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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

मृदारहित कृषि

  • 24 Aug 2021
  • 12 min read

परिचय 

  • कृषि की वे पद्धतियाँ जिनमें जड़ों को विकसित करने के लिये मिट्टी का प्रयोग किये बिना पौधों को उगाया जाए, मिट्टी रहित खेती कहलाती हैं।

मिट्टी रहित खेती की आवश्यकता:

  • बढ़ती जनसंख्या के लिये खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना: COVID-19 महामारी और बढ़ती जनसंख्या की बढ़ती खाद्य मांगों को पूरा करने एवं वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये वर्ष 2050 तक खाद्य उत्पादन में 60% की वृद्धि होनी चाहिये।
  • पारंपरिक खेती के लिये संसाधनों की कमी: दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के कारण कृषि के लिये उपयुक्त प्राकृतिक संसाधन, अर्थात् कृषि योग्य भूमि और जल में कमी आ रही है।
    • बढ़ती आबादी का पेट भरने के लिये न केवल मौजूदा कृषि योग्य भूमि में खाद्य फसलों की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता है, बल्कि वैकल्पिक कृषि तकनीकों को प्रोत्साहित करने की भी आवश्यकता है।

मृदारहित कृषि के प्रकार

हाइड्रोपोनिक्स:

  • परिभाषा: हाइड्रोपोनिक्स जल आधारित, पोषक तत्त्वों के घोल में पौधों को उगाने की एक विधि है।
  • जड़ों को उगाने की विधि: इस विधि में जड़ प्रणाली को एक अक्रिय माध्यम जैसे पेर्लाइट, मिट्टी के छर्रों, पीट, काई या वर्मीक्यूलाइट का उपयोग करके उगाया जाता है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य ऑक्सीजन तक पहुँच प्रदान करना है जो उचित विकास के लिये आवश्यक है।

लाभ:

  • भूमि और जल की बचत: क्लोज़्ड वाटर लूप सिस्टम वाली हाइड्रोपोनिक खेती की तकनीक भूमि और पानी तक सीमित पहुँच वाले किसानों के लिये एक व्यवहार्य विकल्प है।
  • शहरी क्षेत्रों के लिये उपयुक्त: शहरी और उपनगरीय क्षेत्रों में जहाँ कृषि योग्य भूमि प्रदूषित है, मिट्टी रहित प्रणालियों का महत्त्व कई गुना बढ़ जाता है।
  • कम संसाधन खपत: कम और अधिक कुशल रूप से संसाधन की खपत इस वैकल्पिक कृषि तकनीक को विभिन्न हितधारकों द्वारा अपनाए जाने के लिये प्रेरित करती है।
  • उच्च उपज: खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, मिट्टी रहित प्रणालियों की सब्जी की उपज पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में 20-25% अधिक होती है क्योंकि प्रति वर्ग मीटर पौधों की संख्या अधिक होती है।

कमियाँ 

  • अधिक समय और ध्यान देने की आवश्यकता: पानी को नियमित अंतराल पर बदलने की आवश्यकता होती है क्योंकि पानी की आपूर्ति में रोगजनक बैक्टीरिया एवं विषाणु के प्रवेश करने पर जल के पुनरावर्तन से बीमारी अधिक तेज़ी से फैलती है।
  • पानी और बिजली गहन: हाइड्रोपोनिक खेती में पानी और बिजली दो प्रमुख कारक हैं। अपर्याप्त जल की आपूर्ति या स्थिर बिजली के अभाव में हाइड्रोपोनिक प्रणाली अच्छी तरह से कार्य नहीं करती।

Hydroponics

एरोपोनिक्स:

  • परिभाषा: एरोपोनिक्स खेती का एक पर्यावरण के अनुकूल तरीका है जिसमें जड़ें हवा में लटकी रहती हैं और पौधे बिना मिट्टी के आर्द्र वातावरण में बढ़ते हैं।
  • विधि: यह हाइड्रोपोनिक्स का एक प्रकार है जहाँ पौधों के बढ़ने का माध्यम और बहते पानी दोनों अनुपस्थित होते हैं।
    • इस विधि में पौधों की जड़ों पर पानी और पोषक तत्त्वों के घोल का छिड़काव किया जाता है।
    • यह तकनीक किसानों को ग्रीनहाउस के अंदर आर्द्रता, तापमान, पीएच स्तर और जल प्रवाह को नियंत्रित करने में सक्षम बनाती है।

लाभ:

  • जल, उर्वरक और कीटनाशक के उपयोग में गिरावट: इस सिस्टम में पानी के उपयोग में 98% और उर्वरक के उपयोग में 60% की कमी आती है।
    • कीटनाशक पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं क्योंकि मिट्टी की अनुपस्थिति बीमारियों की संभावना को कम करती है।
  • उपज की तेज़ गति: एरोपोनिक रूप से उगाए गए पौधों की वृद्धि तीन गुना तेज़ होती है और पैदावार अधिक सुसंगत होती है।
    • चूँकि पोषक तत्त्वों को पौधों और जड़ों पर छिड़का जाता है, इसलिये जड़ों द्वारा अवशोषित किये जाने के लिये कक्ष में भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन और अन्य गैसें होती हैं।
    • एक सीमित स्थान में खेती करने से किसान को कीट और टिड्डियों के हमलों और अचानक तेज़ी से बढ़ती गर्मी पर नियंत्रण करने में मदद मिलती है।

कमियाँ:

  • उच्च प्रौद्योगिकी-निर्भरता: एरोपोनिक्स प्रौद्योगिकी पर बहुत अधिक निर्भर है।
    • यदि सिस्टम का कोई भी घटक विफल हो जाता है या टूट जाता है, तो यह पूरे सिस्टम को पूरी तरह से बेकार कर देगा।
  • गहरी समझ की आवश्यकता: व्यक्ति को एरोपोनिक सिस्टम को स्थापित करने और चलाने में सक्षम होना चाहिये तथा पौधों के लिये सही पोषक तत्त्व समाधान में भी सक्षम होना चाहिये अन्यथा पौधा मर सकता है।
  • महँगी तकनीक: एरोपोनिक्स अत्यधिक महँगी है और इसलिये सभी के लिये वहनीय नहीं है, इस तरह की प्रणाली को स्थापित करने में लगभग 8 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर लागत आती है।
  • निरंतर निगरानी की आवश्यकता: पौधों के पीएच स्तर और पोषक तत्त्व घनत्व अनुपात पर निरंतर ध्यान देना चाहिये क्योंकि इस काम को करने के लिये कोई तरीका अभी उपलब्ध नहीं है।

एक्वापोनिक्स:

  • परिभाषा: एक्वापोनिक्स एक प्रणाली है जो एक बंद प्रणाली के भीतर हाइड्रोपोनिक्स और जलीय कृषि को जोड़ती है।
  • विधियाँ: एक्वापोनिक्स प्रक्रिया में तीन जैविक घटक होते हैं: मछलियाँ, पौधे और बैक्टीरिया।
    • यह प्रणाली पौधों और मछलियों के बीच एक सहजीवी संबंध का प्रतिनिधित्व करती है; मछली का मल पौधों के लिये उर्वरक के रूप में उपयोग किया जाता है और पौधे मछलियों के लिये पानी को साफ करते हैं।

लाभ:

  • पर्यावरण के अनुकूल: एक नाइट्रोजन स्रोत (मछली के भोजन) से दो कृषि उत्पाद (मछली और सब्जियाँ) उत्पन्न होते हैं।
    • इस तरह की प्रणाली जलीय कृषि अपशिष्ट को आस-पास के वाटरशेड को प्रदूषित करने से भी रोकती है।
  • जैविक उर्वरक: एक्वापोनिक्स खेती में कीटनाशक या शाकनाशी शामिल नहीं हैं क्योंकि ये रसायन मछली को मार सकते हैं।
    • इस प्रणाली में मछली का मल पौधों के लिये पोषक तत्त्वों से भरपूर उर्वरक है।
  • अत्यधिक जल कुशल: एक्वापोनिक्स के परिणामस्वरूप ज़मीन पर उगाए जाने वाले पौधों (80-90% पानी की बचत) के विपरीत पानी की भारी बचत हो सकती है।
  •  जगह की बचत: एक एक्वापोनिक्स सिस्टम को किसी भी पैमाने पर सेट किया जा सकता है।
    • यह एक्वैरियम जितना छोटा और ग्रीनहाउस वाणिज्यिक फार्म जितना बड़ा हो सकता है।

कमियाँ:

  • अधिक जटिल प्रणाली: पौधों और मछलियों दोनों के लिये आदर्श वातावरण का समर्थन एक्वापोनिक्स को हाइड्रोपोनिक्स की तुलना में अधिक जटिल प्रयास बनाता है।
  • सीमित अनुप्रयोग: यह कंद पौधों और जड़ वाली सब्जियों के लिये उपयुक्त नहीं है क्योंकि वे अपनी अधिकांश वृद्धि मिट्टी के भीतर करते हैं तथा एक्वापोनिक्स में मिट्टी के विकल्प के रूप में पानी का उपयोग करते हैं।
  • विफलता के कई बिंदु: एक्वापोनिक्स में सिस्टम विफल हो सकता है; मछलियाँ मर सकती हैं यदि उनके के लिये सही परिस्थितियाँ नहीं हैं और पौधे भी रोगजनकों के लिये अतिसंवेदनशील होते हैं।

Aquaponics-System-Work

आगे की राह

  • खाद्य सुरक्षा के लिये मिट्टी रहित तकनीकों को प्रोत्साहित करना: भूख से लड़ने और कुपोषण के बोझ से निपटने के लिये खाद्य उत्पादन और वितरण प्रणाली को मज़बूत करना महत्त्वपूर्ण है।
    • एक्वापोनिक्स और हाइड्रोपोनिक्स के विकास में खाद्य सुरक्षा के सभी आयाम शामिल हैं।
    • सरकार इन विधियों को पारंपरिक खेती के लिये व्यवहार्य विकल्प के रूप में मानती है और इन तकनीकों को बड़ी संख्या में किसानों के लिये सस्ती बनाने में सहायता प्रदान करेगी।
  • ज्ञान और कौशल प्रदान करना: हालाँकि इन वैकल्पिक तकनीकों का उपयोग विभिन्न हितधारकों द्वारा किया जा सकता है, घरेलू उपयोग के लिए कृषि करने वाले किसानों और छोटे से बड़े पैमाने पर किसानों के सुरक्षित, सफल और टिकाऊ कार्यान्वयन के लिये उनमें विशिष्ट ज्ञान और कौशल विकसित किया जाना चाहिये।
  • सतत् खेती को सुगम बनाना: भारत जैसे देश में कृषि भूमि पर लगातार दबाव बना रहता है अतः इसे अन्य विकल्प के रूप में उपयोग में लाया जाता है।
    • एरोपोनिक्स और हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली के तहत खेती द्वारा भूमि की कमी को दूर कर स्थायी कृषि तकनीकों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
  • स्कूलों के लिये आगे की रणनीति: ऐसी प्रणालियाँ कठिन हैं लेकिन इन्हें बनाए रखना असंभव नहीं है, इन प्रणालियों की कम-से-कम बुनियादी समझ होना आवश्यक है।
  • स्कूल छात्रों को गणित, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और इंजीनियरिंग जैसे मुख्य एसटीईएम विषयों के व्यावहारिक ज्ञान के साथ कृषि कार्य के रूप में स्कूलों में एक्वापोनिक सिस्टम स्थापित करने के लिये प्रोत्साहित कर सकते हैं।
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