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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    ऊर्जा की बढ़ती मांग और भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति के आलोक में क्या जैव-ऊर्जा से ऊर्जा के गैर-नवीकरणीय स्रोत को स्थानांतरित किया जा सकता है और इससे भारत की ऊर्जा आवश्यकताएँ पूरी हो सकती हैं? चर्चा कीजिये। (250 शब्द)

    14 Dec, 2022 सामान्य अध्ययन पेपर 3 पर्यावरण

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण

    • भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिति का संक्षेप में वर्णन करते हुए अपने उत्तर की शुरुआत कीजिये।
    • भारत में ऊर्जा के गैर-नवीकरणीय स्रोत के स्थान पर जैव-ऊर्जा के महत्त्व पर चर्चा कीजिये।
    • तदनुसार निष्कर्ष निकालिये।

    परिचय

    • जैव उर्जा (बायोएनेर्जी), ऊर्जा की हमारी मांग को पूरा करने में मदद के लिये उपलब्ध कई विविध संसाधनों में से एक है। यह नवीकरणीय ऊर्जा का एक रूप है जो जीवित जैविक सामग्री से प्राप्त होता है जिसे बायोमास के रूप में जाना जाता है, जिसका उपयोग परिवहन ईंधन, गर्मी, बिजली और उत्पादों के उत्पादन के लिये किया जा सकता है।

    मुख्य भाग

    • क्षमता निर्माण:
      • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा प्रायोजित एक हालिया अध्ययन के अनुसार भारत में बायोमास की वर्तमान उपलब्धता लगभग 750 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष अनुमानित है। अध्ययन में लगभग 230 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की अनुमानित अधिशेष बायोमास उपलब्धता का संकेत दिया गया है, जिसमें लगभग 28 GW की क्षमता के अनुरूप कृषि अवशेषों को शामिल किया गया है।
      • इसके अलावा देश की 550 चीनी मिलों में खोई-आधारित सह-उत्पादन के माध्यम से लगभग 14 गीगावॉट अतिरिक्त बिजली पैदा की जा सकती है, अगर ये चीनी मिलें अपने द्वारा उत्पादित खोई से बिजली निकालने के लिये तकनीकी और आर्थिक रूप से इष्टतम स्तर के सह-उत्पादन को अपनाती हैं।
    • जैव ऊर्जा के लाभ:
      • प्रचुर मात्रा में और नवीकरणीय जैव उर्जा अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आर्थिक रूप से मज़बूत भविष्य में योगदान कर सकती है:
        • घरेलू स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति
        • विदेशी तेल पर भारत की निर्भरता कम करना
        • रोज़गार में वृद्धि करना
        • ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को पुनर्जीवित करना
    • जैव ऊर्जा का महत्त्व:
      • प्रदूषण मुक्त शहर:
        • बायोगैस समाधान हमारे शहरों को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद कर सकते है।
        • लैंडफिल से ज़हरीले पदार्थों का निक्षालन भूजल को दूषित करता है।
        • कार्बनिक पदार्थ के अपघटन से पर्यावरण में भारी मात्रा में मीथेन निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि होती है क्योंकि मीथेन एक बहुत ही शक्तिशाली ग्रीन हाउस गैस है।
      • जैविक अपशिष्ट का प्रबंधन:
        • बड़े पैमाने पर म्युनिसिपल बायोगैस सिस्टम (Municipal Biogas System) स्थापित कर शहरों में जैविक कचरे का कुशलतापूर्वक निपटान करने में मदद मिल सकती है ताकि कचरे के अत्यधिक बोझ से उत्पन्न पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना किया जा सके।
        • शहरों को स्वच्छ और स्वस्थ रखते हुए जैव उर्वरकों के साथ स्वच्छ एवं हरित ईंधन का निर्माण करने हेतु नगर निगम के कचरे के लिये इन संयंत्रों का उपयोग किया जा सकता है।
      • महिलाओं के लिये मददगार:
        • बायोगैस का उपयोग करना महिलाओं के स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित हो सकता है क्योंकि वे हानिकारक धुएंँ और प्रदूषण के संपर्क में आने से बच जाएंगी।
        • घर के अंदर होने वाले प्रदूषण के कारण महिला सदस्य अत्यधिक प्रभावित होती हैं क्योंकि उन्हें अधिक समय तक घर में रहकर कार्य करना होता है।
      • ऊर्जा निर्भरता का विकल्प:
        • बायोगैस का प्रयोग ग्रामीण और कृषि समुदाय जो कि अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिये मुख्य रूप से लकड़ी, गोबर, लकड़ी का कोयला, कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधन के दहन पर निर्भर हैं, की ऊर्जा निर्भरता को बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
        • गैर-नवीकरणीय स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता देश में लंबे समय से चली आ रही ऊर्जा समस्याओं का प्रमुख कारण है।
    • चुनौतियाँ:
      • संचरण हानि: ऊष्मा और संचरण जैसे बाहरी स्रोतों से होने वाले नुकसान के कारण संयंत्रों की क्षमता हमेशा ग्रिड के लिये वास्तविक बिजली उत्पादन में परिवर्तित नहीं हो सकती है।
      • मौसमी बदलाव: पवन और सौर ऊर्जा अनिश्चित संसाधन हैं; उदाहरण के लिये घरेलू बिजली का उपयोग रात में बढ़ जाता है, इस तथ्य के बावजूद कि दिन के दौरान सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में होती है। मौसमी अंतर भी हैं। मानसून के दौरान पवन ऊर्जा प्रचुर मात्रा में होती है जबकि सौर ऊर्जा दुर्लभ होती है।
      • स्थान आधारित मुद्दा: क्योंकि तटीय क्षेत्रों में अधिक हवा का अनुभव होता है, वे उस पवन ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने में सक्षम होते हैं।
    • जैव-ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु सरकार की पहल:
      • SATAT योजना: भारत सरकार और नीति आयोग ने हरित ईंधन के उपयोग में तेज़ी लाने एवं LNG, हाइड्रोजन तथा मेथनॉल को बढ़ावा देने के लिये रोडमैप तैयार किया है।
      • प्रधानमंत्री-किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान: पीएम- कुसुम का लक्ष्य 2022 तक 25,750 मेगावाट की सौर ऊर्जा क्षमताओं का उपयोग करके किसानों को वित्तीय और जल सुरक्षा प्रदान करना है।
        • पानी के पंपों का सोलराइजेशन उपभोक्ता के दरवाजे पर वितरित बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम है।
      • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय अपनी वेबसाइट पर अक्षय ऊर्जा पोर्टल और इंडिया रिन्यूएबल आइडिया एक्सचेंज (IRIX) पोर्टल भी होस्ट करता है।
        • IRIX एक ऐसा मंच है जो ऊर्जा के प्रति जागरूक भारतीयों और वैश्विक समुदाय के बीच विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।

    निष्कर्ष

    निकट भविष्य में ऊर्जा के गैर-नवीकरणीय स्रोत को तुरंत प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है, लेकिन विभिन्न सरकारी पहलों की मदद से दीर्घकाल में भारत संभावित रूप से गैर-नवीकरणीय ऊर्जा को नवीकरणीय ऊर्जा में बदला जा सकता है।

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