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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    भारत में ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित चुनौतियों के समाधान हेतु विनियमन की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए इन चुनौतियों से निपटने हेतु संभावित उपाय बताइए। (250 शब्द)

    04 Jan, 2023 सामान्य अध्ययन पेपर 3 विज्ञान-प्रौद्योगिकी

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण

    • ऑनलाइन गेमिंग की संक्षिप्त व्याख्या करते हुए अपना उत्तर प्रारंभ कीजिये और भारत के संदर्भ में इससे संबंधित विशिष्ट डेटा तथ्यों को प्रस्तुत कीजिये।
    • ऑनलाइन गेमिंग की चुनौतियों पर चर्चा कीजिये।
    • इन चुनौतियों का समाधान करने के लिये संभावित दृष्टिकोणों पर चर्चा कीजिये।
    • तदनुसार निष्कर्ष लिखिये।

    परिचय

    • ऑनलाइन गेमिंग का मतलब अन्य खिलाड़ियों के साथ इंटरनेट पर वीडियो गेम खेलना है। यह एक कंप्यूटर या गेमिंग कंसोल या इंटरनेट से जुड़े स्मार्टफोन के माध्यम से किया जा सकता है।
      • यह खिलाड़ियों को एक दूसरे के साथ बातचीत करने और उनके स्थान की परवाह किये बिना वास्तविक समय में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देता है।
      • यह हाल के वर्षों में उच्च गति के इंटरनेट कनेक्शन के प्रसार और विकल्प के तौर पर खेलों की एक विस्तृत श्रृंखला की उपलब्धता के साथ यह तेज़ी से लोकप्रिय हो गया है।
    • देश में यह उद्योग वर्ष 2017-2020 के बीच 38% की CAGR से बढ़ा, जबकि चीन में 8% और अमेरिका में 10% था।
    • 15% की CAGR वृद्धि के साथ वर्ष 2024 तक इसका राजस्व बढ़कर 153 बिलियन रुपए होने की संभावना है।

    मुख्य भाग

    • भारत में ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित कई चुनौतियाँ हैं जिन्हें प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिये विनियमन की आवश्यकता हो सकती है। इनमें से कुछ चुनौतियों में शामिल हैं:
      • समस्याग्रस्त गेमिंग व्यवहार: ऑनलाइन गेमिंग की लत लग सकती है और समस्याग्रस्त गेमिंग व्यवहार हो सकता है, जो किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह विशेष रूप से उन बच्चों और युवाओं के लिये चिंता का विषय हो सकता है जो व्यसनी व्यवहार विकसित करने के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
      • साइबर सुरक्षा जोखिम: ऑनलाइन गेमिंग उपयोगकर्ताओं को हैकिंग, फ़िशिंग और पहचान की चोरी जैसे साइबर सुरक्षा जोखिमों में भी डाल सकता है।
      • ठगी और धोखाधड़ी: ऑनलाइन गेमिंग में ठगी और धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, जो खेलों की निष्पक्षता और अखंडता को कमजोर कर सकते हैं।
      • इन-गेम खरीदारी: कई ऑनलाइन गेम राजस्व के स्रोत के रूप में इन-गेम खरीदारी पर निर्भर करते हैं। हालाँकि इन-गेम खरीदारी से संबंधित कपटपूर्ण या हिंसक व्यवहार के उदाहरण सामने आए हैं, जो उपभोक्ताओं के लिये हानिकारक हो सकते हैं।
    • सरकारी पहलें :
      • ऑनलाइन गेमिंग के लिये नियमों का मसौदा: प्रस्तावित नियमों को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 में संशोधन के रूप में पेश किया गया है।
    • स्व-नियामक निकाय:
      • ऑनलाइन खेलों को एक स्व-नियामक निकाय के साथ पंजीकृत करना होगा और निकाय द्वारा मात्र स्वीकृत खेलों को ही भारत में कानूनी रूप से संचालित करने की अनुमति प्राप्त होगी।
        • स्व-नियामक निकाय में ऑनलाइन गेमिंग, सार्वजनिक नीति, सूचना प्रौद्योगिकी, मनोविज्ञान और चिकित्सा सहित विविध क्षेत्रों के पाँच सदस्यों का एक निदेशक मंडल होगा।
    • रैंडम नंबर जनरेशन सर्टिफिकेट:
      • गेमिंग कंपनियों को एक रैंडम नंबर जनरेशन सर्टिफिकेट भी सुरक्षित करना होगा, जो आमतौर पर उन प्लेटफॉर्म द्वारा उपयोग किया जाता है जो यह सुनिश्चित करने के लिये कार्ड गेम की पेशकश करते हैं कि गेम आउटपुट सांख्यिकीय रूप से यादृच्छिक और अप्रत्याशित हैं।
      • उन्हें एक प्रतिष्ठित प्रमाणित निकाय से "नो बॉट सर्टिफिकेट" भी प्राप्त करना होगा।
    • सट्टेबाज़ी पर प्रतिबंध:
      • ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को खेलों के परिणाम पर सट्टेबाज़ी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
    • इन चुनौतियों से निपटने के लिये कई संभावित दृष्टिकोण हैं:
      • आयु निर्धारण तंत्र: प्रत्येक खेल को एक अच्छी तरह से स्थापित आयु- निर्धारण तंत्र का पालन करना चाहिये और नाबालिगों को अपने माता-पिता की सहमति से ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिये, ओटीपी सत्यापन संभावित रूप से इसका समाधान कर सकता है।
      • माता-पिता का नियंत्रण: माता-पिता का नियंत्रण प्रदान करने का एक और तरीका है जो माता-पिता को अपने बच्चों द्वारा ऑनलाइन गेम खेलने और कुछ खेलों तक पहुंच को प्रतिबंधित करने की सीमा निर्धारित करने की अनुमति देता है।
      • शिक्षा और जागरूकता: ऑनलाइन गेमिंग के संभावित जोखिमों और चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने से व्यक्तियों को उनकी गेमिंग आदतों के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
      • शिकायत निवारण: गेमिंग कंपनियों को प्रतिभागियों की गुमनामी को दूर करना चाहिये और एक मज़बूत शिकायत प्रबंधन तंत्र का निर्माण करना चाहिये।
      • सरकार और गेमिंग कंपनियों के बीच सहयोग: गेमिंग कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर अवैध गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन को रोकने के लिये गेमर्स को शिक्षित करने तथा केवाईसी करने एवं उपयोगकर्त्ता प्रमाणीकरण आदि जैसी सर्वोत्तम प्रक्रियाओं द्वाराा उत्तरदायी गेमिंग को बढ़ावा देने के लिये सरकार के साथ काम करना चाहिये।

    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर सरकार और अन्य हितधारकों के लिये यह महत्त्वपूर्ण है कि वे ऑनलाइन गेमिंग के संभावित जोखिमों और लाभों पर सावधानी से विचार करें तथा विनियमन के लिये एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएँ जो खिलाड़ियों की सुरक्षा एवं भलाई सुनिश्चित करने में मदद करता है और साथ ही इन उद्योगों को फलने-फूलने देता है।

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