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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • लुप्तप्राय: भाषाओं के विलुप्त होने के कारणों पर प्रकाश डालें। इस संदर्भ में लुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा तथा संरक्षण योजना के प्रावधानों को रेखांकित करें।

    30 May, 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 1 संस्कृति

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • भूमिका

    • लुप्तप्राय: भाषाओं के विलुप्त होने के कारण

    • लुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा तथा संरक्षण योजना

    • निष्कर्ष

    भारतीय लोकभाषा सर्वेक्षण/पीपुल्स लिंग्वस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया 2013 के अनुसार पिछले 50 वर्षों में लगभग 220 भाषाएँ लुप्त हो चुकी हैं, जबकि 197 भाषाओं को लुप्तप्राय के रूप में वर्गीकृत किया गया है। वर्तमान में भारत सरकार केवल उन्हीं भाषाओं को मान्यता देती है जिसकी अपनी एक लिपी हो तथा व्यापक स्तर पर बोली जाती हो। इस प्रकार भारत सरकार द्वारा 122 भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है जो भारतीय लोकभाषा सर्वेक्षण द्वारा आकलित 780 भाषाओं की तुलना में बहुत कम है।

    यूनेस्को द्वारा अपनाए गए मानदंडों के अनुसार, कोई भाषा तब विलुप्त होती है जब कोई व्यक्ति उस भाषा को नहीं बोलता था, न ही याद रखता है। उल्लेखनीय है कि यूनेस्को ने भारत की 42 भाषाओं को गंभीर रूप से संकटग्रस्त माना है।

    विलुप्त होने के कारण

    • भारत सरकार 10,000 में कम लोगों द्वारा बोले जाने वाली भाषाओं को मन्यता नहीं देती है।
    • समुदायों की प्रवासन तथा अप्रवासन की प्रवृत्ति के कारण पारंपरिक बसावट में कमी आती जा रही है, जिसके कारण क्षेत्रीय भाषाओं को नुकसान पहुँचता है।
    • रोजगार के प्रारूप में परिवर्तन।
    • सामाजिक तथा सांस्कृतिक मूल्यों में परिवर्तन।
    • व्यक्तिवाद की प्रवृत्ति में वृद्धि के कारण समुदाय के हित के ऊपर स्वयं के हितों को प्राथमिकता दिये जाने के कारण भी भाषाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
    • पारंपरिक समुदायों में भौतिकवाद का अतिक्रमण जिसके चलते आध्यात्मिक तथा नैतिक मूल्य उपभोक्तावाद से प्रभावित होते हैं।

    लुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा तथा संरक्षण योजना

    • मानव संसाधन विकास मंत्रालयों ने लुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा तथा संरक्षण के लिये योजना का संचालन किया है।
    • इसकी शुरुआत 2013 में की गई।
    • इस योजना का एकमात्र उद्देश्य देश की ऐसी भाषाओं का दस्तावेजीकरण करना तथा उन्हें संगृहीत करना है जिनकी निकट भविष्य में लुप्तप्राय या संकटग्रस्त होने की संभावना है।
    • इस योजना की निगरानी कर्नाटक के मैसूर में स्थित केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान द्वारा की जाती है।
    • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अनुसंधान परियोजनाओं को शुरू करने के लिये केंद्रीय तथा राज्य विश्वविद्यालयों में लुप्तप्राय भाषाओं के लिये केंद्र स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
    • इस योजना के अधीन केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान देश में 10,000 से कम लोगों द्वारा बोली जाने वाली सभी भाषाओं तथा मातृभाषाओं की सुरक्षा संरक्षण तथा प्रलेखन का कार्य करता है।

    इस प्रकार उपरोक्त प्रायासों द्वारा लुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा तथा संरक्षण इन भाषाओं को लुप्त होने से बचाती है।

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