष्टिकोण को बदलने में मदद की है जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम हुआ है।
        • उदाहरण के लिये मध्य प्रदेश में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा वन्यजीव संरक्षण के महत्त्व पर स्थानीय समुदायों को शिक्षित करने के लिये "प्रकृति शिक्षा कार्यक्रम" शुरू किया गया है।
        • इस कार्यक्रम से क्षेत्र में अवैध शिकार के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमीं आई है।
    • समुदाय आधारित निगरानी:
      • समुदाय-आधारित निगरानी के तहत स्थानीय समुदायों द्वारा अपने क्षेत्र में संकटग्रस्त प्रजातियों की निगरानी में भागीदारी करना शामिल है।
        • स्थानीय समुदायों को संकटग्रस्त प्रजातियों की आबादी और व्यवहार पर डेटा एकत्र करने हेतु प्रशिक्षित करने से संरक्षण प्रयासों को बल मिलता है।
        • उदाहरण के लिये स्नो लेपर्ड ट्रस्ट द्वारा हिम तेंदुओं की संख्या की निगरानी के लिये लद्दाख, जम्मू और कश्मीर में स्थानीय समुदायों की सहायता ली जाती है।
          • यह कार्यक्रम अवैध शिकार को कम करने और प्रजातियों के संरक्षण में सुधार करने में सफल रहा है।
    • समुदाय आधारित संरक्षण रिज़र्व:
      • समुदाय-आधारित संरक्षण रिज़र्व के तहत स्थानीय समुदायों द्वारा प्रबंधित संरक्षित क्षेत्रों का विकास शामिल है।
        • ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय संकटग्रस्त प्रजातियों के प्रबंधन और संरक्षण के लिये जिम्मेदार होते हैं।
        • उदाहरण के लिये महाराष्ट्र के बोरिया-खरादी में पंचायत (स्थानीय सरकार) ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण हेतु एक समुदाय-आधारित संरक्षण रिजर्व की स्थापना की है।
          • समुदाय आधारित संरक्षण रिजर्व से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की संख्या में वृद्धि हुई है।
    • समुदाय आधारित अवैध शिकार विरोधी प्रयास:
      • अवैध शिकार भारत में संकटग्रस्त प्रजातियों के लिये प्रमुख खतरा है। समुदाय-आधारित अवैध शिकार विरोधी प्रयासों के तहत अवैध शिकार गतिविधियों की रोकथाम और रिपोर्टिंग में स्थानीय समुदाय शामिल होते हैं।
        • उदाहरण के लिये केरल में मीनांगडी वन रेंज द्वारा स्थानीय समुदायों के सहयोग से एक समुदाय आधारित अवैध शिकार विरोधी कार्यक्रम शुरू किया गया है।
          • यह अवैध शिकार को कम करने और इस क्षेत्र में संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में सुधार करने में सफल रहा है।

    निष्कर्ष:

    भारत में संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में समुदाय आधारित संरक्षण प्रयास महत्त्वपूर्ण रहे हैं। इन संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी से संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में सुधार हुआ है और मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आई है। सरकार और गैर-सरकारी संगठनों को भारत में संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा हेतु समुदाय-आधारित संरक्षण प्रयासों का समर्थन करना जारी रखना चाहिये।

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