प्रारंभिक परीक्षा
सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी
- 22 Jan 2026
- 48 min read
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वर्ष 2026 के BRICS शिखर सम्मेलन (आयोजक: भारत) के एजेंडे में BRICS देशों की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDCs) को जोड़ने का प्रस्ताव शामिल करने की सिफारिश की है।
- RBI का यह प्रस्ताव 2025 में रियो डी जनेरियो में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में किये गए एक घोषणा-पत्र पर आधारित है, जिसमें सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने और सीमा-पार लेनदेन को अधिक प्रभावी बनाने पर ज़ोर दिया गया था।
सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी क्या है?
- परिचय: सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) किसी देश की फिएट मुद्रा का डिजिटल रूप है, जिसे सीधे उसके केंद्रीय बैंक द्वारा जारी और समर्थित किया जाता है। यह केंद्रीय बैंक की देनदारी का प्रतिनिधित्व करती है, जैसे– भौतिक नकदी (नोट और सिक्के) या वाणिज्यिक बैंकों द्वारा केंद्रीय बैंक में रखे गए रिज़र्व।
- क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटकॉइन के विपरीत, जो विकेंद्रीकृत और आमतौर पर अस्थिर होती हैं, CBDC केंद्रीकृत होती है, मूल्य में स्थिर (राष्ट्रीय मुद्रा से जुड़ी हुई) होती है और कानूनी मुद्रा के रूप में काम करती है।
- कार्यप्रणाली: CBDC में सुरक्षा, अखंडता और प्रमाणीकरण सुनिश्चित करने के लिये क्रिप्टोग्राफी का उपयोग किया जाता है।
- तकनीक में डेटा सुरक्षा के लिये एंक्रिप्शन और लेन-देन को अधिकृत करने हेतु डिजिटल हस्ताक्षर शामिल हैं।
- प्राइवेसी बढ़ाने वाली तकनीकें ज़ीरो-नॉलेज प्रूफ गुमनामी और नियमन के बीच संतुलन बनाए रखती हैं।
- उद्देश्य: इसका लक्ष्य भुगतान प्रणालियों को आधुनिक बनाना है, खासकर निजी डिजिटल मुद्राओं (जैसे– स्टेबलकॉइन) के बढ़ते प्रभाव और नकद उपयोग में कमी के दौर में, ताकि वित्तीय प्रणाली को अधिक कुशल तथा समावेशी बनाया जा सके।
- लाभ:
- मुख्य विशेषताएँ:
- जारीकर्त्ता और समर्थन: इसे केवल केंद्रीय बैंक द्वारा ही जारी किया जाता है, जो सरकार के पूर्ण विश्वास तथा क्रेडिट को सुनिश्चित करता है। इसे निजी संस्थाएँ या वाणिज्यिक बैंक जारी नहीं करते।
- डिजिटल प्रकृति: यह केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप में अस्तित्व में होती है, जिसे केंद्रीकृत लेज़र, डिस्ट्रिब्यूटेड लेज़र टेक्नोलॉजी (DLT) या हाइब्रिड प्रणालियों पर दर्ज किया जाता है। यह मुख्य निपटान (सेटलमेंट) के लिये मध्यस्थों पर निर्भर हुए बिना निर्बाध डिजिटल भुगतान को संभव बनाती है।
- उद्देश्य और उपलब्धता: इसे भौतिक नकदी और मौजूदा बैंक जमा के पूरक (न कि उनके स्थानापन्न) के रूप में डिज़ाइन किया गया है। यह भुगतान का माध्यम, मूल्य की इकाई तथा मूल्य-संचय का साधन के रूप में कार्य करती है।
- प्रकार: रिटेल CBDC (rCBDC) आम जनता के दैनिक भुगतानों, जैसे– स्थानांतरण और खरीदारी के लिये होती है। होलसेल CBDC (wCBDC) केवल बैंकों और संस्थानों तक सीमित रहती है, जिसका उपयोग अंतर-बैंक निपटान और बड़े लेन-देन के लिये किया जाता है।
- मौजूदा डिजिटल धन से भिन्नता: आज अधिकांश धन पहले से ही डिजिटल रूप में है (जैसे– बैंक खातों में जमाराशि या मोबाइल भुगतान), लेकिन वे वाणिज्यिक बैंकों की देनदारियाँ होती हैं। इसके विपरीत, CBDC केंद्रीय बैंक पर प्रत्यक्ष दावा होती है, जो नकदी के समान उच्चतम स्तर की सुरक्षा और तरलता प्रदान करती है।
- वैश्विक परिप्रेक्ष्य: बहामास 2020 में सैंड डॉलर नामक देशव्यापी CBDC लॉन्च करने वाला पहला देश बना, इसके बाद नाइजीरिया ने भी वर्ष 2020 में ईनाइरा (eNaira) जारी किया। विश्व के 90% से अधिक केंद्रीय बैंक CBDC की संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं तथा लगभग 60% पहले से ही परीक्षण या प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चला रहे हैं।
- हालाँकि किसी भी BRICS सदस्य देश ने अभी तक पूर्ण रूप से डिजिटल मुद्रा लॉन्च नहीं की है, लेकिन पाँचों देश पायलट परियोजनाएँ चला रहे हैं।
डिजिटल मुद्रा
- डिजिटल मुद्रा: डिजिटल मुद्रा वह मुद्रा होती है जो केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप में अस्तित्व में रहती है। इसे डिजिटल मनी, इलेक्ट्रॉनिक मनी या साइबरकैश भी कहा जाता है और इसके लेन-देन कंप्यूटर या इंटरनेट से जुड़े वॉलेट्स के माध्यम से किये जाते हैं।
- डिजिटल मुद्रा के माध्यम से अमेरिकी डॉलर या SWIFT प्रणाली का उपयोग किये बिना भी भुगतान किया जा सकता है। साथ ही, डिजिटल मुद्रा को शर्तों के साथ प्रोग्राम किया जा सकता है, जैसे कि उसे व्यय करने के लिये समय-सीमा निर्धारित करना।
- प्रमुख विशेषताएँ: यह केंद्रीकृत होती है, जैसे सेंट्रल बैंक द्वारा जारी फिएट करेंसी, या विकेंद्रीकृत, जैसे बिटकॉइन और एथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी, जो ट्रांजेक्शन को सुरक्षित करने के लिये क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करती हैं।
- डिजिटल करेंसी के प्रकार: मोटेतौर पर डिजिटल मुद्राओं को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:
- क्रिप्टोकरेंसी (उदाहरण: बिटकॉइन)
- वर्चुअल करेंसी (उदाहरण: गेमिंग टोकन)
- सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC)
- CBDC बनाम फिएट मुद्रा: फिजिकल करेंसी के विपरीत, डिजिटल करेंसी का कोई मूर्त रूप नहीं होता। CBDC पूर्णतः डिजिटल रूप में मौज़ूद होती हैं और पारंपरिक फिएट करेंसी के पूरक या प्रतिस्थापन के रूप में कार्य करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) क्या है?
CBDC किसी देश की फिएट करेंसी का एक डिजिटल रूप है, जिसे सेंट्रल बैंक द्वारा जारी किया जाता है। यह कानूनी निविदा के रूप में कार्य करती है और सेंट्रल बैंक पर एक सुरक्षित दावा प्रदान करती है।
2. CBDC बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी से कैसे भिन्न है?
CBDC केंद्रीकृत, स्थिर और सरकार द्वारा समर्थित हैं, जबकि क्रिप्टोकरेंसी विकेंद्रीकृत, अस्थिर और कानूनी निविदा नहीं होती हैं।
3. कौन-से ब्रिक्स देश CBDC का पायलट परीक्षण कर रहे हैं?
ब्राज़ील (Drex), रूस (डिजिटल रूबल), भारत (e-Rupee), चीन (e-CNY) CBDC का पायलट परीक्षण कर रहे हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका शोध चरण में बना हुआ है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2023)
- यूएस डॉलर या एसडब्ल्यूआईएफटी प्रणाली का प्रयोग किये बिना डिजिटल मुद्रा में भुगतान करना संभव है।
- कोई डिजिटल मुद्रा इसके अंदर प्रोग्रामिंग प्रतिबंध, जैसे कि इसके व्यय के समय-ढाँचे के साथ वितरित की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा /से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)

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