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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार,वर्ष 2050 तक भारत की आधी आबादी महानगरों व शहरों में निवास करने लगेगी। शहरीकरण से आप क्या समझते हैं? बढ़ते शहरीकरण के कारणों का विश्लेषण करें।

    05 Aug, 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • शहरीकरण

    • बढ़ते शहरीकरण के कारण

    • निष्कर्ष

    वर्तमान में दुनिया की आधी आबादी शहरों में रह रही है।

    संयुक्त राष्ट्र संघतथा ऑक्सफोर्ड इकॉनोमिक के अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2019 से लेकर वर्ष 2035 के बीच सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले सभी शीर्ष दस शहर भारत के ही होंगे। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में 53 ऐसे शहर हैं जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। इसके अलावा देश की राजधानी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बंगलूरू और हैदराबाद जैसे महानगर हैं जिनकी आबादी लगातार बढ़ रही है। लोग बेहतर भविष्य की तलाश में यहाँ पहुँचते और बसते रहते हैं।

    शहरी क्षेत्रों के भौतिक विस्तार जैसे क्षेत्रफल, जनसंख्या जैसे कारकों का विस्तार शहरीकरण कहलाता है। शहरीकरण भारत समेत पूरी दुनिया में होने वाला एक वैश्विक परिवर्तन है। संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक़ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का शहरों में जाकर रहना और वहाँ काम करना भी 'शहरीकरण' है।

    ‘नवीन भारत '’ पहल को आगे बढ़ाने की दिशा में शहरी बुनियादी ढाँचों में सुधार के लिये शहरीकरण के प्रति समग्र दृष्टिकोण अपनाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

    शहरी क्षेत्र के मानक के तौर पर यह माना जाता है कि भारतीय समाज में किसी क्षेत्र को शहरी क्षेत्र माने जाने के लिये आवश्यक है कि किसी मानव बस्ती की आबादी में 5000 या इससे अधिक व्यक्ति निवास करते हों। इस मानव आबादी में कम से कम 75% लोग गैर-कृषि व्यवसाय में संलग्न हों।

    इसके अलावा कुछ अन्य विशेषताएँ मसलन उद्योग, बड़ी आवासी बस्तियाँ, बिजली और सार्वजनिक परिवहन जैसी व्यवस्था को शहर की परिभाषा के अंतर्गत माना जाता है।

    संयुक्त राष्ट्र की एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में विश्व की आधी आबादी शहरों में रहने लगी है और वर्ष 2050 तक भारत की आधी आबादी महानगरों और शहरों में रहने लगेगी।

    भारत में शहरीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर भी तब तक कुल आबादी का 70% हिस्सा शहरों में निवास करने लगेगा।

    बढ़ते शहरीकरण का कारण

    • शहरीकरण के बढ़ने का एक प्रमुख कारण बेरोज़गारी है। शहरों में आने वाले लोगों में अधिक संख्या नौकरी की तलाश करने वालों की है, न कि बेहतर नौकरी पाने वालों की तथा बाहर से आने वालों में बेरोज़गारी की दर अपेक्षाकृत कम है।
    • गाँव से शहरों की ओर पलायन का मुख्य कारण वेतन-दर तो है ही इसके अलावा दो अन्य प्रमुख कारण है- जोत की कम भूमि और परिवार का बड़ा आकार, शहरी प्रवासन के लिये जाति-प्रथा भी एक महत्त्वपूर्ण कारक है।
    • द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामस्वरूप शहरी क्षेत्रों में तीव्र गति से सरकारी सेवाओं में विस्तार हुआ, जो गाँव से शहरों की ओर प्रवासन में एक प्रमुख उत्प्रेरक बना।
    • औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरुप शहरी क्षेत्रों में भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि हुई।
    • शहरी क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी सुविधाएँ जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन की सुगम व्यवस्था आदि।
    • कृषि में होने वाले नुकसान की वज़ह से लोग कृषि छोड़कर रोज़गार की तलाश में शहर आते हैं। कृषि मंत्रालय के मुताबिक़ खेती पर निर्भर लोगों में से 40 फीसदी लोग ऐसे हैं जिनको अगर विकल्प मिले तो वे तुरंत खेती छोड़ देंगे। क्योंकि खेती करने में धन की लागत बढ़ती जा रही है।
    • वर्ष 1990 के बाद निज़ी क्षेत्र का विकास हुआ। जिससे बड़े कारखाने व फ़ैक्टरियों का विकास शहरों तथा महानगरों में ही हुआ।
    • ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में भारत के आर्थिक विकास के लिये शहरीकरण को लक्ष्य बनाया गया था।

    निष्कर्षतः शहरी क्षेत्रों का सतत, संतुलित एवं समेकित विकास सरकार की मुख्य प्राथमिकता एवं शहरी विकास का एक केंद्रीय विषय है। जिस तरीके से देश में ‘शहरीकरण’ की प्रक्रिया का प्रबंधन होगा, उसी से यह निर्धारित होगा कि किस सीमा तक शहरी अवस्थांतर का लाभ उठाया जा सकता हैं।

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