चर्चित स्थान
लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार
- 24 Mar 2026
- 20 min read
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में लिपुलेख दर्रे से भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार छह वर्ष के अंतराल के बाद जून 2026 में फिर से शुरू होने जा रहा है। यह व्यापार वर्ष 2019-20 में कोविड-19 महामारी और उसके बाद सीमा पर बढ़े तनाव के कारण बंद कर दिया गया था।
- हालाँकि इसकी बहाली ने राजनयिक तनाव को फिर से गरमा दिया है; नेपाल ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए अपने इस दावे को दोहराया है कि कालापानी-लिपुलेख-लिंपियाधुरा क्षेत्र नेपाल का संप्रभु क्षेत्र है।
- द्विपक्षीय समझौता: यह निर्णय अगस्त 2025 में भारत और चीन के बीच हिमालयी क्षेत्र के तीन निर्धारित व्यापार मार्गों (लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला) को फिर से खोलने के लिये हुए कूटनीतिक समझौते के बाद लिया गया है।
- बेहतर बुनियादी ढाँचा: वर्ष 2020 से पूर्व के व्यापार के विपरीत, जो खच्चरों और भेड़ों पर निर्भर था, आगामी व्यापार लिपुलेख तक पहुँचने वाली वाहन योग्य सड़क (2020 में पूरी हुई) से लाभान्वित होगा, जिससे रसद लागत और यात्रा समय में भारी कमी आएगी।
- लिपुलेख दर्रा: यह उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित एक उच्च ऊँचाई वाला पर्वतीय दर्रा है, जो भारत, नेपाल और चीन की त्रिसीमा के निकट स्थित है और उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है।
- यह उच्च हिमालय की ओर जाने वाला प्रवेश द्वार है और ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारतीय उपमहाद्वीप को तिब्बती पठार से जोड़ने वाले प्राचीन व्यापार मार्ग के रूप में जाना जाता है।
- लिपुलेख 1992 में चीन के साथ व्यापार के लिये खोला गया पहला भारतीय सीमा बॉर्डर था, इसके बाद हिमाचल प्रदेश में शिपकी ला (1994) और सिक्किम में नाथू ला (2006) का उद्घाटन हुआ।
- सुगौली संधि (1816): आंग्ल-नेपाल युद्ध के बाद नेपाल राज्य और ब्रिटिश भारत के बीच सुगौली संधि पर हस्ताक्षर हुए। इस संधि ने काली नदी (जिसे महाकाली या शारदा नदी भी कहा जाता है) को नेपाल की पश्चिमी सीमा के रूप में निर्धारित किया।
- पुराना लिपुलेख दर्रा: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले की व्यास घाटी में स्थित यह दर्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा के हिस्से के रूप में अत्यधिक धार्मिक महत्त्व रखता है।
- नेपाल के साथ क्षेत्रीय विवाद:
- नदी के स्रोत को लेकर विवाद:
- नेपाल का दावा: काठमांडू का तर्क है कि नदी का स्रोत लिंपियाधुरा में है, जो लिपुलेख के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इसके आधार पर, इस बिंदु के पूर्व में स्थित त्रिभुजाकार क्षेत्र लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी संपूर्ण रूप से नेपाल का है।
- भारत का दृष्टिकोण: भारत का मानना है कि नदी का स्रोत कालापानी गाँव के पास स्थित जल-स्रोतों से है, जिससे विवादित क्षेत्र स्पष्ट रूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में आता है।
- नदी के स्रोत को लेकर विवाद:
|
और पढ़ें: लिपुलेख दर्रा |
