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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • महासागरीय जल की लवणता को नियंत्रित करने वाले कारकों की संक्षेप में चर्चा कीजिये।

    12 Jun, 2018 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भूगोल

    उत्तर :

    प्रश्न-विच्छेद

    • महासागरीय जल की लवणता को नियंत्रित करने वाले कारकों को संक्षेप में बताना है।

    हल करने का दृष्टिकोण

    • प्रभावी भमिका लिखते हुए लवणता का अर्थ स्पष्ट करें तथा महासागरों में लवणता की चर्चा करें।
    • तार्किक तथा संतुलित विषय-वस्तु में लवणता को नियंत्रित करने वाले कारकों को बताएँ।

    समुद्र के प्रति हजार ग्राम जल में विभिन्न प्रकार के लवणों की जितनी ग्राम मात्र पाई जाती है, उसे ही लवणता की संज्ञा प्रदान की जाती है। महासागरीय जल की लवणता उसमें घोल के रूप में पाए जाने वाले सभी प्रकार के लवणों के योग का द्योतक होती है। समुद्र वैज्ञानिक लवणता को प्रतिशत (%) में न व्यक्त करके प्रति हजार (%०) में प्रकट करते हैं।

    महासागरों के पृष्ठीय जल की लवणता में सर्वत्र समानता नहीं पाई जाती। इसके लिये निम्नलिखित कारक उत्तरदायी होते हैं:

    • वाष्पीकरणः वाष्पीकरण जितना अधिक होगा, लवणता की मात्रा में उतनी ही वृद्धि होगी। कर्क और मकर रेखाओं के निकट वायु के अवतलन के कारण प्रतिचक्रवातीय दशाएँ पाई जाती हैं। यहाँ का वायुमंडल अवतलन क्रिया के कारण शुष्क होता है, अतः वाष्पीकरण की प्रक्रिया अधिक होने के कारण लवणता अधिक पाई जाती है। परंतु भूमध्य रेखीय क्षेत्रों के निकट वर्ष भर तापमान ऊँचा रहने के बावजूद वायुमंडल की सापेक्ष आर्द्रता अधिक होने तथा बादलों की अधिकता के कारण वाष्पीकरण की दर मंद पड़ जाती है, इसलिये इन क्षेत्रों में लवणता कम पाई जाती है।
    • वर्षा द्वारा स्वच्छ जल की आपूर्तिः लवणता में अंतर लाने वाला यह अन्य महत्त्वपवूर्ण कारक है। भूमध्य रेखीय क्षेत्रों में तापमान वर्ष भर ऊँचा रहने के बावजूद वहाँ होने वाली भारी वर्षा के कारण महासागरों के सतही जल में ताजे पानी के मिश्रण के कारण लवणता अपेक्षाकृत कम पाई जाती है। इस पेटी के दोनों ओर उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब की पेटियाँ स्थित हैं। इनमें उच्च तापमान और वर्षा के अभाव में वाष्पीकरण अधिक होने से लवणता सर्वाधिक मात्रा में पाई जाती है।
    • नदियों द्वारा स्वच्छ जलापूर्तिः विश्व की सभी बड़ी नदियों के मुहाने के निकट समुद्र के जल में लवणता की मात्रा कम हो जाती है। कांगो, नाइजर, सेंट लॉरेंस, ओब, अमेजन आदि नदियाँ अपने द्वारा छोड़े गए ताजे जल के कारण अपने मुहाने के निकटवर्ती समुद्रों के जल में लवणता कम करने में सहायक होती हैं।
    • प्रचलित पवनः महासागर के ऊपर चलने वाली हवाओं का पृष्ठीय जल की लवणता के वितरण पर भारी प्रभाव पड़ता है। उदाहरणार्थ व्यापारिक पवन अपने साथ महासागरों के पूर्वी तटों के निकटवर्ती ऊष्ण एवं अधिक खारे जल को बहाकर पश्चिमी तट की ओर ले जाते हैं, जिसकी पूर्ति हेतु अधस्तल का शीतल तथा अपेक्षाकृत कम खारा जल ऊपर आ जाता है। इस प्रकार अयनवर्ती  क्षेत्रों में महासागरों के पूर्वी तट के निकट लवणता कम तथा पश्चिमी तट के निकट अधिक पाई जाती है।
    • महासागरीय जल की गतियाँ: महासागरीय जल की विभिन्न गतियों में समुद्री लहरें, ज्वारीय तरंगें तथा ऊष्ण एवं शीतल धाराएँ सम्मिलित हैं। ये धाराएँ न केवल तापमान बल्कि लवणता का भी स्थानांतरण निम्न अक्षांशों से उच्च अक्षांशों की ओर किया करती हैं।

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