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केंद्रीय सतर्कता आयोग

  • 19 Jan 2026
  • 54 min read

स्रोत: पीआईबी

राष्ट्रपति ने केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 की धारा 4(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री प्रवीण वशिष्ठ को केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में सतर्कता आयुक्त नियुक्त किया है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग क्या है?

  • परिचय: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) भारत सरकार के भीतर भ्रष्टाचार से निपटने और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिये गठित शीर्ष वैधानिक संस्था है। यह एक कार्यकारी सिफारिश से विकसित होकर भारत के सतर्कता ढाँचे का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है।
  • उत्पत्ति और विकास: संथानम समिति (1962–64) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1964 में इसकी स्थापना की गई थी और प्रारंभ में यह गैर-वैधानिक संस्था थी।
    • इसे वर्ष 1998 में केंद्र सरकार के अध्यादेश के माध्यम से वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया और बाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के तहत औपचारिक रूप से स्थापित किया गया।
  • संरचना और नियुक्ति: यह एक बहु-सदस्यीय निकाय है, जिसमें एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त होते हैं। इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता सदस्य होते हैं। इनका कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।
  • स्वतंत्रता: केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का वेतन और सेवा-शर्तें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष के समान होती हैं, जबकि सतर्कता आयुक्तों की सेवा-शर्तें UPSC के सदस्यों के समान निर्धारित हैं। दोनों ही मामलों में नियुक्ति के पश्चात इनमें परिवर्तित नहीं किया जा सकता
    • CVC का सारा खर्च—जिसमें केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, अन्य सतर्कता आयुक्तों और कर्मचारियों का वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं— भारत की संचित निधि द्वारा जारी किया जाता है और यह संसदीय अनुमोदन के अधीन नहीं होता
  • हटाने का प्रावधान: राष्ट्रपति केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या किसी भी सतर्कता आयुक्त को निम्न कारणों से पद से हटा सकते हैं: दिवालियापन, नैतिक अपवित्रता से संबंधित दोषसिद्धि, वेतनभोगी बाहरी नौकरी, शारीरिक अक्षमता या हानिकारक वित्तीय हित
    • इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या किसी भी सतर्कता आयुक्त को सिद्ध अनुचित आचरण या अक्षमता के आधार पर पद से हटा सकते हैं। ऐसे मामलों को जाँच के लिये सर्वोच्च न्यायालय के पास भेजा जाना चाहिये और पद से हटाने की कार्रवाई तभी की जा सकती है जब सर्वोच्च न्यायालय आरोपों की पुष्टि कर दे और उन्हें हटाने की अनुशंसा करे।
  • मुख्य कार्य: इसके दायित्वों में शामिल हैं:
    • केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, अखिल भारतीय सेवा (AIS) अधिकारियों और निर्दिष्ट सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों की जाँच करना।
    • भ्रष्टाचार के मामलों में CBI पर अधीक्षण की शक्ति का प्रयोग करना और उसकी जाँचों की समीक्षा करना।
    • जनहित प्रकटीकरण और मुखबिरों के संरक्षण (PIDPI) रेज़ोल्यूशन के तहत सूचना प्रदाता/व्हिसल ब्लोअर शिकायतों के लिये नामित एजेंसी के रूप में कार्य करना।
    • जनहित प्रकटीकरण और सूचना प्रदाता संरक्षण (PIDPI) प्रस्ताव के तहत 'व्हिसलब्लोअर' (Whistle-blower) शिकायतों के लिए नामित एजेंसी के रूप में कार्य करना।
    • सतर्कता मामलों में केंद्रीय सरकार को परामर्श देना और अभियोजन अनुमोदन के अनुरोधों की समीक्षा करना।
    • धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत संदिग्ध लेन-देन के लिये नामित प्राधिकरण के रूप में कार्य करना।
  • लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के बाद की भूमिका: लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को यह अधिकार दिया कि वह लोकपाल (राष्ट्रीय भ्रष्टाचार-रोधी लोकपाल) द्वारा भेजी गई शिकायतों पर समूह A, B, C और D के कर्मचारियों के विरुद्ध प्रारंभिक जाँच कर सके तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों की अनुशंसा कर सके।   
  • अधिकार क्षेत्र: इसमें अखिल भारतीय सेवाएँ (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति), समूह A के अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, भारतीय रिज़र्व बैंक, नाबार्ड, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) और बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
  • संगठनात्मक संरचना: यह एक सचिवालय के माध्यम से कार्य करता है, तकनीकी ऑडिट के लिये मुख्य तकनीकी परीक्षक शाखा होती है तथा विभागीय जाँच के लिये विभागीय जाँच आयुक्त (CDI) नियुक्त किये जाते हैं।
  • कार्यप्रणाली एवं प्रतिवेदन: इसे सिविल न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त हैं, यह विभागों को आवश्यक कार्रवाई पर परामर्श देता है और इसके परामर्श को या तो लागू करना होता है अथवा अस्वीकार करने के कारण लिखित रूप में दर्ज करने होते हैं। यह अपनी वार्षिक रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे बाद में संसद के समक्ष रखा जाता है।
  • सतर्कता नेटवर्क: प्रत्येक मंत्रालय में एक मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) नियुक्त होता है, जो विभाग, केंद्रीय सतर्कता आयोग और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के बीच समन्वय की कड़ी के रूप में कार्य करता है तथा आंतरिक सतर्कता से जुड़े कार्यों का संचालन करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) क्या है?
CVC केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार को रोकने और सतर्कता प्रशासन की निगरानी करने के लिये गठित सर्वोच्च वैधानिक सतर्कता निकाय है।

2. CVC कब एक वैधानिक निकाय बना?
इसे वर्ष 1998 में केंद्र सरकार के एक अध्यादेश के माध्यम से वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था और वर्ष 2003 के CVC अधिनियम के तहत इसे औपचारिक रूप दिया गया था।

3. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति कैसे होती है?
भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की समिति की सिफारिश के आधार पर।

4. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अंतर्गत CVC की क्या भूमिका है?
यह CBI द्वारा की गई जाँचों की निगरानी करता है, अभियोजन संबंधी स्वीकृतियों की समीक्षा करता है और केंद्र सरकार एवं वरिष्ठ सार्वजनिक अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की जाँच करता है।

5. लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 ने CVC को कैसे प्रभावित किया?
इसने CVC को लोकपाल के संदर्भों पर प्रारंभिक जाँच करने का अधिकार दिया और CBI एवं प्रवर्तन निदेशालय की नियुक्तियों में इसकी भूमिका को सुदृढ़ किया।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2019)

  1. भ्रष्टाचार के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन [यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन (UNCAC)] का 'भूमि, समुद्र और वायुमार्ग से प्रवासियों की तस्करी के विरुद्ध एक प्रोटोकॉल' होता है।
  2. UNCAC अब तक का सबसे पहला विधितः बाध्यकारी सार्वभौम भ्रष्टाचार-रोधी लिखत है।
  3. राष्ट्र-पार संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन [यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम (UNTOC)] की एक विशिष्टता ऐसे एक विशिष्ट अध्याय का समावेशन है, जिसका लक्ष्य उन संपत्तियों को उनके वैध स्वामियों को लौटाना है जिनसे वे अवैध तरीके से ले ली गई थीं।
  4. मादक द्रव्य और अपराध विषयक संयुक्त राष्ट्र कार्यालय [यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (UNODC)] संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों द्वारा UNCAC और UNTOC दोनों के कार्यान्वयन में सहयोग करने के लिये अधिदेशित है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1 और 3

(b) केवल 2, 3 और 4

(c) केवल 2 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (c)

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