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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 20 Nov, 2021
  • 21 min read
प्रारंभिक परीक्षा

हल्‍के लड़ाकू हेलीकॉप्‍टर

हाल ही में प्रधानमंत्री ने भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (HAL's LCH), के दो लघु ड्रोन ('SWITCH 10 UAV' और 'MR-20) वायु सेना को सौंपे।

  • एलसीएच मुख्यत: 'मेक इन इंडिया' योजना के अंतर्गत निर्मित है जिसे निजी उद्योग की भागीदारी के साथ बनाया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • एलसीएच हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के हेलीकॉप्टर डिवीज़न के लिये एक नया उपकरण है। यह दो इंजन वाला हेलीकॉप्टर 5 से 8 टन वर्ग का एक समर्पित लड़ाकू हेलीकॉप्टर है।
    • LCH में प्रभावी युद्धक भूमिकाओं के लिये उन्नत तकनीकों और स्टील्थ सुविधाओं को शामिल किया गया है और इसे शत्रु की वायु रक्षा, प्रतिवाद, अन्वेषण व बचाव, टैंक-रोधी, काउंटर सरफेस फोर्स ऑपरेशंस आदि जैसी भूमिकाओं को पूरा करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
    • LCH दुनिया का एकमात्र हमला करने वाला हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर की ऊँचाई पर हथियारों और ईंधन के काफी भार के साथ उतरने और उड़ान भर सकता है।
    • यह बर्फ की चोटियों पर माइनस 50 डिग्री सेल्सियस से लेकर रेगिस्तान में 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी प्रभावी है।
    • LCH को एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों के अलावा चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अंततः सेवा में तैनात किया जाएगा।
  • ‘स्विच 1.0 UAV’ and ‘MR-20:
    • ‘स्विच 1.0 UAV:
      • स्विच 1.0 यूएवी, 1.5 घंटे की उड़ान अवधि और 15 किलोमीटर की अपनी अद्वितीय क्षमताओं के साथ 4500 मीटर से अधिक ऊँचाई पर उड़ सकता है।
      • इसमें लगभग 90 मिनट का एंड्यूरेंस है तथा यह भारत की सीमाओं पर दिन और रात की निगरानी के लिये कठोर वातावरण और अत्यधिक ऊँचाई के तहत भारतीय सेना के निगरानी अभियानों का समर्थन करेगा।
    •  ‘MR-20’:
      • MR-20 हेक्साकॉप्टर ड्रोन 20 किलोग्राम तक का भार ले जाने की क्षमता रखता है।
      • इसका उपयोग भोजन, आवश्यक वस्तुओं, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, गोला-बारूद और हथियारों को अग्रेषण क्षेत्रों में ऊँचाई पर तैनात सैनिकों तक पहुँचाने के लिये किया जाएगा।

प्रारंभिक परीक्षा

विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना: MSME

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हाल ही में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSMEs) ने सेवा क्षेत्र के लिये विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (Special Credit Linked Capital Subsidy Scheme- SCLCSS) शुरू की है।

प्रमुख बिंदु 

  • विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना के बारे में:
    • यह योजना सेवा क्षेत्र में उद्यमों की प्रौद्योगिकी संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगी।
    • इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सूक्ष्म और लघु उद्यमों को बिना किसी क्षेत्र विशेष प्रतिबंध के प्रौद्योगिकी के उन्नयन पर संयंत्र और मशीनरी तथा सेवा उपकरणों की खरीद के लिये संस्थागत ऋण के माध्यम से 25% पूंजीगत अनुदान (सब्सिडी) दिये जाने का प्रावधान है। 
  • महत्त्व:
    • यह योजना  MSEs को प्रौद्योगिकी उन्नयन, MSMEs द्वारा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने, उत्पादकता में वृद्धि और निरंतर सुधार की संस्कृति को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगी।
    • यह MSMEs में नवाचार, डिज़िटल सशक्तीकरण और डिज़ाइन हस्तक्षेप को भी बढ़ावा देगा।
  • प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिये क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना:
    • इसे वर्ष 2000 में लॉन्च किया गया था।
    • योजना का उद्देश्य अनुमोदित निर्दिष्ट 51 उप-क्षेत्रों/उत्पादों में सुस्थापित और उन्नत प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिये 15% की अग्रिम पूंजी सब्सिडी (उनके द्वारा प्राप्त 1 करोड़ रुपए तक के संस्थागत वित्त पर) प्रदान करके MSEs में प्रौद्योगिकी उन्नयन की सुविधा प्रदान करना है। 
    • दूसरे शब्दों में योजना का मुख्य उद्देश्य अपने संयंत्र और मशीनरी को अत्याधुनिक तकनीक के साथ या बिना विस्तार के तथा नए MSEs के लिये अपग्रेड करना है, जिन्होंने योजना दिशा-निर्देशों के तहत विधिवत अनुमोदित उपयुक्त योग्य और सिद्ध तकनीक के साथ सुविधाएंँ प्रदान की हैं।

MSME

MSMEs क्षेत्र को बढ़ावा देने संबंधी पहलें

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (M/oMSME) खादी, ग्राम और कयर उद्योगों (Coir Industries) सहित MSME क्षेत्र की वृद्धि और विकास को बढ़ावा देकर एक जीवंत MSME क्षेत्र की कल्पना प्रस्तुत करता है।
  • MSMEs को प्रभावित करने वाले नीतिगत मुद्दों तथा इस क्षेत्र की कवरेज एवं निवेश सीमा को संबोधित करने के लिये वर्ष 2006 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम को अधिसूचित किया गया था।
  • प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): यह नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना और देश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिये एक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना है।  
  • पारंपरिक उद्योगों के उन्‍नयन एवं पुनर्निर्माण के लिये कोष की योजना (SFURTI): इस योजना का उद्देश्य कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों को समूहों में व्यवस्थित करना तथा इस प्रकार उन्हें वर्तमान बाज़ार परिदृश्य में प्रतिस्पर्द्धी बनाने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु एक योजना (ASPIRE): यह योजना 'कृषि आधारित उद्योग में स्टार्टअप के लिये फंड ऑफ फंड्स', ग्रामीण आजीविका बिज़नेस इनक्यूबेटर (LBI), प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर (TBI) के माध्यम से नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देती है।
  • MSME को वृद्धिशील ऋण प्रदान करने के लिये ब्याज सबवेंशन योजना: यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा शुरू की गई थी, जिसमें सभी वैधानिक MSMEs को उनकी वैधता की अवधि के दौरान उनके बकाया, वर्तमान/वृद्धिशील सावधि ऋण/कार्यशील पूंजी पर 2% तक की राहत प्रदान की जाती है।
  • सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिये क्रेडिट गारंटी योजना: ऋण के आसान प्रवाह की सुविधा के लिये शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत MSMEs को दिये गए संपार्श्विक मुक्त ऋण हेतु गारंटी कवर प्रदान किया जाता है।
  • सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP): इसका उद्देश्य MSEs की उत्पादकता और प्रतिस्पर्द्धात्मकता के साथ-साथ क्षमता को बढ़ाना है।
  • चैंपियंस पोर्टल: इसका उद्देश्य भारतीय MSMEs की शिकायतों को हल करके और उन्हें प्रोत्साहन, समर्थन प्रदान कर राष्ट्रीय और वैश्विक चैंपियन (CHAMPIONS) के रूप में स्थापित होने में सहायता करना है।
  • MSME समाधान: यह केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/सीपीएसई/राज्य सरकारों द्वारा विलंबित भुगतान के बारे में सीधे मामले दर्ज करने में सक्षम बनाता है।
  • उद्यम पंजीकरण पोर्टल: यह नया पोर्टल देश में एमएसएमई की संख्या के आधार पर डेटा एकत्र करने में सरकार की सहायता करता है।
  • एमएसएमई संबंध: यह एक सार्वजनिक खरीद पोर्टल है। इसे केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा एमएसई से सार्वजनिक खरीद के कार्यान्वयन की निगरानी के लिये शुरू किया गया था।

प्रारंभिक परीक्षा

परियोजना समहती: उड़ीसा

‘नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ प्राथमिक कक्षाओं में मातृभाषा में पढ़ाने पर ज़ोर देती है। हालाँकि जब इस प्रावधान को आदिवासी लोगों के विविध भाषा-आधार के संदर्भ में देखा जाता है, तो यह कार्य काफी कठिन प्रतीत होता है।

  • ऐसे परिदृश्य में बहुभाषी शिक्षा में ओडिशा का एक दशक लंबा प्रयोग महत्त्वपूर्ण साबित हो सकता है।
  • ‘मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षा’ (MTBMLE) का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि यह लुप्तप्राय जनजातीय भाषाओं को बचाने में मदद करती है।

प्रमुख बिंदु

  • ओडिशा सरकार के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास विभाग ने 'संहति' नामक एक परियोजना शुरू की है।
    • यह प्रारंभिक कक्षाओं में आदिवासी छात्रों के समक्ष मौजूद भाषा संबंधी मुद्दों को संबोधित करेगी।
    • इसके तहत विभाग की राज्य के 1,450 प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 2.5 लाख छात्रों को कवर करने की योजना है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (SCSTRTI) तथा जनजातीय भाषा और संस्कृति अकादमी (ATLC), भुवनेश्वर के साथ परियोजना को लागू किया जा रहा है।
  • बहुभाषी शिक्षा: संहति के तहत यह निर्णय लिया गया है कि प्राथमिक स्तर के सभी शिक्षकों को आदिवासी भाषाओं का कार्यात्मक ज्ञान और आदिवासी छात्रों के साथ संवाद करने के तरीके प्रदान किये जाएंगे।
  • बहुभाषी शिक्षा: 'संहति' के तहत यह निर्णय लिया गया है कि प्राथमिक स्तर के सभी शिक्षकों को आदिवासी भाषाओं का कार्यात्मक ज्ञान प्रदान किया जाएगा।
    • ओडिशा के आदिवासी समुदाय के बीच बोली जाने वाली 21 विविध भाषाएँ हैं। 21 भाषाओं में से संथाली एकमात्र ऐसी भाषा है जिसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है।
      • इसे इसकी पुरानी ‘ओल चिकी लिपि’ में पढ़ाया जाता है, जबकि बाकी आदिवासी भाषाओं में उड़िया लिपियाँ हैं।
    • केवल छह आदिवासी भाषाओं- संथाली, हो, सौरा, मुंडा और कुई की एक लिखित लिपि है।
    • ये छात्र एक बहुभाषी समूह हैं जो नियमित स्कूलों में एक-भाषी समूहों के विपरीत हैं।

आगे की राह

  • एक आदिवासी छात्र दुनिया को अपनी भाषा से देखता है। मातृभाषा आधारित शिक्षा एक स्वागत योग्य कदम है। ओडिशा में कुछ नागरिक समाज संगठन हैं जिन्होंने MTBMLE शिक्षा प्रणाली (जैसे कलिंग सामाजिक विज्ञान संस्थान) के आशाजनक मॉडलों का प्रदर्शन किया है।
  • आदिवासी भाषाओं को प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा के माध्यम के रूप में प्रयोग किया जाता है, इन भाषाओं को मानकीकृत करने की आवश्यकता है।
  • राज्य बोर्डों के पाठ्यक्रम, सरकारी पाठ्यपुस्तक के मानदंडों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आदिवासी भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों को विकसित करने का प्रयास किया जाना चाहिये।

विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 20 नवंबर, 2021

विश्व विरासत सप्ताह

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा प्रतिवर्ष 19 नवंबर से 25 नवंबर तक ‘विश्व विरासत सप्ताह’ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आम लोगों को समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करना और इसके संरक्षण हेतु प्रयास करना है। भारत में इस समारोह का आयोजन ‘भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण’ (ASI) द्वारा किया जाता है। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण राष्‍ट्र की सांस्‍कृतिक विरासतों के पुरातत्त्वीय अनुसंधान तथा संरक्षण के लिये एक प्रमुख संगठन है, जो कि मुख्य तौर पर प्राचीन स्‍मारको तथा पुरातत्त्वीय स्‍थलों एवं अवशेषों का रखरखाव करता है। विश्व विरासत सप्ताह के अवसर पर ‘भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण’ और कई अन्य संग्रहालयों द्वारा प्राचीन स्मारकों के महत्त्व व उनके संरक्षण को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम आयोजित किये हैं। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण संस्‍कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। वर्तमान में भारत में 40 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं जिनमें 32 सांस्कृतिक स्थल, 7 प्राकृतिक स्थल और 1 मिश्रित स्थल शामिल है। गौरतलब है कि हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने अपने 44वें सत्र के दौरान तेलंगाना के वारंगल में ‘काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर’ और गुजरात के हड़प्पा-युग के शहर ‘धौलावीरा’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया था। वहीं वर्तमान में देश में 3,691 स्मारक, पुरातत्त्व विभाग द्वारा संरक्षित किये गए हैं। सबसे अधिक 745 संरक्षित स्‍थल उत्तर प्रदेश में स्थित हैं।

रानी लक्ष्‍मीबाई

19 नवंबर, 2021 को रानी लक्ष्मीबाई की 193वीं जयंती मनाई गई। रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1828 को वाराणसी में हुआ था और उनके बचपन का नाम ‘मणिकर्णिका तांबे’ था। उन्होंने बचपन में ही घुड़सवारी, तलवारबाज़ी और निशानेबाज़ी जैसी कलाओं में निपुणता हासिल कर ली थी। वर्ष 1842 में 14 वर्ष की उम्र में इनका विवाह झाँसी के महाराजा ‘गंगाधर राव’ के साथ कर दिया गया, उसके बाद से इन्हें ‘लक्ष्मीबाई’ के नाम से जाना गया। महाराजा की मृत्यु के बाद अंग्रेज़ों ने ‘व्यपगत सिद्धांत’ (Doctrine of Lapse) का हवाला देते हुए महाराजा के दत्तक पुत्र दामोदर राव को झाँसी के सिंहासन का कानूनी उत्तराधिकारी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस सिद्धांत के मुताबिक, यदि ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण में आने वाली किसी रियासत के शासक के पास कानूनी तौर पर पुरुष उत्तराधिकारी नहीं है तो कंपनी द्वारा इस रियासत का अधिग्रहण कर लिया जाएगा। रानी लक्ष्मीबाई ने इस व्यवस्था का विरोध किया और जून 1857 में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में झाँसी में विद्रोह प्रारंभ हो गया। ज्ञात हो कि यह वही समय था जब मेरठ में कंपनी के भारतीय सिपाहियों ने विद्रोह किया था, तत्पश्चात् यह विद्रोह कानपुर, बरेली, झाँसी, दिल्ली, अवध आदि स्थानों तक फैल गया। 1857 के विद्रोह में रानी लक्ष्मीबाई की काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। झाँसी की सुरक्षा करते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ हुए युद्ध में 17 जून, 1858 को रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु हो गई।

इंदिरा गांधी

19 नवंबर, 2021 को उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुत्री इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर, 1917 को प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था। 1950 के दशक की शुरुआत में उन्होंने अनौपचारिक रूप से अपने पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू के निजी सहायक के रूप में कार्य किया। वर्ष 1955 में वे काॅन्ग्रेस कार्यसमिति में शामिल हुईं और वर्ष 1959 में उन्हें काॅन्ग्रेस का अध्यक्ष चुन लिया गया। वर्ष 1964 में प्रधानमंत्री नेहरू की मृत्यु के बाद उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के नेतृत्त्व में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया, किंतु लाल बहादुर शास्त्री की आकस्मिक मृत्यु के बाद वर्ष 1966 में वे देश की 5वीं प्रधानमंत्री बनीं। वर्ष 1975 में उनके कार्यकाल के दौरान भारत में आपातकाल लागू किया गया, जो कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ‘काला अध्याय’ माना जाता है। 31 अक्तूबर, 1984 को दो सिख अंगरक्षकों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2021

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2021' में स्वच्छ एवं अपशिष्ट मुक्त होने संबंधी स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाले 342 शहरों को सम्मानित करेंगे। इसमें 9 पाँच सितारा शहर, 166 तीन सितारा शहर, 167 एक सितारा शहर शामिल हैं। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MOHUA) द्वारा शहरों को सम्मानित करने हेतु राजधानी दिल्ली स्थित ‘विज्ञान भवन’ में 'स्वच्छ अमृत महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ के इस छठे संस्करण में 4,320 शहरों ने हिस्सा लिया था, जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण बन गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, 1,100 से अधिक अतिरिक्त शहरों में अपशिष्ट के स्रोत को अलग करने का कार्य शुरू कर दिया गया है, जबकि करीब 1,800 शहरी स्थानीय निकाय सफाई कर्मचारियों को कल्याणकारी लाभ प्रदान कर रहे हैं।


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