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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    आपकी राय में क्या किसी व्यक्ति की अभिवृत्तियों में परिवर्तन करना संभव है? यदि हाँ, तो कैसे?

    30 Jun, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    उत्तर :

    व्यक्ति की अभिवृत्ति को सामान्यतः स्थायी माना जाता है, परंतु इसमें परिवर्तन करना संभव है। अभिवृत्ति में परिवर्तन कितना मुश्किल या आसान होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह परिवर्तन संगत है या असंगत। यदि अभिवृत्ति सकारात्मक से और अधिक सकारात्मक या नकारात्मक से और अधिक नकारात्मक होती है तो ऐसे परिवर्तन संगत परिवर्तन कहलाते हैं। वहीं,  यदि अभिवृत्ति में सकारात्मक से नकारात्मक या नकारात्मक से सकारात्मक परिवर्तन होना हो तो इसे असंगत परिवर्तन कहते हैं। अभिवृत्ति में संगत परिवर्तन होना असंगत परिवर्तन होने की तुलना में ज्यादा आसान होता है।

    अभिवृत्ति में परिवर्तन लाने में सक्षम कारकः

    (i) संदर्भ समूह में परिवर्तनः व्यक्ति स्वयं को जिस समूह के साथ आत्मीकृत करता है, उस समूह के अनुरूप ही उसकी अभिवृत्तियों में परिवर्तन आता है। जैसेः यदि किसी परंपरागत परिवार का विद्यार्थी अपनी उच्च शिक्षा के लिये जे.एन.यू. जाये तो संदर्भ समूह परिवर्तित हो जाने के कारण उच्च-शिक्षा पूरी करते-करते उसकी अभिवृत्तियों में व्यापक परिवर्तन आ जाएगा।
    (ii) बाध्यकारी संपर्कः यदि किसी व्यक्ति को किसी ऐसे समूह के लोगों के साथ रहने के लिये बाध्य किया जाये जिसके प्रति उसकी अभिवृत्ति नकारात्मक होती है, तो प्रायः यह देखा गया है कि साथ रहने से उस व्यक्ति की उस समूह के लोगों के प्रति अभिवृत्ति सकारात्मक हो जाती है। जैसेः यदि किसी तथाकथित उच्च जाति के परम्परागत सोच वाले विद्यार्थी को हॉस्टल में एक तथाकथित दलित विद्यार्थी के साथ एक डॉरमेट्री में रहने व पढ़ने के लिये रखा जाये, तब हम देखते हैं कि कुछ समय पश्चात् उच्च जाति के विद्यार्थी में दलित विद्यार्थी के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति का विकास होने लगता है।
    (iii) अपेक्षित भूमिका-निर्वाहः यदि व्यक्ति में किसी कार्य विशेष के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति है और उसे वह कार्य करना पड़े तो धीरे-धीरे उस कार्य के प्रति उसकी अभिवृत्ति में परिवर्तन आ जाता है। जैसे एक परंपरागत धारण है कि औरतें (विशेषकर गृहणियाँ) काम नहीं करती। यदि कुछ समय के लिये पुरुष इन महिलाओं की भूमिका निभाकर देखें तो उनकी अभिवृत्ति में परिवर्तन हो सकता है।
    (iv) अतिरिक्त सूचनाओं की प्राप्तिः अभिवृत्ति का संज्ञानात्मक पक्ष किसी व्यक्ति को प्राप्त सूचनाओं के आधार पर निर्मित होता है। जब किसी व्यक्ति को अतिरिक्त सूचनाएँ प्राप्त होती हैं तो इससे उसके संज्ञानात्मक पक्ष में परिवर्तन आता है और अभिवृत्ति परिवर्तित हो जाती है। जैसेः आपके कार्यालय का एक कर्मचारी देरी से आने के लिये बदनाम है और आप में उसके प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति उपस्थित है लेकिन एक दिन आपको कुछ तथ्य पता चलते है कि उस कार्मचारी के घर पर उसके बूढ़े माता-पिता और विकलांग जीवन-साथी है, जिनके कार्य पूरे करने के फेर में वह रोजाना कार्यालय देरी से पहुँचता है; ऐसे में निश्चित तौर पर उसे लेकर आपकी अभिवृत्ति में परिवर्तन अवश्य आएगा।
    (v) धारणा या अनुनयनः यह एक विशेष प्रकार का संप्रेषण या अभिव्यक्ति है जिसे किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह की अभिवृत्ति परिवर्तित करने के लिये किया जाता है। जैसे- प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ के जरिये विमुद्रीकरण के प्रति जनता को सकारात्मक सोचने के लिये प्रेरित करना।

    इस प्रकार, उपरोक्त कारकों द्वारा किसी व्यक्ति की अनिवृत्ति में परिवर्तन संभव है।

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