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कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव

  • 10 Feb 2026
  • 15 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

भारत–सेशेल्स द्विपक्षीय बैठक में भारत ने सेशेल्स कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (CSC) में शामिल होने के रणनीतिक महत्त्व को रेखांकित किया और इसे भारत की क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा संरचना का एक प्रमुख विस्तार बताया।

  • परिचय: कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव, भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) के देशों का एक क्षेत्रीय सुरक्षा समूह है, जो भारतीय महासागर क्षेत्र में सामान्य सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने पर केंद्रित है।
    • वर्ष 2011 में यह भारत, श्रीलंका और मालदीव के बीच त्रिपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग के रूप में शुरू हुआ था।
    • वर्ष 2014 के बाद भारत और मालदीव के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण यह समूह निष्क्रिय हो गया।
    • इसे वर्ष 2020 में पुनर्जीवित किया गया और कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (CSC) के रूप में नामांकित किया गया।
    • सदस्यता का विस्तार मॉरीशस (2022), बांग्लादेश (2024) और सेशेल्स (2025) के शामिल होने के साथ हुआ।
  • सचिवालय: स्थायी सचिवालय कोलंबो, श्रीलंका में स्थित है। यह समूह सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSAs) और उप-NSAs को समन्वित सुरक्षा सहयोग के लिये एकत्र करता है।
  • सहयोग के पांच स्तंभ:
    • समुद्री सुरक्षा और सुरक्षा उपाय (मुख्य फोकस)
    • आतंकवाद और कट्टरवाद का मुकाबला
    • तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का सामना
    • साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा
    • मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR)
  • भारत के लिये रणनीतिक महत्त्व: CSC भारत की SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा एवं विकास) की परिकल्पना तथा नई MAHASAGAR पहल का एक क्रियात्मक प्रतिरूप है।
    • यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत का ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ एवं शुद्ध सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) की भूमिका को सुदृढ़ करता है तथा छोटे द्वीपीय देशों की बाह्य-क्षेत्रीय शक्तियों (जैसे चीन) पर निर्भरता को कम करता है।
    • इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA), जो एक व्यापक संवाद मंच है, के विपरीत CSC अधिक सुरक्षा-केंद्रित और संचालनात्मक (ऑपरेशनल) प्रकृति का है।

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