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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 12 Nov, 2022
  • 14 min read
प्रारंभिक परीक्षा

आचार्य कृपलानी

हाल ही में प्रधानमंत्री ने आचार्य कृपलानी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

Acharya-Kripalani

आचार्य कृपलानी:

  • परिचय:
    • उनका जन्म 11 नवंबर,1888 को सिंध (हैदराबाद) में हुआ था।
    • उनका मूल नाम जीवतराम भगवानदास कृपलानी था, लेकिन उन्हें आचार्य कृपलानी के नाम से जाना जाता था। वह एक स्वतंत्रता सेनानी, भारतीय राजनीतिज्ञ और शिक्षाविद् थे।
  • शिक्षाविद्:
    • वर्ष 1912 से 1927 तक उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में पूरी तरह से शामिल होने से पूर्व विभिन्न स्थानों पर अध्यापन का कार्य किया।
    • वर्ष 1922 के आसपास जब वे महात्मा गांधी द्वारा स्थापित गुजरात विद्यापीठ में अध्यापन कार्य कर रहे थे, तब उन्हें 'आचार्य' उपनाम प्राप्त हुआ।
  • पर्यावरणविद्:
    • कृपलानी जी विनोबा भावे के साथ 1970 के दशक में पर्यावरण के संरक्षण एवं बचाव गतिविधियों में शामिल रहे।
  • स्वतंत्रता सेनानी:
    • वह असहयोग आंदोलन (1920-22) और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930 में शुरू) तथा भारत छोड़ो आंदोलन (1942) का हिस्सा रहे।
    • स्वतंत्रता के समय वे भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस (INC) के अध्यक्ष थे। उन्होंने भारत की अंतरिम सरकार (1946-1947) और भारत की संविधान सभा में योगदान दिया।
  • राजनीतिक जीवन:
    • आज़ादी के बाद कॉन्ग्रेस छोड़कर वह किसान मज़दूर प्रजा पार्टी (KMPP) के संस्थापकों में से एक बन गए।
    • वह 1952, 1957, 1963 और 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में लोकसभा के लिये चुने गए।
    • उन्होंने भारत-चीन युद्ध (1962) के तुरंत बाद वर्ष 1963 में लोकसभा में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।
      • वर्ष 1963 में कॉन्ग्रेसी नेता सुचेता कृपलानी, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, जो देश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री थीं, जबकि उनके पति आचार्य कृपलानी कॉन्ग्रेस के विरोधी बने रहे।
    • वह नेहरू की नीतियों और इंदिरा गांधी के शासन के आलोचक थे। उन्हें आपातकाल (1975) के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया।
  • पुस्तके:
    • उनकी आत्मकथा 'माई टाइम्स' (My Times) वर्ष 2004 में मरणोपरांत प्रकाशित हुई।
    • कृपलानी, गांधी: हिज़ लाइफ एंड थॉट (1970) सहित कई पुस्तकों के लेखक थे।

स्रोत: पी.आई.बी.


प्रारंभिक परीक्षा

नादप्रभु केम्पेगौड़ा

हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 108 फुट ऊँची प्रतिमा का अनावरण और बंगलूरू हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 का उद्घाटन किया, जिसका नाम 16वीं शताब्दी के प्रमुख व्यक्तित्त्व के नाम पर रखा गया है जिन्हें इस शहर की स्थापना करने का श्रेय दिया जाता है।

  • इस प्रतिमा को "स्टैच्यू ऑफ प्रॉस्पेरिटी” कहा जाता है।

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‘स्टैच्यू ऑफ प्रॉस्पेरिटी’ की मुख्य विशेषताएँ:

  • 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' के अनुसार, यह किसी शहर के संस्थापक की पहली और सबसे ऊँची कांस्य प्रतिमा है।
  • प्रसिद्ध मूर्तिकार और पद्मभूषण से सम्मानित राम वनजी सुतार ने प्रतिमा को डिज़ाइन किया है।
    • सुतार ने गुजरात में 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' और बेंगलूरू के 'विधान सौध' में महात्मा गांधी की प्रतिमा का निर्माण कराया था।

अनावरण से पहले राज्य भर में 22,000 से अधिक स्थानों से 'मृतिका' (पवित्र मिट्टी) एकत्र की गई थी, जिसे प्रतिमा के चार टावरों में से एक के नीचे पवित्र मिट्टी को प्रतीकात्मक रूप से मिलाया गया था।

नादप्रभु केम्पेगौड़ा:

  • परिचय:
    • उनका जन्म वर्ष 1513 में येलाहंका के पास एक गाँव में हुआ था।
    • वह 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के तहत सामंत थे।
    • वह लिंगायतों के बाद कर्नाटक के दूसरे सबसे प्रभावशाली समुदाय वोक्कालिगा समुदाय के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं।
  • शिक्षा:
    • उन्होंने कुंडापुरा (वर्तमान हेसरघट्टा) के पास गुरुकुल में नौ वर्ष तक अध्ययन किया, जहाँ उन्होंने शासन और मार्शल आर्ट कला की शिक्षा प्राप्त की।
  • उपलब्धियाँ:
    • उन्हें व्यापक रूप से बंगलूरू कर्नाटक के संस्थापक के रूप में स्वीकार किया जाता है।
      • ऐसा माना जाता है कि उन्होंने अपने मंत्री के साथ शिकार करने के दौरान एक नए शहर के विचार की कल्पना की और बाद में प्रस्तावित शहर के चारों कोनों में मीनारें खड़ी करके इसके क्षेत्र को चिह्नित किया।
    • पेयजल और कृषि की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये शहर में लगभग 1,000 झीलों को विकसित करने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
    • केम्पेगौड़ा को मोरासु वोक्कालिगा की एक महत्त्वपूर्ण प्रथा 'बांदी देवारू' के नाम से प्रचलित एक रिवाज के दौरान एक अविवाहित महिला के बाएँ हाथ की उंगलियाँ काटने की प्रथा को खत्म करने का श्रेय दिया जाता है।
  • मृत्यु:
    • लगभग 56 वर्षों तक शासन करने के पश्चात् वर्ष 1569 में उनकी मृत्यु हो गई।
  • मान्यता:
    • राज्य सरकारों ने कई महत्त्वपूर्ण स्थलों का नाम उनके नाम पर रखा है, जैसे केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, केम्पेगौड़ा बस स्टैंड और नादप्रभु केम्पेगौड़ा मेट्रो स्टेशन।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


प्रारंभिक परीक्षा

कुलपतियों का चयन

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा कि कुलपति के पास विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में न्यूनतम 10 साल का शिक्षण अनुभव होना चाहिये और उसके नाम की सिफारिश एक खोज-सह-चयन समिति द्वारा की जानी चाहिये।

  • न्यायालय ने विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की धारा 10(3) का उल्लेख किया जिसमें प्रावधान था कि समिति को उनकी पात्रता और योग्यता के आधार परकुलपति के रूप में नियुक्ति के लिये तीन व्यक्तियों की एक सूची तैयार करनी चाहिये।

कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया:

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) विनियम, 2018 के अनुसार, एक विश्वविद्यालय का कुलपति, सामान्य रूप से, विधिवत गठित खोज सह चयन समिति द्वारा अनुशंसित तीन से पाँच नामों के पैनल से विज़िटर/ चांसलर द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • किसी भी विजिटर के पास यह अधिकार होता है कि पैनल द्वारा सुझाए गए नामों से असंतुष्ट होने की स्थिति में वह नामों के एक नए सेट की मांग कर सकता है।
  • भारतीय विश्वविद्यालयों के संदर्भ में, भारत का राष्ट्रपति सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों का पदेन विजिटर होता है और राज्यों के राज्यपाल संबंधित राज्य के सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होते हैं।
  • यह प्रणाली सभी विश्वविद्यालयों में अनिवार्य रूप से एक समान नहीं है। जहाँ तक अलग-अलग राज्यों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं का संबंध है, उनमे भिन्नताएँ होती हैं।
  • यदि राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम और UGC विनियम, 2018 के बीच मतभेद होता है जिसमे राज्य का कानून प्रतिकूल है, तो UGC विनियम, 2018 मान्य होगा।
    • अनुच्छेद 254 (1) के अनुसार, यदि किसी राज्य के कानून का कोई प्रावधान संसद द्वारा बनाए गए कानून के प्रावधान के विरुद्ध है, जिसे संसद अधिनियमित करने के लिये सक्षम है या समवर्ती सूची में किसी भी मामले के संबंध में किसी मौजूदा कानून के साथ है, तो संसदीय कानून राज्य के कानून पर हावी होगा।

कुलपति की भूमिका:

  • विश्वविद्यालय के संविधान के अनुसार, कुलपति (VC) को 'विश्वविद्यालय का प्रधान शैक्षणिक और कार्यकारी अधिकारी' माना जाता है।
  • विश्वविद्यालय के प्रमुख के रूप में, उससे विश्वविद्यालय के कार्यकारी और अकादमिक प्रभाग के बीच ‘मध्यस्थ' के रूप में कार्य करने की उम्मीद की जाती है।
  • इस अपेक्षित भूमिका को सुविधाजनक बनाने के लिये विश्वविद्यालयों को हमेशा अकादमिक उत्कृष्टता और प्रशासनिक अनुभव के अलावा मूल्यों, व्यक्तित्व विशेषताओं और अखंडता वाले व्यक्तियों की तलाश रहती है।
  • राधाकृष्णन आयोग (1948), कोठारी आयोग (1964-66), ज्ञानम समिति (1990) और रामलाल पारिख समिति (1993) की रिपोर्टों में समय-समय पर होने वाले बहुप्रतीक्षित परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता एवं प्रासंगिकता को बनाए रखने में कुलपति की भूमिका के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है।
  • वह न्यायालय, कार्यकारी परिषद, अकादमिक परिषद, वित्त समिति और चयन समितियों का पदेन अध्यक्ष होगा और कुलाधिपति की अनुपस्थिति में डिग्री प्रदान करने के लिये विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेगा।
  • यह देखना कुलपति का कर्तव्य होगा कि अधिनियम, विधियों, अध्यादेशों और विनियमों के प्रावधानों का पूरी तरह से पालन किया जाए तथा उसे इस कर्तव्य के निर्वहन के लिये आवश्यक शक्ति प्राप्त होनी चाहिये।

स्रोत: हिंदू


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 12 नवंबर, 2022

ाष्ट्रीय पक्षी दिवस

राष्ट्रीय पक्षी दिवस प्रतिवर्ष '12 नवंबर' को मनाया जाता है। 12 नवंबर डॉ. सलीम अली का जन्म दिवस है, वे विश्वविख्यात पक्षी विशेषज्ञ एवं प्रकृतिवादी थे। वे भारत के ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारत भर में व्यवस्थित रूप से पक्षी सर्वेक्षण का आयोजन किया और पक्षियों पर लिखी उनकी किताबों ने भारत में पक्षी-विज्ञान के विकास में काफी मदद की। भारत में इन्हें "पक्षी मानव" के नाम से भी जाना जाता था। पक्षी विशेषज्ञ सलीम अली के जन्म दिवस को 'भारत सरकार' द्वारा राष्ट्रीय पक्षी दिवस घोषित किया गया है। सलीम अली ने पक्षियों से संबंधित अनेक पुस्तकें लिखी थीं, 'बर्ड्स ऑफ़ इंडिया' इनमें सबसे लोकप्रिय पुस्तक है। डाक विभाग ने इनकी स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया है। वर्ष 1958 में सलीम अली को 'पद्मभूषण' तथा वर्ष 1976 में 'पद्मविभूषण' से सम्मानित किया गया था।

एशियाई मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप 

एशियाई मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में भारत की मुक्‍केबाज़ों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए चार स्‍वर्ण पदक जीते। परवीन, लवलीना बोरगोहाईं, स्‍वीटी बोरा और आल्फिया पठान ने शानदान प्रदर्शन करते हुए स्‍वर्ण पदक जीता। जॉर्डन में 11 नवंबर, 2022 को फाइनल में परवीन ने जापान की कितो माइ को जबकि लवलीना ने उज़्बेकिस्तान की रूजमेटोवा सोखिबा को हराया। स्‍वीटी ने कज़ाखस्‍तान की गुलसाया यरजे़हान को पराजित किया। आल्फिया पठान को इस्‍लाम हुसेली के डिस्‍क्‍वालिफाइड होने से स्‍वर्ण पदक मिला। इससे पहले मीनाक्षी ने रजत पदक हासिल किया। इस प्रकार भारतीय महिला मुक्‍केबाजों ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए चार स्‍वर्ण, एक रजत और दो कांस्‍य सहित कुल सात पदक जीते।एशियाई मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप एशिया में मुक्केबाज़ी के शौकीनों के लिये सबसे बड़ी प्रतियोगिता है। पहला टूर्नामेंट वर्ष 1963 में बैंकाक, थाईलैंड द्वारा आयोजित किया गया था। 


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