कुल प्रश्नों की संख्या : 1
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राकेश मेहता एक तेज़ी से विकसित हो रहे ज़िले के लोक निर्माण विभाग (PWD) में कार्यकारी अभियंता हैं। उनका विभाग सड़क निर्माण, सार्वजनिक भवनों और अवसंरचना के रख-रखाव से संबंधित ठेकों को स्वीकृति देने के लिये जिम्मेदार है। हाल ही में सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क सुधारने के उद्देश्य से एक बड़ी सड़क विकास परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है।
निविदा प्रक्रिया के दौरान राकेश यह देखते हैं कि बोली की शर्तों में सूक्ष्म रूप से ऐसे परिवर्तन किये गये हैं, जो एक विशेष निजी ठेकेदार के पक्ष में जाते हैं। तकनीकी पात्रता मानदंड अनावश्यक रूप से अत्यधिक प्रतिबंधात्मक प्रतीत होते हैं, जिससे वास्तविक और सक्षम प्रतिस्पर्द्धी स्वतः ही बाहर हो जाते हैं। अनौपचारिक रूप से राकेश को यह भी ज्ञात होता है कि वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय राजनीतिक नेता वित्तीय कमीशन और राजनीतिक चंदे के बदले इस पसंदीदा बोलीदाता को ठेका दिलाने के लिये विभाग पर दबाव बना रहे हैं।
हालाँकि चयनित फर्म ने अधिक मूल्य की बोली लगाई है और उसका पिछला रिकॉर्ड भी संदिग्ध रहा है, फिर भी निविदा मूल्यांकन समिति पर इन कमियों की अनदेखी करने के लिये प्रभाव डाला जा रहा है। जब राकेश प्रक्रियागत आपत्तियाँ उठाते हैं, तो सहकर्मी उन्हें ‘प्रणाली के अनुसार चलने’ की सलाह देते हैं और यह भी चेतावनी देते हैं कि पूर्व में ऐसी प्रथाओं का विरोध करने वाले अधिकारियों को दरकिनार कर दिया गया या स्थानांतरित कर दिया गया था।
इसी बीच स्थानीय नागरिक और मीडिया सरकारी परियोजनाओं में कार्य की निम्न गुणवत्ता और बढ़ती लागत को लेकर प्रश्न उठा रहे हैं। इस परिस्थिति में राकेश एक नैतिक दुविधा का सामना कर रहे हैं— एक ओर मौन रहकर अपने कॅरियर की सुरक्षा करें या दूसरी ओर पेशेवर प्रतिकूलताओं के जोखिम के बावजूद पारदर्शिता एवं निष्पक्षता का पालन करें।
प्रश्न
सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़
1. उपर्युक्त प्रकरण में निहित नैतिक मुद्दों का अभिनिर्धारण कीजिये।
2. राजनीतिक दबाव और निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं के संदर्भ में एक लोक सेवक के रूप में राकेश मेहता किन नैतिक दुविधाओं का सामना कर रहे हैं?
3. निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकहित सुनिश्चित करने के लिये राकेश के लिये सबसे उपयुक्त कार्य-मार्ग क्या होना चाहिये?