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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • संगम साहित्य से दक्षिण भारत की राजनीतिक स्थिति की अपेक्षा सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति के विषय में अधिक जानकारी मिलती है। चर्चा कीजिये।

    10 Dec, 2018 सामान्य अध्ययन पेपर 1 इतिहास

    उत्तर :

    भूमिका में:


    संगम साहित्य का ऐतिहासिक स्रोत के रूप में उसके महत्त्व को बताते हुए जानकारी दें-

    संगम साहित्य दक्षिण भारत का इतिहास जानने का प्रमुख स्रोत है। इसका संकलन लगभग 30 ई.पू. से 200 ई.पू. के मध्य किया गया। इस साहित्य से राजनीतिक क्षेत्र में राज्य के गठन के विषय में जानकारी मिलती है, जिसमें मात्र सेना के दल होते थे। परंतु कर प्रणाली, संग्रह प्रणाली तथा न्याय व्यवस्था के विषय में बहुत कम जानकारी मिलती है। राजाओं का अतिश्योक्तिपूर्ण वर्णन मिलता है, जबकि पुरातात्त्विक साक्ष्यों द्वारा राजनीतिक वर्णन की पुष्टि बहुत कम होती है।

    विषय-वस्तु में:


    विषय-वस्तु के पहले भाग में हम तत्कालीन अर्थव्यवस्था के बारे में संगम साहित्य द्वारा प्राप्त जानकारी पर चर्चा करेंगे-

    राजनीतिक इतिहास के विपरीत संगम साहित्य में तत्कालीन समाज, धर्म, अर्थव्यवस्था के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी मिलती है। इन ग्रंथों में युद्धों तथा लूट-पाट की चर्चा मिलती है। ऐसा प्रतीत होता है कि व्यापार तथा लूट राज्य की आय के मुख्य साधन रहे होंगे। लेकिन कालांतर में इनके स्थान पर कृषि को महत्त्व दिया जाने लगा। कावेरी नदी डेल्टा वाला प्रदेश अपनी उर्वरता के लिये प्रसिद्ध था। कृषि आय द्वारा ही प्रशासनिक तथा सैन्य व्यय की पूर्ति की जाती थी। वस्त्र उद्योग का विकास हुआ, विदेशी व्यापार के माध्यम से भारी मात्रा में सोना प्राप्त होता था, जो दक्षिण भारत की समृद्धि का महत्त्वपूर्ण कारण था। संगम काल में नियमित कर प्रणाली के अभाव के बावजूद काली मिर्च, रेशम, हाथी दाँत आदि के निर्यात ने राजाओं को धनी बना दिया।

    विषय-वस्तु के दूसरे भाग में हम संगम साहित्य में वर्णित सामाजिक स्थिति पर चर्चा करेंगे-

    शिल्प्पादिकारम तथा मणिमेखलै जैसी रचनाओं में तत्कालीन सामाजिक स्थिति के विषय में जानकारी मिलती है। संगमकालीन समाज में वर्ण एवं जाति व्यवस्था बहुत सख्त नहीं थी फिर भी ब्राह्मणों को प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त था। वैदिक यज्ञों का प्रचलन था। ब्राह्मणों के पश्चात् वेल्लार वर्ग का स्थान था और इन्हें प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया जाता था। धनी वर्ग पक्के, जबकि निर्धन कच्चे मकानों में रहते थे। सामाजिक विषमता के विरुद्ध कहीं भी विरोध की भावना नहीं थी। महिलाओं को जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता थी किंतु विधवाओं की स्थिति सोचनीय थी। दास प्रथा का उल्लेख नहीं मिलता है। मृत्यु के पश्चात् अग्निदाह तथा समाधिकरण दोनों प्रथाओं का प्रचलन था।

    निष्कर्ष


    अंत में संतुलित, संक्षिप्त एवं सारगर्भित निष्कर्ष लिखें।

    इस प्रकार संगम साहित्य राजनीतिक स्थिति की अपेक्षा तत्कालीन समाज की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति की अधिक महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

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