रैपिड फायर
RBI द्वारा MSE के लिये कोलैटरल-फ्री लोन की सीमा में वृद्धि
- 10 Feb 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 'MSME क्षेत्र को ऋण (संशोधन) निर्देश, 2026' के माध्यम से बैंकों को यह निर्देश दिया है कि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSE) को प्रदान किये जाने वाले ₹20 लाख तक के ऋणों के लिये कोलैटरल-सुरक्षा (ज़मानत) का आग्रह न किया जाए।
- लागू होने की सीमा: संशोधित निर्देश 1 अप्रैल, 2026 से या उसके बाद स्वीकृत अथवा नवीकृत सभी MSE ऋणकर्त्ताओं के ऋणों पर लागू होंगे।
- कोलैटरल-फ्री लोन की सीमा में वृद्धि: कोलैटरल-फ्री लोन की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया गया है, जिसका उद्देश्य सीमित परिसंपत्तियों वाले छोटे व्यवसायों के लिये लास्ट-माइल क्रेडिट उपलब्धता को सुदृढ़ करना है।
- PMEGP के अंतर्गत कवरेज: यह प्रावधान प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत वित्तपोषित सभी इकाइयों पर लागू होगा। PMEGP का कार्यान्वयन खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा किया जाता है।
- PMEGP भारत सरकार की ऋण-आधारित सब्सिडी योजना है, जिसे वर्ष 2008 में प्रारंभ किया गया था, और इसका उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों और लघु इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित कर स्वरोज़गार को बढ़ावा देना है।
- अतिरिक्त ऋण सुविधा: ऋणकर्त्ता के संतोषजनक ट्रैक रिकॉर्ड और वित्तीय सुदृढ़ता के आधार पर बैंक अपनी आंतरिक नीतियों के अनुसार क्रेडिट गारंटी कवरेज के साथ ₹25 लाख तक कोलैटरल-फ्री लोन की अनुमति दे सकते हैं।
- अपवाद: कोलैटरल-फ्री लिमिट के भीतर लोन के लिये ऋणकर्त्ताओं द्वारा स्वेच्छा से सोना या चांदी गिरवी रखना RBI के निर्देशों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।