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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • स्पष्ट कीजिये कि इंग्लैंड औद्योगिक क्रांति का अग्रदूत किस कारण बना था? साथ ही इसके सामाजिक प्रभावों पर भी प्रकाश डालिये?

    02 Jun, 2021 वैकल्पिक विषय इतिहास

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण

    • भूमिका
    • इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति
    • सामाजिक प्रभाव
    • निष्कर्ष

    18वीं सदी के उत्तरार्द्ध से लेकर 19वीं सदी के पूवार्द्ध तक ब्रिटेन में होने वाले आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तनों को 'औद्योगिक क्रांति' के नाम से जाना जाता है। इस परिवर्तन ने मानव जीवन को अत्यधिक तीव्र एवं गहरे रूप से प्रभावित किया था।

    निःसन्देह हॉलैंड, फ्रांस, जर्मनी जैसे इंग्लैड से भी ज्यादा संपन्न देशों की यूरोप में उपस्थित के बावजूद इंग्लैंड औद्योगिक क्रांति का अग्रदूत बना। जहाँ हॉलैंड भौगोलिक खोजों एवं व्यापार-वाणिज्य में अग्रणी था वहीं फ्रांस का उद्योग तथा यहां की जनसंख्या इंग्लैंड से तीगुनी थी। इसके बावजूद क्रांति की शुरूआत इंग्लैंड से हुयी इसके पीछे निम्नलिखित कारण थे-

    • अन्य यूरोपीय देशों की अपेक्षा इंग्लैंड में राजनीतिक स्थायित्व अधिक था। जहां कि जनता को स्वच्छंद वातावरण के साथ-साथ राजनीतिक अधिकार भी दिये गये थे जिससे व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि हुयी जबकि इस समय यूरोप के अन्य देशों में सामंती व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक आराजकता व्याप्त थी।
    • इंग्लैंड चारों ओर समुद्र से घिरा हुआ देश है इससे व्यापारिक गतिविधियों में सुविधा प्राप्त हुयी अर्थात् वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने में आसानी हुयी। साथ ही आंतरिक एवं बाह्य परिवहन ने औद्योगिक क्रांति के लिये उत्प्रेरक का कार्य किया। समुद्र से घिरे होने के कारण यहां की जलवायु नम थी जो कपड़ा उद्योग के लिये उपयुक्त था।
    • ब्रिटेन ने एक शक्तिशाली जहाजरानी का विकास किया। समुद्र से घिरे होने के कारण अपने नौसैनिक बल पर विशाल औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित करने में सफल रहा। यूरोप के अन्य देशों की स्थिति ब्रिटेन जैसी नहीं थी। अतः युद्ध के समय भी ब्रिटेन का व्यापार जारी रहा।
    • कोयला एवं लोहा खनिज औद्योगिक विकास के लिये आधारभूत तत्व माने जाते हैं जो इंग्लैंड में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था। अतः इसने औद्योगिक क्रांति को गति प्रदान की।
    • कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकी कृषि यंत्र एवं विधियों से कृषि उत्पादन क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आया। इससे कृषि भू-स्वामी को अत्यधिक लाभ मिला इस अधिशेष पूंजी का उपयोग भू-स्वामियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश कर के किया। हालांकि इस कृषि क्रांति ने खेतिहर मजदूर को बेरोजगार बना दिया। फलतः ये मज़दूर रोज़गार की तलाश में शहर की ओर प्रवास करने लगे जिससे उद्योगों में कम मज़दूरी पर श्रमिक कार्य करने के लिये तैयार हुये।
    • इंग्लैंड में जनसंख्या वृद्धि के कारण वस्तुओं की मांग बढ़ी जिससे कीमतों में भी उछाल आया फलतः उत्पादन में और वृद्धि की गयी।
    • कच्चे माल की प्राप्ति एवं तैयार माल की बिक्री के लिये उपनिवेश एक अच्छा बाजार साबित हुआ। विस्तृत बाजार ने पूंजीपतियों को उद्योगों में पूंजी निवेश के लिये प्रोत्साहित किया जिससे औद्योगिक क्रांति की संभावनाओं को बल मिला।
    • किसी भी औद्योगिक विकास के लिये पूंजी एक आवश्यक कारक है। चूँकि इंग्लैंड ने भारत अमेरिका तथा अन्य उपनिवेशों से खूब पूंजी का संचय किया था तथा व्यावसायिक क्रांति का सर्वाधिक लाभ इंग्लैंड को ही मिला था। साथ ही व्यापारिक लाभ इंग्लैंड को ही मिला था। व्यापारिक बैंको ने भी पूंजी उपलब्ध कराने में मदद की थी। जहां अन्य यूरोपीय देशों में पूंजीपति वर्ग में अपनी पूंजी का प्रयोग भूमि खरीदने, भवन निर्माण एवं अपने शानों-शौकत में खर्च किया वहीं वहीं इंग्लैंड के पूंजीपति ने अपने पूंजी का प्रयोग उद्योगों में निवेश के रूप में किया।
    • इंग्लैंड में अन्य यूरोपीय देशों की अपेक्षा वैज्ञानिक वातावरण एवं वैज्ञानिक विचारों का प्रभाव सर्वप्रथम पड़ा। जहां कपड़ा बुनने के लिये फलाइंग शटल तीव्र गति से सूत काटने के लिये ‘स्पिनिंग जेनी का अविष्कार हुआ आगे चलकर वस्त्रउद्योग में ‘पावरलूम’ का विकास ने बढ़िया किस्म के कपड़ों को उत्पादित करने में मदद की।1815 में हम्फ्रे डेवी द्वारा सेफटी लैप की खोज ने खानों के भीतर काम करने में सुगम बनाया।

    वहीं कच्चे माल को कारखानों तक लाने तथा उत्पादित/तैयार माल को बाजार तक ले जाने के लिये परिवहन एवं सड़कों का निर्माण हुआ। वहां संचार साधनों में तारयंत्र का अविष्कार तथा ग्राहमबेल के टेलीफोन के अविष्कार ने संचार व्यवस्था में क्रांति ला दी। इसके साथ ही मारकोनी द्वारा ‘बेतार के तार’ तथा रेडियो के अविष्कार होने से सूचनाओं के आदान-प्रदान में आसानी हुयी।

    इस प्रकार उपर्युक्त सभी कारकों ने मिलकर इंग्लैंड को औद्योगिक क्रांति का अग्रदूत बना दिया।

    इसके सामाजिक प्रभावों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-

    • औद्योगिक क्रांति के कारण जनसंख्या में तीव्र वृद्धि- कृषि क्रांति के कारण अनाजों का अत्याधिक उत्पादन होने लगा तथा इसलिये बेहतर पोषण एवं उन्नत स्वास्थ्य व्यवस्था ने जनसंख्या वृद्धि दर को बढ़ावा दिया क्योंकि शिशु मृत्यु दर कम हुयी।
    • औद्योगिक क्रांति के कारण भावनात्मक मानवीय संबंधों का स्थान आर्थिक संबंधों ने ले लिया। अब श्रमिक तथा मलिक के बीच अजनबी सा संबंध बन गया। अब मानव-मानव का संबंध टूटकर मशीन से जुुड़ गया।
    • इस क्रांति के परिणाम स्वरूप सुयंक्त परिवार टूटने लगा क्योंकि मानव को कारखानों में काम करने हेतु दूर (शहर) जाना पड़ता था जहाँ पर परिवार के रहने की सुविधा नहीं थी। अतः इससे एकल परिवार को बढ़ावा मिला।
    • शहरों में जनसंख्या वृद्धि के कारण अवास जल, भोजन स्वच्छ वायु आदि की आवश्यकता बढ़ी परंतु जगह के अभाव में लोग उद्योगों के आस-पास कच्ची बस्तियों का निर्माण कर रहने लगे जिससे गंदगी बढ़ी इसके कारण मानवीय स्वास्थ्य प्रभावित हुआ तथा महामारी एवं भयानक बीमारियों का सामना करना पड़ा।
    • मानवीय मूल्यों में भी गिरावट आने लगी लोगों में परस्पर सहयोग की भावना कम हुयी। लोगों ने अपने थकान मिटाने के लिये नशे का सेवन करने लगे।
    • बाल श्रम को बढ़ावा मिला।
    • परंपरागत शिक्षा पद्धति की जगह रोजगारपरक तकनीकी एवं प्रबंधकीय शिक्षा पर जोर दिया जाने लगा।
    • औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप अधिक-से-अधिक कामगारों की आवश्यकता पड़ी फलतः अब स्त्रियाँ भी कार्य में लग गयी परंतु आगे चलकर इनके द्वारा अपने अधिकारों की मांग की जाने लगी।

    अतः उपर्युक्त से स्पष्ट है कि औद्योगिक क्रांति के लिये ब्रिटेन में अनुकूल परिस्थितियां विद्यमान थी। जिसके कारण इंग्लैंड औद्योगिक क्रांति का अग्रदूत बना।

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