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डेली न्यूज़

  • 02 May, 2020
  • 49 min read
जीव विज्ञान और पर्यावरण

‘बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान’ संबंधी मुद्दा

प्रीलिम्स के लिये:

बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान

मेन्स के लिये:

वन्य जीवों के संरक्षण संबंधी मुद्दे

चर्चा में क्यों?

बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान (Bannerghatta Biological Park) ने ‘एनिमल एडॉप्टेशन प्रोग्राम’ (Animal Adoption Programme) के तहत नागरिकों को एक वर्ष के लिये उद्यान के वन्य जीवों को गोद लेने की अनुमति प्रदान की है।

प्रमुख बिंदु:

  • गौरतलब है कि बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान के वन्य जीवों को गोद लेने हेतु नागरिकों को कुछ धनराशि अदा करनी होगी।
    • भारतीय कोबरा (Indian Cobra) तथा एशियाई हाथी (Asiatic Elephant) को गोद लेने हेतु प्रति वर्ष क्रमशः 2 हज़ार तथा 1.75 लाख रुपए देना होगा।
    • बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान से किंग कोबरा, जंगली बिल्ली, असमिया लंगूर, काला हिरन, सांभर इत्यादि को एक वर्ष के लिये गोद लिया जा सकता है।
    • उद्यान के अनुसार, वर्तमान में 21 हाथी इंटरनेट के माध्यम से गोद लेने हेतु उपलब्ध हैं। 
  • उद्यान के वन्य जीवों को गोद लेने हेतु प्रोत्साहित करने के लिये उपहार देने का भी प्रावधान किया गया है। उदाहरण के लिये, उद्यान में निःशुल्क प्रवेश, प्रमाणपत्र, 3 वर्ष के लिये उद्यान के महत्त्वपूर्ण सम्मलेनों में निःशुल्क प्रवेश, इत्यादि।
  • ‘एनिमल एडॉप्टेशन प्रोग्राम’ के अनुसार, उद्यान के वन्य जीवों के भरण-पोषण, चिकित्सीय देखभाल खर्चों में शामिल होने का एक अवसर है जिसमें भाग लेने वाले लोगों हेतु  ‘आयकर अधिनियम’ की धारा 80जी (दान से संबंधित) के तहत कर में छूट देने  का प्रावधान भी है।
  • इस पहल से लोगों को वन्य जीवों के संरक्षण के बारे में जागरूक करने के साथ ही वन्य जीवों के विभिन्न व्यवहारों से अवगत कराया जा सकेगा। 
  • यह पहल वन्यजीवों के उत्तरजीविता संबंधी कारकों को चिह्नित करने, वन्यजीवों के विभिन्न आवास स्थलों की पहचान करने में मदद करेगी। 

भारतीय कोबरा (Indian Cobra):    

  • इसका वैज्ञानिक नाम ‘नाजा नाजा’ (Naja naja) है।
  • यह भारत, श्रीलंका और पाकिस्तान में पाया जाता है।
  • यह साँप आमतौर पर खुले जंगल के किनारों, खेतों और गाँवों के आसपास के क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं।

बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान

(Bannerghatta Biological Park):

  • कर्नाटक के बंगलूरू में स्थित बन्नेरघट्टा उद्यान की स्थापना वर्ष 1972 में की गई थी जिसे वर्ष 1974 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था।
  • वर्ष 2002 में उद्यान के एक हिस्से को जैविक रिज़र्व बना दिया गया जिसे बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान कहा जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 में देश का पहला तितली पार्क यहीं स्थापित किया गया था।
  • यह उद्यान जंगली बिल्लियों, भारतीय तेंदुओं, बाघ, चीतों एवं हाथियों को एक सुरक्षित आवास प्रदान करता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

असमान द्रव्यमान वाले दो ब्लैक होल का पहला विलय

प्रीलिम्स के लिये:

LIGO, ब्लैक होल, 

मेंस के लिये:

सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत

चर्चा में क्यों?

हाल ही में लेज़र इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO) में स्थित गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशालाओं के द्वारा दो असमान-द्रव्यमान वाले ब्लैक होल के विलय का पहली बार पता लगाया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह पहली ऐसी खोज है जिसमें असमान द्रव्यमान के दो ब्लैक होल शामिल हैं।
  • इस घटना को GW190412 नाम दिया गया है। इस घटना का पता वर्ष 2019 में लगाया गया था
  • लगभग 5 वर्ष पहले LIGO स्थित गुरुत्त्वाकर्षण वेधशाला ने पहली बार  गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाया था।  
  • इन दोनों ब्लैक होल का द्रव्यमान क्रमशः 8 सौर द्रव्यमान (Solar Mass) और 30 सौर द्रव्यमान था।
    • सौर द्रव्यमान का तात्पर्य सूर्य के द्रव्यमान से है जो कि 2×10³⁰ किलोग्रा० होता है
    • यह खगोल विज्ञान में द्रव्यमान की एक मानक इकाई है।
  • दोनों ब्लैक होल के विलय की खोज लगभग 2.5 बिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर की गई।

खोज का महत्त्व:

  • इससे कई और चीजों का पता लगाना संभव हो जाएगा। जैसे-
    • घटना से दूरी का अधिक सटीक निर्धारण।
    • अधिक द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की कोणीय गति, आदि

सामान्य सापेक्षता की भविष्यवाणी के साथ सत्यापन:

  • यह अवलोकन एक बार फिर आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत की पुष्टि करता है, जो उच्च आवर्ती के हार्मोनिक्स (Harmonics) के अस्तित्व की भविष्यवाणी करता है।
    • सामान्य सापेक्षता, जिसे सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत के रूप में भी जाना जाता है, वर्ष 1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रकाशित गुरुत्वाकर्षण का ज्यामितीय सिद्धांत है।

समान द्रव्यमान और असमान द्रव्यमान के द्विआधारी ब्लैक होल के मध्य अंतर:

  • गुरुत्त्वाकर्षण तरंगों का प्रमुख उत्सर्जन समान द्रव्यमान के द्विआधारी (Binary) ब्लैकहोल की कक्षीय आवृत्ति से दोगुना होता है और यह नगण्य है।
  • असमान द्रव्यमान वाले द्विआधारी ब्लैकहोल में उत्सर्जन एक आवृत्ति पर होता है जो कक्षीय आवृत्ति का तीन गुना होता है। 
    • कक्षीय आवृत्ति, घूर्णन दर (Rotation Rate) का मापक होता है। 
  • इसके अलावा, असमान ब्लैक होल के विलय में, अधिक बड़े ब्लैक होल का चक्रण (Spin) सिग्नल तरंग में अतिरिक्त सुविधाओं से निर्धारित किया जा सकता है।
    • भारी ब्लैक होल का चक्रण, द्विआधारी की गतिशीलता में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।

लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्ज़र्वेटरी (LIGO):

  • LIGO दुनिया की सबसे बड़ी गुरुत्त्वाकर्षण तरंग वेधशाला है।
  •  संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थापित LIGO के दो व्यापक अलग-अलग इंटरफेरोमीटर हैं - एक हैनफोर्ड, वॉशिंगटन में और दूसरा लिविंगस्टन, लुइसियाना में - जो गुरुत्त्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिये संयुक्त रूप से संचालित होते हैं।
  • इसके माध्यम से वैज्ञानिक अंतरिक्ष में दिक्-काल आयाम में पदार्थों की गति को भी समझ पाते हैं, जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में अनुसंधान में सहायक होगा।
    • भविष्य में पृथ्वी से संबंधित समस्याओं का समाधान भी किया जा सकता है।

ब्लैक होल (Black Hole):

  • ब्लैक होल शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले अमेरिकी भौतिकविद् जॉन व्हीलर ने 1960 के दशक के मध्य में किया था।
  • ब्लैक होल्स अंतरिक्ष में उपस्थित ऐसे छिद्र हैं जहाँ गुरुत्त्व बल इतना अधिक होता है कि यहाँ से प्रकाश का पारगमन नहीं होता।
  • चूँकि इनसे प्रकाश बाहर नहीं निकल सकता, अतः हमें ब्लैक होल दिखाई नहीं देते, वे अदृश्य होते हैं।
  • हालाँकि विशेष उपकरणों से युक्त अंतरिक्ष टेलिस्कोप की मदद से ब्लैक होल की पहचान की जा सकती है।
    • ये उपकरण यह बताने में भी सक्षम हैं कि ब्लैक होल के निकट स्थित तारे अन्य प्रकार के तारों से किस प्रकार भिन्न व्यवहार करते हैं।

स्रोत: द हिंदू


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

भारत में अनुसंधान एवं विकास पर व्यय

प्रीलिम्स के लिये:

भारत में अनुसंधान एवं विकास पर व्यय

मेन्स के लिये:

भारत में अनुसंधान और विकास की स्थिति 

चर्चा में क्यों?

'राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी सर्वेक्षण' 2018 पर आधारित ‘अनुसंधान एवं विकास सांख्यिकी तथा संकेतक’ 2019-20 के अनुसार, अनुसंधान एवं विकास (Research and Development- R&D में भारत का सकल व्यय वर्ष 2008 से 2018 के बीच बढ़कर तीन गुना हो गया है।

मुख्य बिंदु:

  • यह सर्वेक्षण 'विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग' (Department of Science and Technology- DST) के तहत आने वाले 'राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रबंधन सूचना प्रणाली' (National Science and Technology Management Information- NSTMIS) के अंतर्गत किया गया है।

अनुसंधान और विकास पर व्यय:

  • अनुसंधान और विकास में भारत का सकल व्यय वर्ष 2008 से 2018 के दौरान बढ़कर लगभग तीन गुना हो गया है।
  • देश में अनुसंधान और विकास पर सकल व्यय (Gross Expenditure on Research and Development- GERD) वित्तीय वर्ष 2007-08 के 39,437.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1,13,825.03 करोड़ रुपए हो गया है।
  • भारत का प्रति व्यक्ति R&D व्यय वित्तीय वर्ष 2007-08 में 29.2 डॉलर से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2017-18 में बढ़कर 47.2 डॉलर हो गया है।
  • वित्तीय वर्ष 2017-18 में ब्रिक्स देशों में भारत ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) का 0.7% ही अनुसंधान और विकास  पर व्यय किया, जबकि अन्य देशों में ब्राज़ील ने 1.3%, रूसी संघ ने 1.1%, चीन ने 2.1% और दक्षिण अफ्रीका ने 0.8% खर्च किया।

बाह्य (Extramural) अनुसंधान और विकास को समर्थन:

  • वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग’ ने कुल बाह्य अनुसंधान और विकास के समर्थन में क्रमश: 63%  का योगदान दिया। 
    • बाह्य (Extramural) अनुसंधान में किसी संस्थागत इकाई द्वारा इकाई की सीमा से बाहर किये गए सभी अनुसंधान एवं विकास व्यय शामिल होते हैं।
  • सरकार द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रारंभ की गई कई पहलों के कारण बाहरी अनुसंधान और विकास परियोजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। 
  • देश में फैले अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठानों में लगभग 5.52 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं।

शोधकर्त्ताओं की संख्या में वृद्धि:

  • भारत में प्रति मिलियन आबादी पर शोधकर्त्ताओं की संख्या वर्ष 2000 में 110  बढ़कर वर्ष 2017 में 255 हो गई है।
  • भारत में विज्ञान और अभियांत्रिकी (Science and Engineering) में पीएचडी प्राप्त करने वाले लोह्गों की  संख्या के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है।
  • वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान प्रति शोधकर्त्ता भारत का अनुसंधान और विकास व्यय 185 रूस, इज़राइल, हंगरी, स्पेन और ब्रिटेन से कहीं अधिक था।

वैज्ञानिक प्रकाशन में तीसरा स्थान:

  • भारत वैज्ञानिक प्रकाशन वाले देशों की सूची में तीसरे स्थान पर आ गया है
  • भारत में वैज्ञानिक प्रकाशन की वृद्धि दर क्रमशः 8.4% है जबकि विश्व का औसत क्रमशः 1.9% है। 

पेटेंट फाइलिंग:

  • विश्व में निवासी पेटेंट फाइलिंग गतिविधि के मामले में भारत 9 वें स्थान पर है वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान भारत में कुल 47,854 पेटेंट दर्ज किये गए थे। जिसमें से 15,550 (32 प्रतिशत) पेटेंट भारतीयों द्वारा दायर किये गए थे।
  • विश्व बौद्धिक संपदा संगठन’ (World Intellectual Property Organization- WIPO) के अनुसार, भारत का पेटेंट कार्यालय विश्व के शीर्ष 10 पेटेंट दाखिल करने वाले कार्यालयों में 7 वें स्थान पर है। 

स्रोत: पीआईबी


भारतीय अर्थव्यवस्था

उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में 6.5% की गिरावट

प्रीलिम्स के लिये:

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 

मेन्स के लिये:

उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट से अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2020 में अर्थव्यवस्था के आठ प्रमुख क्षेत्रों में 6.5% की गिरावट (उत्पादन में) दर्ज़ की गई है।

प्रमुख बिंदु:

  • गौरतलब है कि मार्च 2020 में इस्पात, विद्युत, सीमेंट, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, कच्चा तेल तथा रिफाइनरी और पेट्रोलियम उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। हालाँकि कोयला उत्पादन में वृद्धि हुई है।
    • ध्यातव्य है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान आठ प्रमुख क्षेत्रों में वृद्धि दर 0.6% थी, जबकि फरवरी 2020 में इन क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि दर 5.5% हो गई थी।
  • देशभर में लॉकडाउन की वज़ह से वस्तुओं का आवागमन प्रभावित होने के साथ ही वस्तुओं की मांग में कमी भी दर्ज की गई है जिसके कारण उत्पादन में कमी आई है।
  • उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के दौरान विद्युत और इस्पात उत्पादन को छूट प्रदान करने के बावजूद इन क्षेत्रों में गिरावट आई है।
  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production- IIP) में अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र की हिस्सेदारी 40.27% है। अतः इन क्षेत्रों में दर्ज की गई गिरावट का असर IIP के आँकड़ों पर भी पड़ना निश्चित है।
  • प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ‘डी.के. श्रीवास्तव’ (D.K. Srivastava) के अनुसार, राज्य और केंद्र दोनों सरकारें प्रमुख क्षेत्रों के उत्पादन में गिरावट के कारण कर राजस्व में आई कमी की प्रतिपूर्ति पूंजीगत व्यय में कटौती से कर सकती हैं। 

पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure):

  • जमीन, भवन, मशीनरी, उपकरण, साथ ही शेयरों में निवेश जैसी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण पर खर्च की गई धनराशि को पूंजीगत व्यय कहते हैं।

Growth-pangs

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक

(Index of Industrial Production-IIP):

  • यह सूचकांक अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों जैसे- खनिज, खनन, विद्युत, विनिर्माण आदि के विकास का विवरण प्रस्तुत करता है।
  • इसे ‘सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय’ (Ministry of Statistics and Programme Implementation) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office- NSO)  द्वारा मासिक रूप से संकलित और प्रकाशित किया जाता है।
  • IIP एक समग्र संकेतक है जो प्रमुख क्षेत्रों (Core Sectors) उत्पादन एवं उपयोग का आँकड़ा उपलब्ध कराता है।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 2017 में IIP का आधार वर्ष 2004-05 से परिवर्तित कर वर्ष 2011-2012 कर दिया गया।
  • महत्त्व:
    • IIP का उपयोग वित्त मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक सहित अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा नीति-निर्माण के लिये किया जाता है।
    • IIP त्रैमासिक और अग्रिम जीडीपी अनुमानों की गणना हेतु बेहद प्रासंगिक है। 
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में शामिल आठ प्रमुख क्षेत्रों की भागीदारी निम्नलिखित हैं:

रिफाइनरी उत्पाद (Refinery Products)

28.04%

विद्युत (Electricity)

19.85%

इस्पात (Steel)

17.92%

कोयला (Coal)

10.33%

कच्चा तेल (Crude Oil)

8.98%

प्राकृतिक गैस (Natural Gas)

6.88%

सीमेंट (Cement)

5.37%

उर्वरक (Fertilizers)

2.63%


स्रोत: द हिंदू


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

एसएन 2010 केडी

प्रीलिम्स के लिये: 

सुपरनोवा

मेन्स के लिये: 

सुपरनोवा विस्फोट की प्रक्रिया

चर्चा में क्यों?

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology -DST) के अधीन नैनीताल स्थित स्वायत्त अनुसंधान संस्थान ‘आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्ज़र्वेशनल साइंसेज़’ (Arayabhatta Research Institute of Observational Sciences- ARIES) के शोधकर्त्ताओं  द्वारा पाया गया कि एक अत्यधिक चमकदार सुपरनोवा जिसे ‘एसएन 2010 केडी’ (SN 2010kd) नाम दिया गया, जिससे विस्‍फोट के दौरान पर्याप्त‍ द्रव्यमान के साथ निकेल भी बाहर निकला है। ऐसा सामान्यत: सुपरनोवा के कोर विघटन के समय ही देखा जाता है।

Supernovae

सुपरनोवा:

  • खगोलविदों के अनुसार जब एक तारा अपना जीवन चक्र समाप्त करते हुए अपने जीवन के अंतिम चरण में होता है तो वह एक तीव्र विस्फोट के साथ समाप्त होता है जिसे सुपरनोवा कहा जाता है।
  • सुपरनोवा विस्फोट के दौरान काफी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
  • यह ऊर्जा बड़े पैमाने पर तारे के कोर में हुए विस्फोट के कारण उत्पन्न होती है जो कि सूर्य के द्रव्यमान से कई गुणा अधिक होती है।
  • अत्यधिक चमकदार सुपरनोवा एसएन 2010 केडी में यह विस्फोट मानक/सामान्य सुपरनोवा की तुलना में 10 गुना अधिक अथवा कही अधिक ऊर्जा पैदा करने वाला हैं।

एसएन 2010 केडी (SN 2010kd):

  • एसएन 2010 केडी लगभग 1.5 गीगा प्रकाश-वर्ष (1.5 Giga light-years ) की दूरी पर स्थित है।
  • इसकी खोज 14 नवंबर, 2010 में अमेरिका की ‘रोटसे सुपरनोवा सत्यापन परियोजना’ (ROTSE Supernova Verification Project) के तहत ‘रोबोटिक ऑप्टिकल ट्रांसिएंट सर्च एक्सपेरिमेंट’ (Robotic Optical Transient Search Experiment- ROTSE-IIIb ) दूरबीन द्वारा की गई। 
  • यह सिंह नक्षत्र की तरफ एक बौनी आकाशगंगा (Dwarf Galaxy) में स्थित था। 
  • अत्‍यधिक चमकदार सुपरनोवा एसएन 2010 केडी से उत्सर्जित द्रव्यमान से पता चलता है कि इसका विकास सामान्य कोर-विघटन सुपरनोवा के अन्य संभावित अपने पूर्व के सुपरनोवा से अलग/भिन्न हो सकता है क्योंकि इसके द्वारा विस्फोट के लिये ज़िम्मेदार विभिन्‍न अंतर्निहित भौतिक तंत्र (Underlying Physical Mechanism) के कारण द्रव्‍यमान के साथ निकेल का भी उत्‍सर्जन किया गया। 
  • यह विस्फोट एक सामान्य सुपरनोवा के विस्फोट से काफी तीव्र था लेकिन यह अन्य सुपरनोवा के समान  ही धीरे-धीरे शांत हुआ 

वैज्ञानिकों द्वारा अवलोकन:

  • इस सुपरनोवा के लिये रोस्‍टे IIIबी एवं 1.04 मीटर सम्पूर्णानंद टेलीस्कोप से प्राप्त किये गए डेटा का लाइट-कर्व मॉडलिंग विश्‍लेषण किया गया साथ ही 8-10 मीटर श्रेणी के ऑप्टिकल दूरबीन का उपयोग करते हुए डेटा का स्पेक्ट्रल मॉडलिंग विश्‍लेषण किया। 
  • प्राप्त किये डेटा की तुलना एसएन 2010 केडी के आस-पास समान दूरी पर स्थित लगभग अन्य आधा दर्जन ज्ञात सुपरनोवा के साथ की गई।
  • वैज्ञानिक निरीक्षण से पता चलता है कि घूर्णन और धत्त्विकता जैसे मानदंड तारकीय विस्फोटों में एक महत्त्वपूर्ण  भूमिका निभाते हैं।
  • इसके अलावा यह बात भी सामने आई कि पहले से ज्ञात सुपरनोवा की तुलना में एसएन 2010 केडी की मेज़बान आकाशगंगाओं में विभिन्न प्रकार के अन्य संभावित पूर्वज मौजूद रहे हैं।

आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्ज़र्वेशनल साइंसेस-

  • 20 अप्रैल, 1954 में नैनीताल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्थान के रूप में स्थापित किया गया। 
  • यह देश में खगोल भौतिकी और वायुमंडलीय विज्ञान से संबंधित एक अग्रणी अनुसंधान संस्थान है।
  • इस संस्थान द्वारा तीन दूरबीनों 104 सेमी, 130 सेमी और 3.6-mDOT की मेज़बानी की जाती है। इनके अलावा संस्थान के पास सौर अवलोकन के लिये समर्पित एक अन्य 15 सेमी. की दूरबीन भी है।

स्रोत: पी.आई.बी


भारतीय अर्थव्यवस्था

चीन की डिजिटल मुद्रा

प्रीलिम्स के लिये

डिजिटल मुद्रा, बिटकॉइन, लिब्रा, क्रिप्टोकरेंसी

मेन्स के लिये

डिजिटल मुद्रा का महत्त्व और संबंधित चिंताएँ

चर्चा में क्यों?

कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी और वैश्विक वित्तीय संकट के बीच चीन आने वाले समय में विश्व की पहली डिजिटल मुद्रा लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।

प्रमुख बिंदु 

  • इस डिजिटल मुद्रा या डिजिटल युआन को आधिकारिक तौर पर डिजिटल मुद्रा/इलेक्ट्रॉनिक भुगतान (Digital Currency/Electronic Payment-DC/EP) परियोजना के रूप में जाना जा रहा है।
  • चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (People’s Bank of China-PBC) के अनुसार, चीन की आधिकारिक डिजिटल मुद्रा का अनुसंधान और विकास कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, और चीन के चार शहरों (शेन्झेन, सुज़हौ, चेंगदू और शिंजियांग) में इसका परीक्षण किया जा रहा है।

डिजिटल मुद्रा/इलेक्ट्रॉनिक भुगतान (DC/EP)

  • रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन का केंद्रीय बैंक वर्ष 2014 से ही अपनी डिजिटल मुद्रा पर अनुसंधान कर रहा है।
  • चीन की यह डिजिटल मुद्रा काफी हद तक बिटकॉइन (Bitcoin) और फेसबुक की डिजिटल मुद्रा लिब्रा (Libra) के समान ही है।
  • अन्य डिजिटल मुद्राओं की तरह चीन की इस नई मुद्रा को भी डिजिटल वॉलेट (Digital Wallet) में संग्रहित किया जा सकेगा।
  • चीन की नई डिजिटल मुद्रा और वर्तमान में प्रचलित अन्य डिजिटल मुद्राओं में सबसे प्रमुख अंतर यह है कि चीन की मुद्रा चीन की सरकार और उसके केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित की जाएगी, किंतु मौजूदा डिजिटल मुद्राओं को किसी भी बैंक अथवा सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है।
  • विदित हो कि चीन ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है और न ही अपनी मुद्रा को लेकर कोई विशेष विवरण जारी किया है।

निजी डिजिटल मुद्रा के पक्ष में नहीं है चीन

  • चीन सदैव से ही निजी डिजिटल मुद्रा का विरोधी रहा है, विशेषकर जब फेसबुक ने अपनी डिजिटल मुद्रा लिब्रा (Libra) की घोषणा की थी तो चीन के अधिकारियों ने इसे स्वीकृति नहीं दी थी। चीन ने डिजिटल मुद्रा को चीन की संप्रभुता और अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिये खतरा बताया है।
  • चीन का मत है कि डिजिटल मुद्राओं को केवल सरकारों या केंद्रीय बैंकों द्वारा ही प्रबंधित एवं नियंत्रित किया जाना चाहिये।

चीन की डिजिटल मुद्रा का महत्त्व

  • विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल मुद्रा से संबंधित इस परियोजना का लक्ष्य ऐसे समय में चीन की अर्थव्यवस्था की रक्षा करना है जब नई-नई भुगतान प्रणालियाँ प्रचलित हो रही हैं और अर्थव्यवस्था में अवैध धन के प्रवाहित होने की संभावना काफी बढ़ गई है।
  • इसके अतिरिक्त चीन की यह डिजिटल मुद्रा दीर्घावधि में चीन की वित्तीय प्रणाली में लेनदेन की दक्षता को सुधारने में महत्त्वपूर्ण साबित होगी।
  • कई विश्लेषक चीन की आधिकारिक डिजिटल मुद्रा की शुरुआत को डॉलर के वर्चस्व का मुकाबला करने के लिये चीन के एक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे वैश्विक निवेशकों और व्यवसायियों को डॉलर के अतिरिक्त किसी अन्य मुद्रा में भुगतान करने का विकल्प प्राप्त होगा।
    • चीन अपनी डिजिटल मुद्रा के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अमेरिका के प्रभाव को कम करने का प्रयास कर रहा है, ध्यातव्य है कि दीर्घावधि में चीन की डिजिटल मुद्रा विभिन्न देशों के मध्य सीमा पार लेनदेन के लिये एक अलग निपटान तंत्र विकसित करेगी, जो अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम कर सकता है

संबंधित चिंताएँ

  • आलोचकों का तर्क है कि चूँकि इस प्रकार की डिजिटल मुद्रा को जारी करने वाले केंद्रीय बैंक अथवा वाणिज्यिक बैंकों द्वारा इसे आसानी से ट्रैक किया जा सकता है, इसलिये यह आम लोगों की गोपनीयता पर एक गंभीर खतरा है।
  • हालाँकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक ने आम लोगों को गोपनीयता प्रदान करने और अवैध लेनदेन पर शिकंजा कसने के मध्य संतुलन स्थापित करने का वादा किया है, किंतु ऐसा करना अपेक्षाकृत काफी चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है।

डिजिटल मुद्रा

  • डिजिटल मुद्रा को समझने से पूर्व आवश्यक है कि हम मुद्रा के अर्थ को समझें। 
  • विभिन्न अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मुद्रा का अभिप्राय ऐसी वस्तु से होता है, जिसका प्रयोग जनसाधारण द्वारा वर्तमान तथा भविष्य के भुगतानों के लिये किया जाता है और इसे शासकीय मान्यता प्राप्त होती है।
  • इस प्रकार हम कह सकते हैं कि डिजिटल मुद्रा भुगतान की वह विधि है जो केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप में मौजूद है और अमूर्त है अथवा डिजिटल मुद्रा, मुद्रा का वह रूप है जो केवल डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध है, न कि भौतिक रूप में।
  • डिजिटल मुद्रा अमूर्त होती हैं और इनका लेनदेन या इनका स्वामित्त्व केवल इंटरनेट या निर्दिष्ट नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटर या इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट का उपयोग करके ही किया जा सकता है। डिजिटल मुद्रा के विपरीत भौतिक मुद्रा जैसे- बैंक नोट और सिक्के आदि मूर्त होते हैं और इनका लेन-देन केवल उनके धारकों द्वारा ही संभव है, जिनके पास उनका भौतिक स्वामित्त्व है।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

कश्मीरी केसर को GI टैग

प्रीलिम्स के लिये:

कश्मीरी केसर

मेन्स के लिये:

भौगोलिक संकेतक 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में कश्मीरी केसर को 'भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री' (Geographical Indications Registry) द्वारा 'भौगोलिक संकेतक' (Geographical Indication- GI) का टैग प्रदान किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • जम्मू और कश्मीर सरकार के कृषि निदेशालय द्वारा कश्मीरी केसर को GI टैग प्रदान करने के लिये आवेदन दायर किया गया था।
  • कश्मीरी केसर का सुगंधित मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है, साथ ही इसमें औषधीय गुण होते हैं। 

 केसर कृषि का प्रारंभ:

  • ऐसा माना जाता है कि केसर की खेती को कश्मीर में पहली शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास मध्य एशियाई प्रवासियों द्वारा शुरू किया गया था। 
  • प्राचीन संस्कृत साहित्य में केसर को 'बहुकम (Bahukam) कहा गया है।

कश्मीरी केसर की विशेषताएँ:

  • विश्व स्तर पर कश्मीर केसर को मसाले के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त है। केसर का पारंपरिक कश्मीरी व्यंजनों में प्रयोग किया जाता रहा है तथा यह क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
  • सौंदर्य प्रसाधन और औषधीय प्रयोजन में भी इसे काम में लिया जाता है।
  • कश्मीरी केसर गहरा लाल रंग का, उच्च सुगंध युक्त, कड़वा स्वाद वाला होता है।

कृषि क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताएँ:

  • कश्मीरी केसर की खेती कश्मीर के कुछ क्षेत्रों; जिनमें पुलवामा, बडगाम, किश्तवाड़ और श्रीनगर शामिल हैं, में की जाती है। 
  • यह दुनिया का एकमात्र ऐसा केसर है जिसकी खेती समुद्र तल से 1,600 से 1,800 मीटर की ऊँचाई पर खेती की जाती है। विश्व में कश्मीरी केसर ही एक मात्र ऐसा केसर है जिसे इतनी ऊँचाई पर उगाया जाता है।
  • केसर की खेती विशेष प्रकार की ‘करेवा’ (Karewa) मिट्टी में की जाती है।

करेवा (Karewa):

  • करेवा कश्मीर घाटी में पाए जाने वाले झील निक्षेप हैं। इनमें हिमानी के मोटे निक्षेप तथा हिमोढ़ उपस्थित होते हैं।  
  • यह जम्मू-कश्मीर में पीरपंजाल श्रेणियों की ढालों में 1,500 से 1,850 मीटर की ऊँचाई पर मिलते हैं।

केसर के प्रकार:

  • कश्मीरी केसर तीन प्रकार का होता है; लच्छा  केसर (Lachha Saffron), मोंगरा केसर (Mongra Saffron) तथा गुच्छी केसर (Guchhi Saffron)।

आर्थिक महत्त्व:

  • कश्मीरी केसर एक बहुत ही कीमती और महँगा उत्पाद है। ईरान केसर का सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत केसर उत्पाद में ईरान का करीबी प्रतियोगी है। GI टैग मिलने से कश्मीरी केसर को निर्यात बाज़ार में मदद मिलेगी।

जम्मू कश्मीर (संयुक्त) के अन्य GI टैग: 

कश्मीरी पश्मीना:

  • पश्मीना जो लद्दाख क्षेत्र में रहने वाले बकरे से प्राप्त पश्म (Pashm; एक प्रकार का फाइबर) से निर्मित टेक्सटाइल है।

कानी शॉल (Kani Shawls):

  • हस्त निर्मित शॉल 

कश्मीरी सोज़नी:

  • हस्त निर्मित शॉल 

स्रोत: द हिंदू


भारतीय अर्थव्यवस्था

ओपन बजट सर्वेक्षण

प्रीलिम्स के लिये

ओपन बजट सर्वे

मेन्स के लिये

बजट पारदर्शिता का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जारी ओपन बजट सर्वेक्षण (Open Budget Survey) के अनुसार, भारत बजट पारदर्शिता और जवाबदेही के मामले में 117 देशों में 53वें स्थान पर है।

प्रमुख बिंदु

  • अंतर्राष्ट्रीय बजट भागीदारी (International Budget Partnership-IBP) द्वारा किये गए इस सर्वेक्षण में भारत को केंद्रीय बजट प्रक्रिया की पारदर्शिता के मामले में 100 में से 49 अंक प्राप्त हुए हैं।
  • बजट प्रक्रिया की पारदर्शिता के मामले में न्यूज़ीलैंड को सर्वाधिक 87 अंक प्राप्त हुए हैं और वह इस सर्वेक्षण में 117 देशों में सबसे ऊपर है।
  • वहीं सर्वेक्षण में पाकिस्तान को 28 अंक, बांग्लादेश को 36 अंक, चीन को 19 अंक, श्रीलंका को 47 अंक, म्याँमार को 28 अंक और नेपाल को 41 अंक प्राप्त हुए हैं।
    • इस प्रकार भारत को केंद्रीय बजट प्रक्रिया की पारदर्शिता के मामले में अपने सभी पड़ोसी देशों से अधिक अंक प्राप्त हुए हैं।
  • सर्वेक्षण के अनुसार, चीन के अपवाद के अतिरिक्त अन्य बड़े विकासशील देशों को भारत की तुलना में पारदर्शिता के लिये काफी अधिक अंक प्राप्त हुए हैं।

सर्वेक्षण में भारत की स्थिति

  • यदि इस वैश्विक द्विवार्षिक सर्वेक्षण में भारत के प्रदर्शन की बीते वर्षों से तुलना की जाए, तो पिछले कुछ वर्षों में भारत की स्थिति में काफी ठहराव रहा है।
    • वर्ष 2015 में भारत को केंद्रीय बजट प्रक्रिया की पारदर्शिता के मामले 46 अंक और 2017 में 48 अंक प्राप्त हुए थे। इस प्रकार भारत की स्थिति बीते कुछ वर्षों में एक जैसी रही है और इसमें कुछ विशेष सुधार नहीं हुआ है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने आवश्यक और प्रासंगिक जानकारी प्रकाशित करने की दिशा में अच्छा कार्य किया है जिसने भारत को कई अन्य देशों से अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद की है।
  • हालाँकि, सर्वेक्षण में पाया गया कि प्री-बजट स्टेटमेंट (Pre-Budget Statement) की अनुपस्थिति और 2018-19 में छमाही समीक्षा (Mid-Year Review) नहीं करने के कारण भारत के अंकों में गिरावट आई है।

ओपन बजट सर्वे (Open Budget Survey)

  • 117 देशों के इस सर्वेक्षण में कई प्रामाणिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तुलना योग्य संकेतकों के आधार पर 0-100 के पैमाने पर विभिन्न देशों में बजट पारदर्शिता का स्तर निर्धारित किया जाता है।
  • इस सर्वेक्षण में प्रत्येक देश की केंद्र या संघीय सरकार के प्रमुख बजट दस्तावेज़ों की उपलब्धता का मूल्यांकन किया जाता है और यह आकलन किया जाता है कि क्या ये समयबद्ध तरीके से सार्वजनिक किये जाते हैं अथवा ये व्यापक जानकारी प्रदान करते हैं या नहीं।

सर्वेक्षण में भारत के लिये सुझाव

  • सर्वेक्षण के अनुसार, भारत को बजट प्राथमिकता निर्धारण में आम लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि आम लोगों के मुद्दों को और अधिक बेहतर ढंग से संबोधित किया जा सके।
  • सर्वेक्षण रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि केंद्र सरकार को एक प्री-बजट स्टेटमेंट भी प्रकाशित करना चाहिये जिसकी विधायकों और जनता द्वारा वार्षिक बजट पेश होने से पूर्व व्यापक जाँच की जा सकती है।
  • यह सुनिश्चित करने के लिये कि आम जनता द्वारा कड़ी मेहनत से अर्जित किये गए सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग विवेकपूर्ण और जवाबदेह तरीके से किया जाए, केंद्रीय बजट प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना काफी महत्त्वपूर्ण हो गया है।

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 02 मई, 2020

श्रमिक स्पेशल ट्रेन

हाल ही में केंद्र सरकार ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, इनमें केवल वही व्यक्ति सफर करेगा, जिसे राज्य सरकार द्वारा अनुमति दी जाएगी। श्रमिक स्पेशल ट्रेन का संचालन रेलवे द्वारा किया जाएगा, शेष सभी प्रकार की औपचारिकताएँ राज्य सरकार द्वारा पूरी की जाएंगी। भारतीय रेलवे के अनुसार, श्रमिक स्पेशल गाड़ियों में केवल ज़िला प्रशासन द्वारा नामित व्यक्ति ही यात्रा कर सकता है। रेलवे के मुताबिक कोई भी व्यक्ति जो दूसरे राज्य में फँसा हुआ है और अपने घर जाना चाहता है तो वह इस संबंध में ज़िला प्रशासन से संपर्क कर सकता है। श्रमिक स्पेशल गाड़ी के लिये राज्यों को पूर्ण अथॉरिटी बनाया गया है। रेलवे प्रशासन केवल उन्हीं लोगों को स्टेशन परिसर में प्रवेश देगा, जिनके पास ज़िला प्रशासन की मंज़ूरी होगी। रेलवे स्टेशनों पर भीड़ न हो इसके लिये राज्य सरकारें समूह में लोगों को भेजेंगी। एक ट्रेन में केवल 1000 से 1200 लोग ही यात्रा कर सकेंगे। ट्रेन में सवार होने से पहले सभी लोगों की मेडिकल जाँच की जाएगी और उन्हें इस संबंध में प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त गाड़ी में सवार सभी लोगों को मास्क लगाना ज़रूरी होगा।

प्रो. बी. बी. लाल

हाल ही में केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने महान पुरातत्त्ववेत्ता प्रो. बी बी लाल के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नई दिल्ली में ई-बुक ‘प्रो. बी. बी. लाल-इंडिया रिडिस्कवर्ड‘ (B. B. Lal-India Rediscovered) का विमोचन किया है। ध्यातव्य है कि प्रो. बी. बी. लाल का जन्म उत्तर प्रदेश के झाँसी ज़िले में बैडोरा गाँव में 02 मई, 1921 को हुआ। यह पुस्तक एक शताब्दी विशेष संस्करण है जो कि संस्कृति मंत्रालय की प्रो. बी. बी. लाल शताब्दी समारोह समिति द्वारा तैयार की गई है। प्रो. बी. बी. लाल को इसी वर्ष (वर्ष 2020) में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह वर्ष 1968 से वर्ष 1972 तक भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India-ASI) के महानिदेशक थे और उन्होंने भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक के रूप में भी कार्य किया है। इसके अतिरिक्त प्रो. बी. बी. लाल ने यूनेस्को (UNESCO) की विभिन्न समितियों में भी कार्य किया है। लगभग पाँच दशक तक लंबे अपने कैरियर में प्रो. लाल ने पुरातत्त्व विज्ञान के क्षेत्र में काफी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रो. बी. बी. लाल ने हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश), शिशुपालगढ़ (ओडिशा), पुराना किला (दिल्ली), कालिबंगन (राजस्थान) समेत कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई की। वर्ष 1975-76 के पश्चात् प्रो. बी. बी. लाल ने रामायण के पुरातात्त्विक स्थलों के तहत अयोध्या, भारद्वाज आश्रम, श्रंगवेरपुरा, नंदीग्राम एवं चित्रकूट जैसे स्थलों की भी जाँच की थी।

राॅस टेलर 

हाल ही में अनुभवी बल्लेबाज राॅस टेलर (Ross Taylor) को न्यूज़ीलैंड का वर्ष का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर चुना गया है। धयातव्य है कि राॅस टेलर ने तीनों प्रारूप में शानदार प्रदर्शन के लिये तीसरी बार सर रिचर्ड हैडली मेडल (Sir Richard Hadlee Medal) प्राप्त किया है। टेलर इस सत्र में स्टीफन फ्लेमिंग को पीछे छोड़कर टेस्ट क्रिकेट में न्यूज़ीलैंड की तरफ से सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। इसके अतिरिक्त वे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में 100 मैच खेलने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी भी हैं। विदित हो कि सर रिचर्ड हैडली मेडल न्यूज़ीलैंड का सर्वोच्च क्रिकेट सम्मान है, जो कि न्यूज़ीलैंड के पूर्व क्रिकेटर और क्रिकेट इतिहास में सबसे महान तेज़ गेंदबाज़ों तथा ऑलराउंडरों में से एक सर रिचर्ड जॉन हैडली के सम्मान में प्रदान किया जाता है। राॅस टेलर ने न्यूज़ीलैंड के लिये कुल 232 वनडे, 100 T20 और 101 टेस्ट मैच खेले हैं। 08 मई, 1984 को न्यूज़ीलैंड में पैदा हुए राॅस टेलर ने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच 1 मार्च, 2006 को वेस्टइंडीज़ के विरुद्ध खेला था। राॅस टेलर के अंतर्राष्ट्रीय कैरियर की बात करें तो उन्होंने कुल 101 टेस्ट मैचों में 7239 रन, 233 वनडे में 8569 रन और 100 T20 में 1909 रन बनाए हैं। ध्यातव्य है कि राॅस टेलर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की ओर से खेलते हैं।

भारतमार्केट

खुदरा कारोबारियों के संगठन ‘कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स’ (Confederation of All India Traders-CAIT) ने घोषणा की है कि वह जल्द ही विभिन्न प्रौद्योगिकी भागीदारों के साथ मिलकर सभी खुदरा व्यापारियों के लिये एक राष्ट्रीय ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस ‘भारतमार्केट’ (BharatMarket) शुरू करेगी। CAIT ने एक विज्ञप्ति में कहा कि यह विनिर्माताओं के लिये लॉजिस्टिक्स से लेकर आपूर्ति श्रृंखला तथा उपभोक्ताओं को घर पर सामान पहुँचाने के लिये विभिन्न प्रौद्योगिकी कंपनियों की क्षमताओं को एकीकृत करेगा और इसमें देश भर के विभिन्न खुदरा कारोबारियों की भागीदारी होगी। इस राष्ट्रीय ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस को व्यापारियों द्वारा चलाया जाएगा। वर्ष 1990 में कुछ समर्पित व्यापारियों ने व्यापारियों की समस्याओं को संभालने और उन्हें प्रभावी सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का गठन किया था। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।


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