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भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत की आर्थिक वृद्धि दर के संदर्भ में IMF का अनुमान

  • 21 Jan 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व आर्थिक मंच

मेन्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाने का कारण

चर्चा में क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund-IMF) ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिये भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.1 प्रतिशत से घटाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum- WEF) की वार्षिक शिखर बैठक से पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था की अद्यतन जानकारी देते हुए IMF ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिये भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 4.8 प्रतिशत तक घटा दिया।

वृद्धि दर अनुमान घटने का कारण:

  • IMF के अनुसार, मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (Non-Banking Financial Sector-NBFC) की तनावग्रस्तता तथा ग्रामीण क्षेत्र की आय में कमज़ोर वृद्धि के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान कम किया गया है।
  • भारत में घरेलू मांग में भी तेज़ी से कमी आई है। इसका कारण NBFC की तनावग्रस्तता और कर्ज वृद्धि में कमी है।

क्या हैं भारत की आर्थिक वृद्धि दर संबंधी आँकड़े?

  • IMF के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रहेगी।
  • IMF द्वारा वर्ष 2020 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के 5.8 प्रतिशत और 2021 में 6.5 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
  • जुलाई-सितंबर 2019 की तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर घटकर महज 4.5 प्रतिशत रह गई, जो कि लगभग साढ़े छह साल का निचला स्तर है।

वैश्विक परिदृश्य:

  • IMF के अनुसार, वर्ष 2020 में वैश्विक वृद्धि दर में तेज़ी के संदर्भ में स्थिति अभी काफी अनिश्चित बनी हुई है। इसका कारण अर्जेंटीना, ईरान और तुर्की जैसी तनावग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि तथा ब्राज़ील, भारत एवं मेक्सिको जैसे उभरते और अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहे विकासशील देश हैं।
  • वहीं दूसरी तरफ चीन की आर्थिक वृद्धि दर वर्ष 2020 में 0.2 प्रतिशत से छह प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। चीन के संबध में यह अनुमान चीन तथा अमेरिका के बीच व्यापार समझौते का परिणाम है।
  • IMF के अनुसार, वर्ष 2019, 2020 तथा 2021 के लिये वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर क्रमशः 2.9, 3.3, 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

आगे की राह:

  • भारतीय अर्थव्यवस्था ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ (Global Economic Growth) को बढ़ाने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, इसलिये भारत को तेज़ी से कदम उठाने होंगे।
  • स्थिर और टिकाऊ विकास के लिये अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने वाले गहन संरचनात्मक मुद्दों को संबोधित करने की आवश्यकता है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2025 तक अपनी अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन वर्तमान आर्थिक वृद्धि दर को देखते हुए यह लक्ष्य प्राप्त होना संभव नहीं है। यदि यही स्थिति कुछ समय तक और बनी रहेगी तो इससे उबरने में समय लगेगा, जो भारत की भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकता है। ध्यातव्य है कि GDP एक रोटी (Bread) के समान है यदि उसके हिस्सों को बड़ा करना है तो रोटी का आकार भी बड़ा करना पड़ेगा अर्थात् अन्य ज़रूरी क्षेत्रों जैसे- स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रतिरक्षा, अवसंरचना में अधिक खर्च करना है, तो इसके लिये आर्थिक वृद्धि दर का तीव्र होना आवश्यक है।

स्रोत- द हिंदू

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