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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 04 Aug, 2022
  • 14 min read
प्रारंभिक परीक्षा

AIC और AICC हेतु आवेदनों की मांग: नीति आयोग

हाल ही में अटल इनोवेशन मिशन (AIM) और नीति आयोग ने अपने दो प्रमुख कार्यक्रमों अटल इनक्यूबेशन सेंटर (AIC) और अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर (ACIC) के लिये आवेदनों की मांग की है।

आवेदन की मांग:

  • यह अनुप्रयोगों के लिये मांग इन्क्यूबेटर के वर्तमान पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करने और उन्हें वैश्विक बेंचमार्क और सर्वोत्तम उपायों तक पहुँच प्रदान करने के लिये उठाया गया एक कदम है।
  • AIC और ACIC दोनों कार्यक्रम विश्व स्तरीय संस्थानों की स्थापना करके देश में नवोन्मेषी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने और उनका समर्थन करने की कल्पना करते हैं जो देश के नवोदित उद्यमियों को सहायता प्रदान करेंगे।
  • AIC और ACIC भारत के स्टार्ट-अप कार्यक्रम और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और आत्मनिर्भर भारत के प्रयासों को सशक्त करेंगे।

अटल इनक्यूबेशन केंद्र:

  • AIC भारत में स्टार्ट-अप और उद्यमियों के लिये एक सहायक पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हुए नवाचार और उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा देने के लिये  AIM और  नीति आयोग  की एक पहल है।
  • प्रत्येक AIC को 5 वर्षों की अवधि में 10 करोड़ तक का अनुदान दिया जाता है।
    • वर्ष 2016 के बाद से AIM ने 18 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में 68 अटल इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित किये हैं, जो 2700 से अधिक स्टार्ट-अप की सहायता करते हैं।

अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर

  • ACIC की परिकल्पना में स्टार्ट-अप और नवाचारी इको-सिस्टम को मद्देनजर रखते हुये देश के उन सभी हिस्सों को रखा गया है, जहाँ तक नवाचारी इको-सिस्टम या तो पहुँच नहीं है या कम मात्रा में पहुँच है।
  • प्रत्येक ACIC को 5 वर्षों की अवधि में 2.5 करोड़ रुपए तक का अनुदान दिया जाता है।
  • AIM ने देश भर में 14 अटल सामुदायिक नवाचार केंद्र स्थापित किये हैं।

अटल इनोवेशन मिशन (AIM):

  • परिचय:
    • अटल नवाचार मिशन (AIM) देश में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहल है।
    • इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने हेतु नए कार्यक्रमों और नीतियों को विकसित करना, विभिन्न हितधारकों के लिये मंच एवं सहयोग के अवसर प्रदान करना, लोगों के मध्य जागरूकता बढ़ाना और देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी हेतु एक छत्र/अंब्रेला संरचना (Umbrella Structure) विकसित करना है।
  • प्रमुख पहलें:
    • अटल टिंकरिंग लैब: भारतीय स्कूलों में समस्या समाधान मानसिकता विकसित करना।
    • अटल न्यू इंडिया चैलेंज: उत्पाद नवाचारों को बढ़ावा देना और उन्हें विभिन्न क्षेत्रों/मंत्रालयों की ज़रूरतों के अनुरूप बनाना।
    • मेंटर इंडिया अभियान: मिशन की सभी पहलों का समर्थन करने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र, कॉरपोरेट्स और संस्थानों के सहयोग से निर्मित एक राष्ट्रीय मेंटर नेटवर्क।
    • लघु उद्यमों हेतु अटल अनुसंधान और नवाचार (ARISE): सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में नवाचार एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करना।

स्रोत: पी.आई.बी.


प्रारंभिक परीक्षा

उद्यम पोर्टल

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री के अनुसार, लगभग एक करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने 25 महीनों के भीतर उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।

उद्यम पोर्टल:

  • परिचय:
    • इसे 1 जुलाई, 2020 को लॉन्च किया गया था।
    • यह MSMEs के पंजीकरण के लिये स्थापित एक ऑनलाइन प्रणाली है, जिसे केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
    • इसके अलावा, यह केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और वस्तु और सेवा कर नेटवर्क (GSTN) के डेटाबेस से जुड़ा हुआ है।
      • GSTN एक अनूठा और जटिल IT उद्यम है जो करदाताओं, केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के मध्य संचार और वार्ता के लिये  एक नेटवर्क स्थापित करता है।
    • यह पूरी तरह से ऑनलाइन है, इसके लिये किसी भी प्रकार के लिखित प्रमाण की आवश्यकता नहीं है और यह MSME के लिये व्यवसाय को सुगम बनाने की दिशा में एक कदम है।
  • महत्त्व:
    • MSMEs के लिये MSME मंत्रालय की योजनाओं का लाभ उठाने और बैंकों से प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र से ऋण के लिये उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक हैं।
      • साथ ही एमएसएमई देश के सकल घरेलू उत्पाद, निर्यात और रोज़गार सृजन में योगदान करते हैं।
  • नई पहल:
    • उद्यम डेटा साझा करने के लिये MSME मंत्रालय ने पर्यटन मंत्रालय और राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं।
    • इसके अलावा उद्यम पंजीकरण के लिये डिजी लॉकर सुविधा को भी जोड़ा जाएगा।

MSME

  • परिचय:
    • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक प्रमुख योगदानकर्त्ता है।
      • भारत में इस क्षेत्र ने देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और इसके निर्यात में योगदान के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है।
      • इस क्षेत्र ने विशेष रूप से भारत के अर्द्ध -शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता विकास के संबंध में भी बहुत योगदान दिया है
    • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) को दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है, अर्थात् विनिर्माण उद्यम और सेवा उद्यम।
      • उपकरणों में निवेश और वार्षिक कारोबार के आधार पर उद्यमों को वर्गीकृत किया गया है।

स्रोत:पी.आई.बी.


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 04 अगस्त, 2022

श्रीमद राजचंद्र  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 04 जुलाई, 2022 को गुजरात के धर्मपुर में श्रीमद राजचंद्र मिशन के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे और आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री वलसाड ज़िले के धर्मपुर में श्रीमद राजचंद्र अस्पताल का उद्घाटन करेंगे। इस अस्पताल पर लगभग दो सौ करोड़ रुपए की लागत आई, जिसमें 250 बेड व अन्य अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। इससे दक्षिणी गुजरात के लोगों को विशेष रूप से लाभ होगा। प्रधानमंत्री श्रीमद राजचंद्र पशु अस्पताल की भी आधारशिला रखेंगे। इस अस्पताल पर लगभग 70 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह अस्पताल पशुओं की देखभाल और उपचार के लिये पारंपरिक औषधि के साथ-साथ समग्र चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराएगा। प्रधानमंत्री महिलाओं के लिये श्रीमद राजचंद्र उत्कृष्टता केन्द्र की भी आधारशिला रखेंगे। यह उत्कृष्टता केन्द्र लगभग चालीस करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा और इसमें स्वविकास कार्यक्रमों के अलावा मनोरंजन की भी सुविधा उपलब्ध होगी। इसमें 700 से अधिक जनजातीय महिलाओं को रोज़गार मिलेगा और हज़ारों लोगों को आजीविका की व्यवस्था होगी

सुरेश एन. पटेल

सुरेश एन0 पटेल ने 3 अगस्त, 2022 को केन्‍द्रीय सतर्कता आयुक्‍त (CVC) के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में उन्‍होंने राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में पद की शपथ ग्रहण की। सुरेश एन0 पटेल आंध्र बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं जिन्हें अप्रैल 2020 में सतर्कता आयुक्त नियुक्त किया गया था तथा 24 जून, 2022 से कार्यवाहक CVC के रूप में सेवारत थे । केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission-CVC) एक शीर्षस्‍थ सतर्कता संस्‍थान है जो किसी भी कार्यकारी प्राधिकारी के नियंत्रण से मुक्‍त है तथा केंद्रीय सरकार के अंतर्गत सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करता है। यह केंद्रीय सरकारी संगठनों में विभिन्न प्राधिकारियों को उनके सतर्कता कार्यों की योजना बनाने, उनके निष्‍पादन, समीक्षा एवं सुधार करने के संबंध में सलाह देता है। वर्ष 1964 में के. संथानम की अध्यक्षता वाली भ्रष्टाचार निरोधक समिति (Committee on Prevention of Corruption) की सिफारिशों पर सरकार द्वारा CVC की स्थापना की गई थी। वर्ष 2003 में केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम (The Central Vigilance Commission Act) द्वारा आयोग के सांविधिक दर्जे की पुष्टि कर दी गई। यह एक स्वतंत्र निकाय है जो केवल संसद के प्रति ज़िम्मेदार है। यह अपनी रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति को सौंपता है।

प्रायोगिक शिक्षण कार्यक्रम  

जनजातीय छात्रों के लिये राष्ट्रीय शिक्षा सोसायटी (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा सीबीएसई ने 3 अगस्त, 2022 को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के लिये 21वीं सदी के कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रायोगिक शिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का पहला चरण  20 नवंबर, 2021 को शुरू किया गया था जिसमें 6 राज्यों, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में स्थित सीबीएसई और EMRS के 350 शिक्षकों ने भाग लिया था। दूसरे चरण में, 8 सप्ताह के पेशेवर विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले चरण में शामिल राज्यों के अलावा गुजरात, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और उत्तराखंड के EMRS के 300 शिक्षकों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। 21वीं सदी के लिये प्रायोगिक शिक्षण कार्यक्रम को शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के लिये एक ऑनलाइन कार्यक्रम के रूप में परिकल्पित किया गया है ताकि उन्हें कक्षा में शिक्षण को वास्तविक जीवन के अनुभवों के अनुकूल बनाने में मदद मिल सके। EMRS पूरे भारत में भारतीय जनजातियों (STs) के लिये मॉडल आवासीय विद्यालय बनाने की एक योजना है। इसकी शुरुआत वर्ष 1997-98 में हुई थी। जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा शिंदे (नासिक) में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय की योजना आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये बनाई गई है। EMRS में सीबीएसई पाठ्यक्रम का अनुसरण किया जाता है। 


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