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निबंध की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखकर अच्छे निबंध लेखन की तैयारी कैसे करें

हम जानते हैं कि यूपीएससी यानी “संघ लोक सेवा आयोग” को देश की सबसे बड़ी परीक्षा (सिविल सर्विसेज़ की परीक्षा) आयोजित कराने का गौरव हासिल है। यूपीएससी की परीक्षा न केवल पारदर्शी व विवादों से मुक्त होती है बल्कि अपने आप में बहुत ही नपी-तुली भी होती है। नपी-तुली कहने से आशय यह है कि बड़ी ज़िम्मेदारियों को सँभालने के लिये अभ्यर्थियों के चयन हेतु आयोजित की जाने वाली इस परीक्षा को आप रटकर अथवा किसी शॉर्टकट फॉर्मूले से उत्तीर्ण नहीं कर सकते हैं। इस बात को लेकर आयोग भी काफी सतर्क रहता है कि इस अत्यंत महत्त्वपूर्ण परीक्षा को पास करने के लिये गंभीर, योग्य और उम्मीदवार ही अंतिम रूप से चयनित हों। इसके लिये यूपीएससी ने त्रिस्तरीय आयोजित होने वाली इस परीक्षा के लिये कई स्तर के फिल्टर भी लगा रखे हैं।

उदाहरण के लिये देखें तो इसकी प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट भी कुछ ऐसा ही पेपर है। जिसमें यूपीएससी अभ्यर्थियों की एक निश्चित स्तर की तर्क क्षमता, डिसीज़न मेकिंग कैपेसिटी व बौद्धिक सूचकांक इत्यादि को परोक्ष रूप से जाँच-परख लेता है। इसी तरह से मुख्य परीक्षा में अनिवार्य इंग्लिश व संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से किसी एक भाषा को क्वॉलीफाइंग करके यूपीएससी स्पष्ट संकेत देता है कि वह हर आयाम में उम्मीदवारों की जाँच-परख करके ही उन्हें चयनित करता है।

यानी आप कुछ भी कर लें, आप यूपीएससी-सीएसई जैसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा को अब किसी शॉर्टकट तरकीब से अथवा मात्र रटकर पास नहीं कर सकते हैं। बेशक इस परीक्षा को पास करने के लिये आपको अत्यधिक मात्रा में महत्त्वपूर्ण तथ्यों को स्मरण में रखकर युद्ध (परीक्षा) में उतरना होता है किंतु इसका यह भी तात्पर्य नहीं है कि आप केवल तथ्यों अथवा पूर्ववर्ती परीक्षा के प्रश्नों को रटकर ही इस परीक्षा को पास कर लेंगे। इसलिये यूपीएससी ने कई बैरियर लगा रखें हैं, जो प्रतिभागियों की बहुआयामी योग्यता को परखने के लिये किसी लिटमस टेस्ट जैसे होते हैं। उनमें से एक फिल्टर मेंस की परीक्षा में निबंध का पेपर भी है। इस ब्लॉग में हम आपको यही बताएंगे कि आखिर निबंध के पेपर की तैयारी कैसे करें। यह ब्लॉग आपके लिये निबंध के पेपर की तैयारी में काफी अहम और मददगार साबित हो सकता है।

निबंध क्या है?

सबसे पहले तो यह समझने की कोशिश करें कि वास्तव में निबंध क्या है? आखिर यूपीएससी-सीएसई की परीक्षा में निबंध का पेपर शामिल क्यों किया गया है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के चार-चार पेपर्स सम्मिलित करने के बावजूद निबंध की क्या आवश्यकता है?

अगर हम निबंध की बात करें तो निबंध दरअसल किसी विषय विशेष पर हमारी समग्र व्यक्तिगत समझ, अनुभवों, तथ्यों व ज्ञान का लिखित संकलन होता है, जिसे हम निर्धारित शब्दों में व्यक्त करते हैं। इसलिये सामान्य अध्ययन के बाकी चार प्रश्नपत्रों के प्रश्नों की प्रकृति की तरह निबंध में किसी विषय पर कोई निश्चित अथवा रटा-रटाया उत्तर नहीं लिखा जा सकता है। अर्थात, एक ही विषय पर अलग-अलग अभ्यर्थी भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण के साथ विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए निबंध लिखकर भी एक समान अंक प्राप्त कर सकते हैं। चूँकि निबंध बहुत ही सब्जेक्टिव विषय है इसलिये इस बात की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक ही निबंध में अलग-अलग परीक्षकों द्वारा दिये गए अंकों में भिन्नता हो। अतः संक्षेप में कहें तो निबंध का कोई एक निश्चित उत्तर नहीं होता है। हाँ, निबंध लिखते समय कुछ खास बातें हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर आप निबंध में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।

यूपीएससी परीक्षा में निबंध के प्रश्नों की बदलती प्रकृति:-

यूपीएससी के निबंधों की प्रकृति साल-दर-साल बदलती रहती है, नतीजन निबंध की तैयारी के लिये कोई एक निश्चित किताब अथवा फॉर्मूला काम नहीं आ पाता। इसलिये यह आवश्यक हो जाता है कि हम निबंध के पेपर के पीछे यूपीएससी की मंशा और निबंध की समझ अच्छे से विकसित कर लें। यूपीएससी अन्य प्रश्नपत्रों की तरह ही निबंध के प्रश्नों की प्रकृति भी बदलता जा रहा है। कुछ वर्ष पहले तक दोनों ही खंड (खंड-क व खंड-ख) में सामान्य अध्ययन के विषयों (अर्थव्यवस्था, कृषि, भूगोल, पर्यावरण, कला एवं संस्कृति इत्यादि) से संबद्ध टॉपिक्स पर निबंध लिखना होता था। इससे प्रतियोगियों को कोई खास समस्या नहीं होती थी। क्योंकि वो जीएस के चारों पेपर्स की तैयारी के दौरान किसी-न-किसी बहाने उन विषयों को पढ़ चुके होते थे और लेखन अभ्यास के माध्यम से निबंध के फॉर्मेट में ढालकर वो एक अच्छा निबंध तैयार कर लेते थे।

इस तरह से अभ्यर्थियों को निबंध के पेपर के लिये अलग-से बहुत खास तैयारी नहीं करनी होती थी। लेकिन बदलते पैटर्न के तहत विगत कुछ वर्षों में एक खंड में तो जीएस के विषयों से संबंधित प्रश्न और दूसरे खंड में अमूर्त विषयों से संबंधित निबंध पूछे जाने लगे। इससे अभ्यर्थियों के सामने दूसरे वाले खंड में समस्या उत्पन्न हो गई। किंतु पिछली बार आयोजित परीक्षा में अभ्यर्थियों के लिये समस्या तब और जटिल हो गई जब निबंध के दोनों ही सेक्शन के सारे-के-सारे निबंध अमूर्त विषय पर आधारित ही पूछ लिये गए। ऐसे में अभ्यर्थियों के लिये यह एक नई समस्या उत्पन्न हो गई। यानी यूपीएससी स्पष्ट संकेत दे रहा है कि इस परीक्षा की तैयारी के लिये किताबी कीड़ा होना मात्र पर्याप्त नहीं है। केवल जीएस पढ़कर मेंस की दीवार को नहीं भेदा जा सकता है। अभ्यर्थियों को किताबों की दुनिया से बाहर भी चिंतन की प्रकृति विकसित करनी होगी।

निबंध कैसे लिखें:-

एक संतुलित निबंध लिखने के लिये आपको अपने विचारों, अनुभवों व तथ्यों को शब्द सीमा के भीतर भूमिका बांधने से शुरू करके मुख्य हिस्से से होते हुए निष्कर्ष तक पहुँचकर प्रभावशाली भाषा में अभिव्यक्त करना होता है। किंतु कुछ बारीक बातें हैं, जिन्हें निबंध लेखन के समय ध्यान रखना चाहिए। जैसे: निबंध में आमतौर पर तीन चीज़ें देखी जा सकती हैं। पहली:- प्रभावशाली भाषा, दूसरा:- तर्क और तीसरा:- तथ्य। इसमें से प्रभावशाली भाषा की आवश्यकता तो सभी निबंधों में ही होती है। किसी भी निबंध में भाषा का प्रभावशाली और प्रवाह में होना अच्छे अंक दिलाने में मददगार होता है। जबकि तर्क व तथ्य निबंध की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। अमूर्त विषयों में आम तौर पर भाषा के साथ-साथ तर्क की आवश्यकता होती है। वहाँ तर्कों के माध्यम से आपको दिये गए कथन के संदर्भ में विचार अभिव्यक्ति करने होते हैं। इसी तरह से विषय विशेष से संबंधित निबंधों में प्रभावशाली भाषा व प्रासंगिक तथ्योंं की आवश्यकता होती है। हाँ, कई बार अमूर्त विषयों में भी तर्कों को जस्टीफाई करने के लिये तथ्यों का उपयोग किया जाना चाहिए किंतु ध्यान रहे कि वहाँ तर्क ही महत्त्वपूर्ण होते हैं। वहाँ तथ्य केवल तर्कों के पूरक होते हैं। इसी तरह से कुछ निबंधों को तथ्यों के माध्यम से मज़बूती दी जाती है और वहाँ तर्कों की विशेष ज़रूरत नहीं होती है। ये निबंध जीएस से संबंधित विषय के होते हैं।

निबंध लिखने के दौरान निम्नलिखित बातें ध्यान में रखें?

निबंध लिखने में जो सबसे महत्त्वपूर्ण बात ध्यान में रखनी होती है, वह यह है कि आपको विषय से भटकने से बचना है। दरअसल जब परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थी निबंध को देखता है तो चुने गए निबंध के बारे में लिखने से पहले वह निबंध पर विचार करता है। ऐसे में उसके दिमाग में उस विषय से जुड़ी एक साथ ढेरों बातें आनी शुरू होती हैं, इसे ब्रेन स्टॉर्मिंग कह सकते हैं। ब्रेन स्टॉर्मिंग के प्रवाह में उसके सामने मुश्किल यह होती है कि वह किसी विषय को कहाँ से शुरू करे और कहाँ ले जाकर समाप्त करे। दूसरी ओर यूपीएससी के निबंध बहुत ही व्यापक व सार्वभौमिक प्रकृति के होते हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों के पास लिखने को बहुत कुछ होता है और इसी प्रक्रिया में जाने-अनजाने कब उनकी कलम ऐसे-ऐसे पैराग्राफ्स अथवा उदाहरण लिखने लगती है, जिसका निबंध से बहुत विशेष संबंध नहीं होता। वो एक तरह से विषय के लिहाज से अप्रासंगिक बातें होती हैं। यह न केवल शब्द सीमा का नुकसान करती हैं बल्कि परीक्षक के मन में नकारात्मक छवि गढ़ते हैं और इसका सीधा असर आपके प्राप्तांकों पर पड़ता है।

निबंध लेखन के दौरान भटकाव से कैसे बचें:-

इसके लिये शुरुआत में ही कुछ बुलेट पॉइंट्स व निबंध का खाका बना लें। निबंध से जुड़ी सभी खास बातें, सवाल, विवाद, समाधान इत्यादि का मन-ही-मन में क्रमवार प्रवाह तैयार कर लें। इसके लिये आप उत्तर पुस्तिका के किसी एक पेज़ पर ही हिंट डायग्राम या माइंड मैप तैयार कर सकते हैं। इसके लिये यूपीएससी अभ्यर्थियों को पर्याप्त समय व पृष्ठ उपलब्ध कराता है। इसके उपरांत एक बार निबंध लेखन शुरू कर देने के बाद नई-नई बातों अथवा तथ्यों को शामिल करने से बचें। निबंध का भटकाव दरअसल यहीं से शुरू होता है। क्योंकि किसी भी विषय पर बहुत कुछ लिखा जा सकता है। किंतु आपको शब्द सीमा व समय का ध्यान रखना है। इसके लिये निबंध लेखन का अभ्यास करें। बिना अभ्यास के यह आदत विकसित नहीं हो पाएगी। भले ही आप इस तरह के ढेरों ब्लॉग पढ़ लें। इसलिये शुरुआती चरण में सप्ताह में एक-दो निबंध लिखकर किसी अच्छे शिक्षक से उसका मूल्यांकन करवाते रहें। फिर निबंध में आत्मविश्वास बढ़ जाने पर आप प्रतिदिन सहजता से एक निबंध लिख सकते हैं। इसके अलावा वर्तनी, व्याकरण की शुद्धता व निबंध के प्रवाह पर भी पर्याप्त ध्यान दें। निबंध के प्रवाह का तात्पर्य ऐसे निबंध से है, जहाँ भाषा अथवा तर्कों का प्रवाह टूट न रहा हो। जहाँ हर पैराग्राफ पिछले पैराग्राफ से जुड़ाव रखता हो। यह प्रवाह निबंध की भूमिका व मुख्य हिस्से से लेकर निष्कर्ष तक बना रहे।

अमूर्त विषय पर निबंध लेखन कैसे सीखें?

अमूर्त विषयों से तात्पर्य ऐसे विषय से है जिनका कोई एक निश्चित मूर्त न हो। अर्थात, ऐसे विषयों में यह पूरी तरह से अभ्यर्थी की कल्पनाशक्ति, विवेक, लेखन कौशल, किताबी ज्ञान से हटकर विषयों पर सुलझी हुई समझ और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर निर्भर करता है कि वो दिये गये विषय की शुरुआत किस तरह से करते हैं। कैसे वो ख़ुद से ही उसके दायरे निर्धारित करते हुए, किन-किन बिंदुओं या आयामों को शामिल करते हुए उसका समापन करते हैं। ऐसे विषयों पर निबंध लिखते समय परीक्षार्थियों के समक्ष समस्या उत्पन्न होती है। क्योंकि तैयारी के दौरान केवल जीएस के विषयों में ही लिप्त रहे अभ्यर्थी प्राय: चिंतन की प्रकृति व उसकी अभिव्यक्ति को अनदेखी कर देते हैं। इसलिये यह विषय अन्य विषयों की अपेक्षा और भी कठिन मालूम पड़ता है। जबकि ऐसा नहीं है। छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से इसे आसान बनाया जा सकता है।

अभ्यर्थी अगर अपने दैनिक जीवन में घट रही प्राकृतिक-अप्राकृतिक, धार्मिक, सामाजिक, पारंपरिक इत्यादि घटनाओं का सूक्ष्म अवलोकन करें, वो जीवन से लेकर मृत्यु तक की प्रक्रियाओं, विवाह से लेकर विवाह विच्छेद के पीछे के मनोविज्ञान, सभी तरह के सामाजिक अथवा वैज्ञानिक घटनाओं के पीछे के मानवीय गुण, दोष, मूल वज़ह, प्रवृत्तियों व समाधान इत्यादि को थोड़े-थोड़े करके समझने की कोशिश करें, जीवन के सभी मूर्त-अमूर्त आयामों व विचारों इत्यादि पर चिंतन करने की प्रकृति व लेखन अभ्यास करें तो अन्य विषयों की तरह इस विषय को प्रतिदिन निश्चित समय देने की आवश्यकता नहीं है। बिना प्रतिदन अलग से समय दिये ही आप हर पल सटीक चिंतन की ऐसी गूढ़ प्रकृति विकसित कर पाएंगे, जो अमूर्त विषयों पर आपकी समझ व तत्काल अभिव्यक्ति की क्षमता को विकसित करने लगेगी।

ध्यान रहे कि जिस तरह से आप जीएस के किसी भी विषय में कुछ एक दिन मात्र में आत्मविश्वास से नहीं भर जाते हैं, उसी तरह से आप कुछ दिन मात्र ऐसा करके अमूर्त विषयों में निबंधकार नहीं बन जाएंगे। इसके लिये शुरुआत में थोड़ी-सी कठिनाई ज़रूर होगी किंतु कुछ ही महीनों में आप ऐसे विषयों में लेखन में ख़ुद ही सहज महसूस करने लगेंगे। अमूर्त विषयों में निबंध लेखन के लिये अभ्यर्थियों को कुछ प्रतिष्ठित दार्शनिकों व विचारकों (जैसे: महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला, अल्बर्ट आइंस्टीन, स्टीफन हॉकिंग, अरस्तू, सुकरात, कबीर इत्यादि) के विचारों, महापुरुषों के कथन इत्यादि को पढ़कर उनकी व्याख्या करनी चाहिए। उदाहरणों के साथ उनकी व्याख्या करनी चाहिए। इससे न केवल आपके भीतर चिंतन की प्रवृत्ति विकसित होगी बल्कि आप उन्हें लिखकर अभिव्यक्त करना भी सीखेंगे। अगर आप इतना करते हैं तो निश्चित ही अमूर्त विषयों पर आपकी समझ व निबंध लेखन क्षमता औरों से कहीं बेहतर होगी।

निबंध में भूमिका, मुख्य हिस्सा और निष्कर्ष में शब्दों की सीमा का क्या अनुपात होना चाहिए?

ऐसा कोई निश्चित नियम नहीं है। किंतु एक संतुलित निबंध उसे कहा जा सकता है, जिसमें कुल शब्द सीमा का 20-25 प्रतिशत भूमिका में, 20-25 प्रतिशत निष्कर्ष में और बाकी अर्थात 50-60 प्रतिशत हिस्सा मुख्य भाग में दिया जाता है।

क्या निबंध में क्वोटेशन का उपयोग करना आवश्यक हैं?

ऐसा बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है। हाँ, इतना ज़रूर है कि सही जगह पर इस्तेमाल किया गया सटीक व प्रासंगिक क्वोटेशन आपके निबंध को थोड़ा और भी प्रभावशाली बना सकता है। किंतु अनावश्यक अथवा अप्रासंगिक क्वोटेशन का प्रयोग आपके निबंध को अकारण भटका भी सकते हैं। इससे परीक्षक को यह अनुभव होगा कि आप पूछे गए निबंध का मर्म नहीं समझ पाए हैं तभी अनर्गल क्वोटेशन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिये क्वोटेशन का इस्तेमाल जब भी करें, बहुत सोच-समझकर ही करें। गलत, अप्रासंगिक अथवा विषय से भटके हुए बेवज़ह भ्रामक क्वोटेशन्स का इस्तेमाल करने से बेहतर है कि ऐसे क्वोटेशन का प्रयोग ही न करें। भले ही वो क्वोटेशन बहुत महत्त्वपूर्ण व सुंदर संदेश वाले ही क्यों ना हों। इसलिये अगर आपका निबंध, विषय को केंद्र में रखकर उचित व सटीक तर्कों तथा प्रासंगिक तर्कों के साथ सटीक निष्कर्ष तक पहुँचता है तो क्वोटेशन बहुत मायने नहीं रखते। बिना क्वोटेशन्स के भी आप अच्छे अंक हासिल कर सकते हैं।

आशा है, यह ब्लॉग आपके लिये मार्गदर्शक साबित हुआ होगा। अंत में एक महत्त्वपूर्ण बात हमेशा ध्यान रखें, “प्रैक्टिस मेक्स अ मैन परफेक्ट” इस कथन का कोई विकल्प नहीं है। आप कितना भी पढ़ लें, अगर उसे अभ्यास में नहीं उतारते हैं तो फिर आप अच्छा निबंध नहीं लिख पाएंगे। यह ठीक वैसे ही है कि पानी में तैरने के कितने भी नियम पढ़ लें किंतु जब तक आप पानी में नहीं उतरेंगे, आप तैरना नहीं सीख पाएंगे। इसलिये यह ब्लॉग पढ़ने के बाद लेखन अभ्यास करना शुरू कर दें और कॉपियों का मूल्यांकन भी करवाएँ ताकि गलतियों से सीखकर उनमें सुधार करके अच्छे अंक हासिल कर सकें।

  अजय सिंह  

अजय सिंह आईआईएमसी, नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। वर्तमान में सिविल सर्विसेज परीक्षा के प्रतियोगी छात्र हैं।

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