सामाजिक न्याय
विश्व क्षय रोग दिवस 2026
- 25 Mar 2026
- 96 min read
प्रिलिम्स के लिये: क्षय रोग (TB), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), प्रधानमंत्री क्षय रोग मुक्त भारत अभियान, BPaLM उपचार योजना, नि-क्षय मित्र, नि-क्षय पोषण योजना (NPY)
मेन्स के लिये: राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत भारत की प्रगति और चुनौतियाँ, दवा-प्रतिरोधी क्षय रोग
चर्चा में क्यों?
प्रतिवर्ष 24 मार्च को वैश्विक स्तर पर विश्व क्षय रोग दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि तपेदिक/क्षय रोग के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के प्रति जन जागरूकता बढ़ाई जा सके।
सारांश
- विश्व क्षय रोग दिवस प्रतिवर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है, ताकि क्षय रोग के वैश्विक प्रभाव और इसे समाप्त करने के प्रयासों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
- भारत ने क्षय रोग नियंत्रण में बेहतर पहचान, उच्च उपचार कवरेज और कम मृत्यु दर के साथ प्रबल प्रगति की है किंतु फिर भी यह कई अज्ञात मामलों के साथ एक बहुत उच्च वैश्विक बोझ वहन करता है।
- भारत में क्षय रोग गरीबी, कुपोषण, दवा-प्रतिरोध और कमज़ोर पहचान के कारण बढ़ता है, इसलिये उन्मूलन हेतु बेहतर निदान, पोषण समर्थन, तकनीकी उपयोग और सामुदायिक स्तर पर हस्तक्षेप आवश्यक हैं।
विश्व क्षय रोग (TB) दिवस का महत्त्व क्या है?
- ऐतिहासिक संदर्भ: 24 मार्च, 1882 के दिन को स्मरण करता है, जब डॉ. रॉबर्ट कोच ने माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया की अपनी महत्त्वपूर्ण खोज की घोषणा की, जो क्षय रोग का कारण बनने वाला जीवाणु है।
- इस खोज ने रोग के निदान और उपचार के मार्ग को प्रशस्त किया।
- वैश्विक विषय (2026): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2026 का विषय घोषित किया है: ‘Yes! We can End TB !’ अर्थात हाँ! हम क्षय रोग समाप्त कर सकते हैं! यह विषय केवल वैश्विक महत्त्वाकांक्षाओं को व्यक्त करने के बजाय स्थानीय स्तर पर कार्रवाई को बढ़ावा देने पर ज़ोर देता है, जिसमें दृढ़ देश-स्तरीय नेतृत्व, त्वरित नवाचार अपनाना तथा समुदाय को सक्रिय करना शामिल है।
- क्षय रोग समाप्त करना एक रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक विकल्प है। क्षय रोग में हर 1 अमेरिकी डॉलर का निवेश स्वास्थ्य और आर्थिक लाभ के रूप में 43 अमेरिकी डॉलर तक ला सकता है।
- विश्व क्षय रोग दिवस 2026 संबंधी भारत की पहलें:
- क्षय रोग मुक्त भारत अभियान (100 दिन): त्वरित क्षय रोग मामलों की पहचान और उपचार पालन में सुधार के लिये मिशन-आधारित अभियान।
- क्षय रोग मुक्त भारत ऐप: रोगी ट्रैकिंग, अंतिम-मील सेवा वितरण और उपचार अनुपालन हेतु डिजिटल उपकरण।
- क्षय रोग मुक्त शहरी वार्ड पहल: उच्च-संक्रमण वाले वार्डों को लक्षित करते हुए क्षय रोग उन्मूलन हेतु सूक्ष्म-स्तरीय शहरी रणनीति।
भारत में क्षय रोग की स्थिति क्या है?
- भारत में क्षय रोग (TB): WHO की वैश्विक क्षय रोग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत में वैश्विक क्षय रोग मामलों का लगभग 25% हिस्सा है। फिर भी, उच्च बोझ वाले देशों में भारत ने महत्त्वपूर्ण कमी हासिल की है और उपचार कवरेज 53% (2015) से बढ़कर 92% (2024) हो गया है।
- भारत में क्षय रोग मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जो वर्ष 2015 के 28 प्रति लाख से घटकर 2024 में 21 प्रति लाख रह गई है। साथ ही प्रधानमंत्री क्षय रोग मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उपचार सफलता दर 90% तक पहुँच गई है, जो 88% के वैश्विक औसत से अधिक है।
- उपलब्धियों के बावजूद वैश्विक क्षय रोग मृत्यु दर में भारत का हिस्सा अभी भी लगभग 28% है। इसके अतिरिक्त लगभग एक लाख मामले अभी भी 'मिसिंग' (अनिर्धारित) हैं, जो वैश्विक पहचान अंतराल में 8.8% का योगदान देते हैं। इस सूची में भारत इंडोनेशिया (10%) के बाद दूसरे स्थान पर है।
- भारत का क्षय रोग उन्मूलन लक्ष्य: वर्ष 2020 में भारत ने वैश्विक 'सतत विकास लक्ष्य' (SDG 2030) से पाँच वर्ष पूर्व, यानी 2025 तक क्षय रोग उन्मूलन के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु 'संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम' (RNTCP) का नाम बदलकर 'राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम' (NTEP) कर दिया। हालाँकि भारत निर्धारित समय सीमा (2025) तक इस लक्ष्य को पूर्णतः प्राप्त नहीं कर सका है।
- क्षय रोग उन्मूलन को इस रूप में परिभाषित किया गया है कि प्रति वर्ष प्रति मिलियन आबादी में एक से कम सूचित मामला होना चाहिये।
- यह कार्यक्रम नेशनल स्ट्रैटेजिक प्लान (2017–25) द्वारा मार्गदर्शित है, जो DTPB (पता लगाना – उपचार करना – रोकथाम करना – निर्माण करना) दृष्टिकोण को अपनाकर क्षय रोग नियंत्रण को व्यापक रूप से संबोधित करता है।
- जहाँ WHO की 'एंड टीबी स्ट्रैटेजी' वर्ष 2030 तक (2015 के स्तर से) क्षय रोग के मामलों में 80% और मृत्यु दर में 90% की कमी का लक्ष्य रखती है, वहीं भारत ने वर्ष 2015 से 2024 के बीच नए मामलों में 21% और मृत्यु दर में 28% की गिरावट दर्ज की है। यह प्रगति सराहनीय है, किंतु 'उन्मूलन लक्ष्यों' को प्राप्त करने हेतु अभी भी एक व्यापक अंतराल (Gap) विद्यमान है।
- क्षय रोग उन्मूलन में भारत की प्रगति
- व्यापक स्तर पर शीघ्र पहचान: भारत के पास अब विश्व का सबसे बड़ा क्षय रोग लैब नेटवर्क है और 92% मरीज़ों को आरंभ में ही रिफैम्पिसिन दवा-प्रतिरोध परीक्षण प्रदान किया जाता है। इस स्तर की शीघ्र पहचान संक्रमण को स्रोत पर ही रोकने में मदद करती है।
- लघु उपचार अवधि: BPaLM (बेडाक्विलाइन, प्रीटोमैनिड, लाइनज़ोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन) व्यवस्था के कार्यान्वयन से दवा-प्रतिरोधी क्षय रोग (DR-TB) की उपचार अवधि 18-24 महीने से घटकर मात्र 6 महीने रह गई है। यह प्रोटोकॉल रोगी के उपचार अनुपालन में सुधार लाने में निर्णायक है।
- सभी-मौखिक MDR-क्षय रोग उपचार ने सुरक्षा बढ़ाई, उपचार छोड़ने की दर घटाई, और सफल उपचार परिणामों को बढ़ाया।
- विकेंद्रीकृत देखभाल: 1.78 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर और नि-क्षय मित्र ने परीक्षण और उपचार तक पहुँच को बेहतर बनाया।
- पोषण सहायता: नि-क्षय पोषण योजना (NPY) के अंतर्गत वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके माध्यम से उपचार की पूरी अवधि के दौरान प्रत्येक रोगी को 3,000 से 6,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है, ताकि उपचार के प्रति निरंतरता और शीघ्र स्वस्थ होने को सुनिश्चित किया जा सके।
क्षय रोग उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
- दवा-प्रतिरोधी क्षय रोग (MDR/XDR-TB) का संकट: भारत में वैश्विक मल्टी-ड्रग-रेज़िस्टेंट (MDR) और रिफैम्पिसिन -प्रतिरोधी क्षय रोग मामलों का लगभग 32% हिस्सा है।
- दवा-प्रतिरोधी क्षय रोग का उपचार जटिल, अत्यधिक विषैला, महंगा और काफी लंबा होता है। जहाँ नए (दवा-संवेदनशील) क्षय रोग मामलों में उपचार सफलता दर लगभग 90% है, वहीं MDR-क्षय रोग मामलों में यह लगभग 77% तक गिर जाती है।
- सह-रुग्णता: यदि रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर हो, तो केवल चिकित्सकीय हस्तक्षेप से क्षय रोग का उपचार संभव नहीं है।
- कुपोषण भारत में क्षय रोग का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण है और यह लगभग 35% सभी सक्रिय मामलों से जुड़ा हुआ है।
- उच्च-भार वाले राज्यों (जैसे– बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश) में एनीमिया और अवरुद्ध विकास (Stunting) की व्यापकता तथा मधुमेह (2024 में लगभग 3.2 लाख क्षय रोग मामले मधुमेह से जुड़े थे) एवं HIV की बढ़ती दरें क्षय रोग के जीवाणु के पनपने के लिये अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करती हैं।
- निदानात्मक अंतर: सामाजिक बहिष्कार का डर, विवाह में अस्वीकृति (विशेषकर युवतियों के लिये) और रोज़गारहीन होने का जोखिम बड़ी मात्रा में रिपोर्टिंग में कमी का कारण बनते हैं।
- कई मरीज़ लक्षण छुपा देते हैं या थोड़ा बेहतर महसूस करने पर उपचार बीच में छोड़ देते हैं।
- प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक क्षय रोग मामले ‘मिसिंग’ (जो मुख्य रूप से अनिर्धारित हैं या निजी क्षेत्र में अनौपचारिक उपचार ले रहे हैं) बने रहते हैं, जो समुदायों में रोग के सक्रिय संचरक के रूप में कार्य करते हैं।
- हालाँकि त्वरित आणविक परीक्षण, जैसे– Truenat और CBNAAT का विस्तार हुआ है, ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में इन परीक्षणों तक तत्काल पहुँच असमान बनी हुई है। इसके कारण लोग अक्सर पुरानी और कम संवेदनशील बलगम माइक्रोस्कोपी पर निर्भर रहते हैं।
- आपूर्ति शृंखला में व्यवधान: कई राज्यों में महत्त्वपूर्ण प्रथम-पंक्ति और द्वितीय-पंक्ति की दवाओं की बार-बार होने वाली कमी मरीज़ों को दवा छोड़ने के लिये मजबूर करती है।
- सामाजिक-आर्थिक निर्धारक और प्रवासन: क्षय रोग मूल रूप से गरीबी की बीमारी है। शहरी झुग्गियों में भीड़भाड़ वाली आवासन स्थितियाँ और खराब इनडोर वेंटिलेशन वायुजनित संचरण के लिये आदर्श वातावरण प्रदान करते हैं।
- अनौपचारिक श्रम बल का चक्रीय प्रवासन स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं के लिये मरीज़ों को ट्रैक करना और अनइंट्रप्टेड डायरेक्टली ऑब्ज़र्व्ड ट्रीटमेंट (DOTS) सुनिश्चित करना अत्यधिक कठिन बना देता है।
- फंडिंग और अनुसंधान एवं विकास की कमी: अत्यधिक प्रभावी क्षय रोग वैक्सीन (वर्तमान BCG वैक्सीन केवल गंभीर चाइल्डहुड क्षय रोग में प्रभावी है) और सस्ते प्वाइंट-ऑफ-केयर नैदानिक उपकरणों के विकास के लिये अनुसंधान एवं विकास निधि के निर्धारित लक्ष्यों से काफी कम है।
भारत में क्षय रोग उन्मूलन के प्रयासों को कौन-से उपाय सुदृढ़ कर सकते हैं?
- स्पर्शोन्मुख वाहकों को लक्षित करना: राष्ट्रीय क्षय रोग व्यापकता सर्वेक्षण से पता चला कि भारत में क्षय रोग के लगभग आधे मामले उप-नैदानिक (स्पर्शोन्मुख) हैं।
- केवल लक्षण-आधारित जाँच पर निर्भर रहना अब व्यावहारिक नहीं है। समुदायों में "मूक" संचारकों की पहचान करने के लिये AI-सक्षम पोर्टेबल चेस्ट एक्स-रे (CXR) और नॉन-इनवेसिव टंग/नोज़ स्वैब का बड़े पैमाने पर रोलआउट किया जाना चाहिये।
- ड्रग रजिस्टेंट से निपटना: तीव्र जाँच से निदान में विलंब कम होता है, जिससे रिफैम्पिसिन रजिस्टेंट की तुरंत पहचान हो जाती है, ताकि मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) वाले मरीज़ों को अप्रभावी प्रथम-पंक्ति की दवाओं पर न रखा जाए।
- जनजातीय-केंद्रित वित्तपोषण: अनुसूचित जनजातियों में क्षय रोग की व्यापकता राष्ट्रीय औसत से लगभग 50% अधिक है।
- खनन प्रभावित जनजातीय क्षेत्रों में ज़िला खनिज फाउंडेशन (DMF) निधि का दोहन जैसे अभिनव स्थानीय वित्तपोषण तंत्र का उपयोग करके स्थानीय नैदानिक और पोषण संबंधी बुनियादी ढाँचे को उन्नत किया जा सकता है।
- डिजिटल ट्रैकिंग: हाल ही में लॉन्च किया गया क्षय रोग मुक्त भारत ऐप जैसे उन्नत डिजिटल उपकरण मरीज़ों को वास्तविक समय में ट्रैक करने और घातक उपचार छोड़ने से रोकने में मदद करेंगे।
- कुपोषण से निपटना: नि-क्षय पोषण योजना के तहत वित्तीय सहायता को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से निर्बाध रूप से जोड़ा जाना चाहिये।
- इसके अतिरिक्त नि-क्षय मित्र पहल (जहाँ कॉरपोरेट और नागरिक, मरीज़ों को गोद लेकर भोजन की टोकरियाँ प्रदान करते हैं) को निरंतर विस्तार की आवश्यकता है।
- क्षय रोग निवारक उपचार (TPT): सक्रिय क्षय रोग रोगियों के घरेलू संपर्कों को निवारक उपचार सक्रिय रूप से प्रशासित करना ताकि बीमारी विकसित होने से पहले ही संचरण की शृंखला को तोड़ा जा सके।
निष्कर्ष
क्षय रोग-मुक्त भारत प्राप्त करने के लिये क्षय रोग को केवल एक रोगजनक के रूप में नहीं, बल्कि गरीबी और असमानता के एक लक्षण के रूप में देखना आवश्यक है। क्षय रोग की देखभाल को आवासीय वेंटिलेशन में सुधार, गरीबी उन्मूलन और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करने जैसे व्यापक विकासात्मक लक्ष्यों के साथ एकीकृत करना स्थायी उन्मूलन की अंतिम कुंजी है।
|
दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. सख्त कार्यक्रम-आधारित उपायों के बावज़ूद भारत वर्ष 2025 तक क्षय रोग को समाप्त करने के अपने महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने से चूक गया है। भारत के क्षय रोग उन्मूलन प्रयासों में बाधा डालने वाली प्रमुख नैदानिक और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. विश्व क्षय रोग दिवस क्या है और इसे 24 मार्च को क्यों मनाया जाता है?
यह डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा क्षय रोग सृजित करने वाले जीवाणु की खोज (1882) का प्रतीक है, जो क्षय रोग के वैश्विक प्रभाव के बारे में जागरूकता को बढ़ाता है।
2. विश्व क्षय रोग दिवस 2026 की थीम क्या है?
इसकी थीम है "हाँ! हम क्षय रोग खत्म कर सकते हैं!" (Yes! We can End TB !), जो स्थानीयकृत कार्रवाई और नवाचार-संचालित रणनीतियों पर केंद्रित है।
3. NTEP के तहत भारत का क्षय रोग उन्मूलन लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य वर्ष 2025 तक क्षय रोग का उन्मूलन करना था (जो प्राप्त नहीं हुआ), जिसे वैश्विक लक्ष्य 2030 से पहले प्राप्त किया गया।
4. भारत में क्षय रोग उन्मूलन में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी, कुपोषण, निदान में अंतराल, सामाजिक पूर्वाग्रह और प्रवासन प्रमुख बाधा बने हुए हैं।
5. वर्ष 2026 में क्षय रोग नियंत्रण के लिये कौन-सी प्रमुख पहलें शुरू की गईं?
क्षय रोग मुक्त भारत अभियान (100 दिन), क्षय रोग मुक्त भारत ऐप और शहरी वार्ड पहल का उद्देश्य पहचान, ट्रैकिंग और स्थानीयकृत हस्तक्षेप में सुधार करना है।
https://www.youtube.com/watch?v=Jz_j61XNmuc
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
मेन्स
प्रश्न. "एक कल्याणकारी राज्य की नैतिक अनिवार्यता के अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य संरचना धारणीय विकास की एक आवश्यक पूर्व शर्त है।" विश्लेषण कीजिये। (2021)
