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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    'साम्यवाद को बचाने के उद्देश्य से शीतयुद्ध के दौर में खड़ी की गई बर्लिन की दीवार को जनमानस की जागरूकता ने 28 वर्षों के शोषण के उपरांत गिरने को विवश कर दिया।' विश्लेषण करें।

    24 Jun, 2021 रिवीज़न टेस्ट्स इतिहास

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण

    • भूमिका
    • जर्मनी का विभाजन, साम्यवाद का प्रभाव
    • बर्लिन की दीवार का संबंध पूंजीवाद तथा साम्यवाद से किस प्रकार जुड़ा हुआ है?
    • निष्कर्ष

    पूर्वी यूरोप में साम्यवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के परिणामस्वरूप बर्लिन की दीवार का निर्माण किया गया था जो पूर्वी तथा पश्चिमी जर्मनी को एक दूसरे से पृथक करती थी। इसे 1980 के दशक में गिरा दिया गया जिसे मौन रूप में साम्यवाद के पतन के प्रतीक के रूप में जाना गया। ऐसा माना जाता है कि बर्लिन की दीवार का पतन जर्मनी के एकीकरण के साथ-साथ जर्मनी के लोगों की विचारधाराओं को भी एकीकृत करता है।

    द्वितीय विश्वयुद्ध में नाजी जर्मनी की हार के पश्चात् जर्मनी पूर्व तथा पश्चिम दो भागों में विभाजित हो गया। पश्चिमी जर्मनी में पश्चिमी पूंजीवादी राष्ट्रों की सहयोगी सरकार थी, जबकि पूर्वी जर्मनी पर सोवियत संघ का प्रभाव था। पश्चिमी जर्मनी प्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार, पूंजीवादी आर्थिक प्रणाली, स्वतंत्र चर्च तथा श्रमिक संगठनों की व्यवस्था ने विकास की राह मज़बूती प्रदान की थी तो वहीं दूसरी तरफ, पूर्वी जर्मनी पर मार्क्स-लेनिन के प्रभाव से युक्त साम्यवादी तानाशाही सरकार स्थापित थी। कमज़ोर आर्थिक स्थिति तथा नकारात्मक राजनैतिक परिस्थितियों के कारण पूर्वी जर्मनी से सैकड़ों श्रमिक तथा व्यवसायी पश्चिमी जर्मनी की तरफ आय अर्जन हेतु जाते थे।

    बर्लिन की दीवार का निर्माण साम्यवाद के लिये अत्यधिक बुरा सिद्ध हुआ। कालांतर में यह पूर्वी व पश्चिमी जर्मनी के लोगों के लिये यह दीवार समाजवादी शोषण का प्रतीक बन गई।

    1980 का दशक जनमानस को चेतना की जागृति का काल था जब पूर्वी यूरोप में साम्यवादी सत्ता के विरुद्ध जनता ने व्यापक प्रदर्शन किये। इसी दौर में 9 नवंबर, 1984 का दिन बर्लिन की दीवार के ढ़हने के लिये जाना जाता है। इसी के साथ ही पूर्वी जर्मनी की सोवियत सरकार का पतन हो गया तथा जर्मनी के पुन: एकीकरण के साथ ही जर्मन राष्ट्र-राज्य की पुनर्स्थापना संभव हो सकी।

    जर्मनी के विभाजन के उपरांत भी लोगों का आवागमन न रुकने से पूर्वी जर्मनी को आर्थिक व राजनैतिक हानि का सामना करना पड़ रहा था। लगभग 25 लाख लोगों ने पूर्वी जर्मनी से पश्चिमी जर्मनी की तरफ प्रवास किया, जिसका नकारात्मक प्रभाव पूर्वी जर्मनी की अर्थव्यवस्था पर पड़ा। इन परिस्थितियों में साम्यवादी सरकार ने 1961 में बर्लिन की दीवार का निर्माण करने का आदेश दिया। बर्लिन की दीवार के निर्माण का मुख्य उद्देश्य पूर्वी जर्मनी में बाहर से आने वालों को रोकना नहीं अपितु भीतर से बाहर जाने वालों को रोकना था।

    उल्लेखनीय है कि साम्यवादी सरकार की आय की समानता, मुफ्त जन-कल्याण, पूर्ण रोज़गार जैसे आदर्शों के स्थान पर पूंजीवादी विचारधारा में विद्यमान उच्च स्तरीय विषमता, बेरोज़गारी तथा सामाजिक जोखिम को अपनाने का मुख्य कारण जनता को मिलने वाली आज़ादी थी। पूंजीवादी विचारधारा की स्वतंत्रता की अवधारणा ने साम्यवाद के पतन में अहम भूमिका निभाई।

    निष्कर्षतः साम्यवाद को बचाने के उद्देश्य से शीतयुद्ध के दौर में खड़ी की गई दीवार को जनमानस की जागरूकता ने 28 वर्षों के शोषण के उपरांत गिरने को विवश कर दिया, जिसका परिणाम जर्मनी के साथ-साथ पूर्वी यूरोप से साम्यवाद के पतन के रूप में देखा गया।

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