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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • यूरोपीय संघ से ब्रिटेन का बाहर निकलना (Brexit) ब्रिटेन के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण फैसला है जो न केवल ब्रिटेन, बल्कि अन्य अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित करेगा। ब्रेक्सिट के कारणों का उल्लेख करते हुए इसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करें।

    19 Apr, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध

    उत्तर :

    र्तमान ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने की प्रक्रिया की शुरुआत की है। ज्ञातव्य है कि जून, 2016 में BREXIT को लेकर हुए मतदान में ब्रिटेन के 51.9% लोगों ने BREXIT के पक्ष में मतदान किया था।

    BREXIT के पीछे प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-

    • यूरोपीय संघ के नियम श्रम के मुक्त आवागमन को अनुमति देते हैं जिसके कारण ब्रिटेन में आप्रवासियों के प्रवाह में तीव्र वृद्धि हुई ब्रिटेन के अनुसार इसके कारण ब्रिटेन में बेरोजगारी में वृद्धि हुई।
    • BREXIT के समर्थकों का मानना है कि यूरोपीय संघ का सदस्य बने रहने से ब्रिटेन की संप्रभुता प्रभावित होती है। ब्रिटेन को ऐसे नियमों का पालन करना पड़ता है जो ब्रिटिश संसद के बजाय यूरोपीय संघ के कार्यालय में बनते हैं।
    • उनके अनुसार, यह संघ किसी विशेष उद्देश्य को पूरा नहीं करता एवं 2008 के आर्थिक संकट के पश्चात इसकी कमजोरियाँ उजागर हो गई।

    BREXIT का भारत पर निम्नलिखित प्रभाव होने के संभावना है-

    • ब्रेक्सिट के कारण पाउंड और यूरो के अवमूल्यन की संभावना है जिससे भारतीय शेयर बाजार एवं यूरोप में भारतीय व्यापार प्रभावित होगा।
    • यूरोपीय संघ में प्रवेश के लिये ब्रिटेन सदैव भारत के लिये प्रवेश द्वारा रहा है अतः ब्रेक्सिट के बाद भारतीय कंपनियों के लिये यह अल्पकालिक संकट उत्पन्न करेगा।
    • भारतीय आईटी कंपनियों को अलग-अलग कार्यालय स्थापित करने और यूरोप तथा ब्रिटेन के लिये अलग-अलग टीमें नियुक्त करने की आवश्यकता पड़ेगी जिससे आईटी कंपनियों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।
    • ब्रिटेन भारत में प्रमुख निवेशक देश है। यदि BREXIT के बाद ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है तो उसके द्वारा भारत में किये जाने वाले निवेश में भी कमी आएगी। 

    इनके अलावा, BREXIT के कारण भारत पर कई सकारात्मक प्रभाव भी पड़ने की संभावना है-

    • ब्रिटेन भारतीय कंपनियों के लिये कर ढाँचा सरल बनाकर, विनिमय दर घटाकर एवं अन्य वित्तीय सुविधाएँ प्रदान कर अपने यहाँ निवेश को प्रोत्साहित कर सकता है।
    • भारतीय जेनेरिक दवा उद्योग के लिये ब्रिटेन के बाजार में अवसर बढ़ सकते हैं।
    • दीर्घकाल में ब्रेक्सिट भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत करेगा क्योंकि ब्रिटेन यूरोपीय संघ के बाजारों तक अपनी पहुँच के नुकसान की क्षतिपूर्ति करना चाहेगा।

    निष्कर्षः यद्यपि ब्रिटेन का यह कदम यूरोपीय संघ को कमजोर बनाएगा लेकिन भारत कुछ अतिरिक्त प्रयासों से दीर्घकाल में BREXIT का लाभ उठा सकता है।

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