रैपिड फायर
सरकार द्वारा विद्युत् (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित
- 25 Mar 2026
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सरकार ने विद्युत (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिसमें विद्युत नियम, 2005 के नियम-3 में संशोधन किया गया, जो संलग्न उत्पादन संयंत्रों (CGP) से संबंधित है।
- CGP उद्योगों या संस्थाओं द्वारा स्थापित विद्युत संयंत्र हैं, जो सार्वजनिक विद्युत ग्रिड पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मुख्य रूप से अपनी खपत के लिये विद्युत उत्पन्न करते हैं।
- उद्देश्य: ये संशोधन वैधानिक स्वामित्व और उपभोग संरक्षणों को संरक्षित रखते हुए संलग्न उत्पादन प्रावधानों को स्पष्ट करने, अस्पष्टताओं को दूर करने, कारोबारी सुगमता में सुधार करने और संलग्न विद्युत को भारत के ऊर्जा संक्रमण एवं औद्योगिक विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित करने का लक्ष्य रखते हैं।
- नीतिगत महत्त्व: विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत समर्थित और राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2005 में मान्यता प्राप्त संलग्न विद्युत उत्पादन उद्योगों को विश्वसनीय और लागत प्रभावी विद्युत प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण रहा है।
- इसने उद्योगों को विद्युत आपूर्ति बाधाओं को दूर करने और लागत में उतार-चढ़ाव का प्रबंधन करने में सक्षम बनाया है, जिससे औद्योगिक विकास को समर्थन मिला है।
- जैसे-जैसे उद्योग गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं, संलग्न विद्युत के लिये एक स्पष्ट और पूर्वानुमान योग्य नियामक ढाँचा प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिये आवश्यक है।
- मुख्य सुधार:
- स्वामित्व की स्पष्ट व्याख्या: स्वामित्व की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए इसमें सहायक कंपनियाँ, होल्डिंग कंपनियाँ तथा उस होल्डिंग कंपनी की अन्य सहायक कंपनियाँ भी शामिल की गई हैं, जो कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट की स्थापना करती हैं।
- कैप्टिव स्टेटस सत्यापन के लिये नोडल एजेंसियाँ: 1 अप्रैल, 2026 से राज्य/केंद्रशासित प्रदेश एक नोडल एजेंसी नामित करेंगे, जबकि अंतर-राज्यीय सत्यापन का कार्य राष्ट्रीय लोड डिस्पैच केंद्र (NLDC) द्वारा किया जाएगा।
- सत्यापन सुधार: स्पष्टता और समान रूप से कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु अब पूरे वित्तीय वर्ष के लिये कैप्टिव स्टेटस का वार्षिक सत्यापन किया जाएगा।
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