हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • हिंदी निबंध साहित्य का विषयगत वैविध्य भारतीय संस्कृति की बहुविध विशेषताओं को कैसे शब्दबद्ध कर रहा है? विवेचना कीजिये।

    09 Jan, 2021 वैकल्पिक विषय हिंदी साहित्य

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • भूमिका
    • हिंदी निबंध साहित्य के विषयों में भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ
    • निष्कर्ष

    हिंदी निबंध की शुरुआत 19वीं सदी के उत्तरार्ध से मानी जाती है। निबंध की आरंभिक परंपरा में भारतेंदु युग के लेखकों का विशेष महत्त्व है क्योंकि उन्होंने विषय शैली और भाषा तीनों स्तरों पर निबंधों में नये प्रयोग किये किंतु निबंधों को प्रौढ़ रूप द्विवेदी युग में ही प्राप्त हुआ। आचार्य रामचंद्र शुक्ल विदा के केंद्र माने जाते हैं।

    भारतेंदु हरिश्चंद्र साहित्य में युग प्रवर्तक माने जाते हैं। उन्होंने इतिहास पुराण, धर्म, समाज-सुधार, जीवनी, यात्रवर्णन आदि विषयों पर निबंध लिखें। ‘भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है’, और ‘जातीय संगीत’ में राष्ट्र के प्रति उनकी गहरी निष्ठा व्यक्त होती है। बालकृष्ण भट्ट ने विचार प्रधान निबंध के साथ-साथ सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक नैतिक आदि विषयों पर लिखा, जिसमें भारतीय संस्कृति की कई विशेषताओं के दर्शन होते हैं ‘आँसू’, ‘चारुचरित्र’, ‘आत्मनिर्भरता’ आदि इनके प्रमुख निबंध हैं।

    प्रतापनारायण मिश्र के निबंधों की सबसे बड़ी विशेषता रोचकता, जीवंतता एवं लालित्य है, इनके विषयों के वैविध्य में सामाजिक तत्त्वों का समावेशन है। ‘टैक्स’, ‘स्त्री’, ‘जुआ’, ‘देसी कपड़ा’, आदि इनकी प्रमुख रचनाएं हैं।

    द्विवेदी युग के प्रमुख निबंधकार विचारात्मक लेखन करते रहे, सरदार पूर्ण सिंह के निबंध विषय-वस्तु के धरातल पर भावनात्मक हैं। इस युग के निबंधों में विषयों की विविधता, विचारों की गंभीरता, भाषा की सशक्त स्वच्छता अधिक मिलती है।

    शुक्ल युग के निबंधकारों में देशभक्ति और राष्ट्र प्रेम की भावनाओं के साथ व्यापक मानवीय दृष्टिकोण भी रहा है। शुक्ल जी ने प्रायः विचारपूर्ण विषयों को ही निबंध का विषय बनाया है। ‘श्रद्धा और भक्ति’, ‘उत्साह’, ‘कविता क्या है’ आदि शुक्ल जी के महत्त्वपूर्ण निबंध हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद व्यंग्य निबंध के नये युग की शुरुआत हुई। यह निबंध प्रायः समसामयिक विषयों पर लिखे गए हैं। डॉ. नामवर सिंह का ‘बकलम खुद’ इस दृष्टि से उल्लेखनीय रचना है।

    ललित शैली में सामाजिक यथार्थ का सजीव रेखांकन करने में कुबेरनाथ राय का महत्त्वपूर्ण स्थान है। सांस्कृतिक तत्त्वों के समावेशन की दृष्टि से परसाई का ‘सदाचार का ताबीज’, ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’, ‘शरद जोशी’ की ‘परिक्रमा’, ‘यथासंभव’,  ‘रवींद्रनाथ त्यागी’ की निबंध रचना– ‘मल्लीनाथ की परंपरा’ एवं ‘गणतंत्र दिवस की शोभायात्रा’ दृष्टण्य हैं।

    अंततः कहा जा सकता है कि हिंदी निबंध साहित्य का विषयगत वैविध्य भारतीय संस्कृति की बहुविध विशेषताओं को शब्दबद्ध कर रहा है।

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